आज दिनांक 18 जुलाई 2026 को जनपद मेरठ में किसान संगठनों द्वारा विद्युत आपूर्ति बाधित होने के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था। इसी दौरान इं० सौरभ कुमार, विद्युत सहायक अभियंता (तृतीय), 11 केवी, मेरठ किसानों की समस्याएँ सुनने एवं उनसे वार्ता करने के उद्देश्य से ही धरना स्थल पर एसडीएम से मिलने के लिए कलेक्ट्रेट के दूसरे गेट की ओर से जा रहे थे ,तभी कुछ किसानों द्वारा पुलिसकर्मियों से कहा गया कि एसडीओ भाग रहा है। इसके तुरंत बाद वहाँ मौजूद एक पुलिस उपनिरीक्षक (दरोगा) दौड़कर इं० सौरभ कुमार के पास पहुंचे और उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उनका हाथ पकड़ के ले जाने लगा जबकि इंजीनियर सौरभ एस डी एम से ही मिलेने धरना स्थल पर किसानों को संतुष्ट करने पहुचे थे। इंजीनियर सौरभ एक उपखण्ड अधिकारी स्तर के अधिकारी है और इस तरह का व्यवहार उनके साथ दरोगा स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाना नियम संगत नही है।
साथ ही कुछ अराजक तत्वों द्वारा इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रसारित किया गया, जिससे इंजीनियर सौरभ मानसिक रूप से आहत है और अपमानजनक महसूस कर रहे है। इस घटना से पूरे प्रदेश के बिजली अभियंताओं में गहरा रोष व्याप्त हो रहा है।
इस भीषण गर्मी में पूरे प्रदेश को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली अभियंताओं के साथ इस प्रकार की अभद्रता स्वीकार करने योग्य नहीं है। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कृपया उपरोक्त प्रकरण में न्याय संगत कार्यवाही कराने की कृपा करें, जिससे सभी विद्युत अभियंता बिना किसी भय के सम्मान के साथ अपने विभागीय दायित्वों का निर्वहन कर सके।
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उत्तर प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, उनकी कोई सुनने वाला नहीं है, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
पावर कॉरपोरेशन के हालत बयां करता ये AI वीडियो।
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निर्दोष मुख्य अभियंता इं• पंकज अग्रवाल जी का निलंबन बिल्कुल गलत एवं अन्यायपूर्ण है।
ऊर्जा प्रबंधन अपनी नीतियों और आरएमएस सहित तकनीकी सिस्टम की विफलता का ठीकरा ईमानदार और मेहनती अभियंताओं को निलंबित कर उनपर फोड़ रहा है,जो की कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
@myogiadityanath@UPPCLLKO
आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी।
लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा।
माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे।
#stop_privatization_of_uppcl
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रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर लेसा में 5600 पद समाप्त किए जाने से हर वर्ग के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा : राजधानी की बिजली व्यवस्था बचाने के लिए बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री से गुहार: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी आंदोलन जारी*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था बर्बाद होने से बचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघर्ष समिति ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है किन्तु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने बताया की नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी सुधार के प्रति हमेशा पॉजिटिव रुख रखते हैं किन्तु बिजली कर्मियों से बिना विचार विमर्श किए केवल निजीकरण की पृष्ठभूमि बनाने हेतु हजारों की तादाद में सभी वर्गों के पदों को समाप्त किया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी बेचैनी और उबाल है।
आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग होंगे और 391 एस एस ओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं। इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए । इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने बताया की इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के चार पद, अधिशासी अभियंता के 17 पद, सहायक अभियंता के 36 पद, जूनियर इंजीनियर के 155 पद और टी जी 2 के 1517 पद समाप्त किए जा रहे हैं। अन्य संवर्गो के पदों में भी कमी की जा रही है।
संघर्ष समिति ने बताया की लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद इस प्रकार 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिसमें 3305 पद संविदा कर्मियों के और 2301 पद नियमित कर्मचारियों के हैं।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसानों के हितों के प्रति जागरूक हैं और इस हेतु सुधार के लिए सदैव तैयार है किंतु कथित सुधार के नाम पर किसी भी स्थिति में बिजली सेक्टर का निजीकरण नहीं होने देंगे। बिजली कर्मियों का संकल्प है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 334वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
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विधान सभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का किया विरोध : निजीकरण के उद्देश्य से हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा
उत्तर प्रदेश के चार शहरों में विद्युत वितरण प्रणाली की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग करने से आए दुष्परिणामों को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने 01 नवंबर से लेसा में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर हजारों पदों को समाप्त किए जाने का विरोध किया है।
