पहले नज़दीकियां बढ़ाई गईं
और फिर फ़ासले बनाये गये
*
कोई त्यौहार ऐसा भी आये
तेरी यादें भी जायें छुट्टी पर
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प्यार में सब्र भी ज़रूरी है
होगा इज़हार वक़्त लगता है
*
जब अपनी नज़दीकी बढ़ती जाती है
लोगों की बेचैनी बढ़ती जाती है
#काशिफ़अदीब
समर्थ युवा शायर
(Syed Kashif Adeeb)
پہلے نزدیکیا�� بڑھائی گئیں
اور پھر فاصلے بنائے گئے
کاشف ادیب
पहले नज़दीकियां बढ़ाई गईं
और फिर फ़ासले बनाये गये
काशिफ़ अदीब
#kashifadeeb #UrduPoetry #rekhta
تو لفظ حسیں سے بھی بڑھ کر حسیں ہے
کوئی تیرے جیسا ہو ممکن نہیں ہے
तू लफ़्ज़े हसीं से भी बढ़कर हसीं है
कोई तेरे जैसा हो मुमकिन नहीं है
#काशिफ़अदीब#kashifadeeb