आज संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने इस संबंध में विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष और मेरठ के माननीय विधायक श्री अमित अग्रवाल जी से फोन पर बात की। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के बाद मेरठ की बिजली व्यवस्था पहले से खराब हो गई है। श्री अमित अग्रवाल ने बताया कि 12 सितंबर 2025 को हुई प्राक्कलन समिति की बैठक में भी प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष के पद से उन्होंने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का प्रबल विरोध किया था। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि विद्युत वितरण की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है अतः इसे वापस लिया जाय।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि प्रबन्धन यह सब तब कर रहा है जब बिजली कर्मी और अभियन्ता दीपावाली के पर्व पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने हेतु योजनाबद्ध ढंग से काम कर रहे हैं। अभियंता संघ ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जनपदों में 16 अक्टूबर को अभियंताओं की सभा भी बुलाई है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है ।
संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं।
निजीकरण के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने लगातार 320 वें दिन जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें।
संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी।
पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है।
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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आगरा में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का लिया गया संकल्प : विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन और कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन की ऊर्जा मंत्री के साथ हुई बैठक के समाचार के बाद निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का आह्वान
निजीकरण के विरोध में आज आगरा में विद्युत अभियंताओं के चिन्तन मंथन शिविर के दौरान जब यह समाचार मिला कि आज ऊर्जा मंत्री ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने हेतु विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविन्द कुमार, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन के साथ मीटिंग की है तो अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा और अभियंताओं ने एक स्वर से संकल्प लिया कि निजीकरण का टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया जायेगा जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रबन्धन की होगी।
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में आगरा में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य वक्ता आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण करते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
ईस्टर्न इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन प्रशान्त चतुर्वेदी ने झारखण्ड में रांची और जमशेदपुर के फ्रेंचाइजीकरण के विरोध में किए गए संघर्ष के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि निजीकरण बहुत ही भयावह है अतः पूरी शक्ति से संघर्ष की तैयारी करिये।
आगरा में शिविर के दौरान ही यह जानकारी मिलने पर कि आज ऊर्जा मंत्री ने जल निगम के संगम फील्ड हॉस्टल में विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविन्द कुमार, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन से मीटिंग की है, तो अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा।
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेकर सामने आएं तो उप्र में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
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बिजली व्यवस्था में अप्रत्याशित सुधार के दृष्टिगत बिजली के निजीकरण निरस्त करने की मांग:बिजली के निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम जारी:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज यहां कहा कि कल दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री जी की अध्यक्षता में आयोजित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में हुए अप्रत्याशित सुधार की चर्चा की गई । मीटिंग में बिजली की तकनीकी और वाणिज्यिक हानि में निरंतर कमी की सराहना की गयी है जिसकी पुष्टि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री मा अरविन्द कुमार शर्मा जी द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से स्वयं की गई है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि जब सार्वजनिक क्षेत्र में रहते हुए एटीएंडसी हानियों में काफी गुणात्मक कमी हुई है और प्रदेश में पूर्व में हुए आगरा और ग्रेटर नोएडा का निजीकरण का प्रयोग विफल हो गया है तथा निजीकरण में हुए घोटाले व देश में अन्य जगहों पर निजीकरण के विफल प्रयोग को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जानी चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन कथित घाटे का हवाला देते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की दलील दे रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन का प्रबंधन घाटे को लेकर इतना संवेदनशील है तो उसे सबसे पहले आगरा का फ्रेंचाइजी करार तत्काल रद्द कर देना चाहिए,जिसके चलते पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष 1000 करोड रुपए का नुकसान हो रहा है । संघर्ष समिति ने कहा कि ए टी एंड डी हानियां के गलत आंकड़ों के कारण से टोरेंट पावर को बहुत सस्ती दरों पर पॉवर कॉरपोरेशन बिजली दे रहा जिससे विगत 14 वर्षों में 3432 करोड रुपए की हानि हो चुकी है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काम करने के बावजूद बिजली कर्मचारियों को लगातार तीन माह तक वेतन नहीं दिया जाना यह बहुत ही गंभीर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही है और पूरी तरह अमानवीय है। संविदा कर्मियों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने से विभिन्न जनपदों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।निजीकरण किये जाने हेतु बिजली कर्मचारियों पर बड़े पैमाने पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस न लिये जाने से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आज लगातार 293 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और संकल्प व्यक्त किया कि जब तक निजीकरण का फैसला निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती तब तक बिजली कर्मी लगातार आंदोलन जारी रखेंगे।
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अनपरा ई और ओबरा डी परियोजनाओं का जॉइंट वेंचर देने के दो साल बाद भी काम शुरू न हो पाने से परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी: जॉइंट वेंचर समाप्त कर दोनों परियोजनाओं को उत्पादन निगम को दिया जाय : निजीकरण के विरोध में 289 दिन से लगातार आंदोलन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आने वाले वर्षों में बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि अनपरा ई और ओबरा डी परियोजनाओं का जॉइंट वेंचर समाप्त कर इसे प्रदेश की जनता हित में में तत्काल उत्पादन निगम को दिया जाय। संघर्ष समिति ने कहा है कि परियोजना शुरू न होने से परियोजनाओं की लागत भी बढ़ेगी और उत्पादन लागत भी बढ़ेगी। संघर्ष समिति ने बताया कि उत्पादन निगम की तुलना में जॉइंट वेंचर में इन परियोजनाओं को बनाने से कम से कम 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट महंगी बिजली मिलेगी।
उधर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में 289 दिन से लगातार चल रहे आंदोलन के क्रम में आज प्रदेश भर में समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने विरोध सभा कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने जुलाई 2023 में 2×800 मेगावॉट क्षमता की आनपार ई और 2×800 मेगावॉट क्षमता की ओबरा डी परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर में मेजा थर्मल प्राइवेट कम्पनी को देने का निर्णय लिया था। विद्युत उत्पादन निगम और मेजा थर्मल के साथ ओबरा डी परियोजना का ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट सितंबर 2023 में और अनपरा ई परियोजना का जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट अप्रैल 2024 में हस्ताक्षरित कर लिया गया था। किन्तु अभी तक कोई काम नहीं शुरू हुआ है।
संघर्ष समिति ने बताया कि एग्रीमेंट के तहत ओबरा डी परियोजना की लागत 17985 करोड़ रुपए और आनपारा ई परियोजना की लागत 18624 करोड़ रुपए रखी गई है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट होने के 2 साल बाद भी इन दोनों परियोजनाओं पर कोई काम नहीं शुरू हुआ है। इसका सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह होगा कि परियोजनाओं की लागत बढ़ जाएगी और निर्धारित अवधि 50 माह में परियोजनाओं के पूरा न होने से से प्रदेश को बिजली नहीं मिल पायेगी।
संघर्ष समिति ने ने कहा कि ओबरा और अनपरा परियोजनाएं उत्पादन निगम के पास है और ओबरा डी और आनपारा ई परियोजनाएं इसका विस्तार मात्र है । यह परियोजनाएं किसी दूसरी कंपनी को जॉइंट वेंचर में देने से तमाम तकनीकी दिक्कतें पैदा होगी इसी कारण से जॉइंट वेंचर में काम नहीं शुरू पा रहा है।
ऐसी स्थिति में इन परियोजनाओं को व्यापक जनहित में तत्काल उत्पादन निगम को दिया जाना चाहिए।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आज लगातार 289 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और संकल्प व्यक्त किया कि जब तक निजीकरण का फैसला निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती तब तक बिजली कर्मी लगातार आंदोलन जारी रखेंगे।
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाले के चलते एक लाख 15 हजार करोड़ रुपए का एरियर खतरे में पड़ने की आशंका : निजीकरण हेतु प्रीपेड मीटर लगाकर डाउन साइजिंग करने की साजिश : निजीकरण के विरोध में प्रान्त भर में विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आशंका जताई है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाले के चलते विद्युत वितरण निगमों का 115000 करोड़ रुपए का एरियर खटाई में पड़ सकता है। संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि निजीकरण हेतु स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के नाम पर बड़े पैमाने पर डाउन साइजिंग की जा रही है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सीतापुर, गोण्डा आदि स्थानों पर पकड़ा गया स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाला निजी कंपनियों और दोषी उपभोक्ताओं की मिलीभगत के साथ किसी बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह ध्यान देने की बात है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे सबसे बड़ा तर्क घाटे का दिया जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि वैसे तो पावर कार्पोरेशन प्रबंधन घाटे के झूठे और मनगढ़ंत आंकड़े दे रहा है। किन्तु स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों की पुराने मीटर की रीडिंग शून्य करने या नष्ट करने के समाचार बहुत खतरनाक संदेश दे रहे हैं जिसे समय रहते न रोका गया तो बिजली राजस्व का बकाया वसूलना नामुमकिन हो जाएगा और वस्तुतः घाटा और बढ़ जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान में विद्युत वितरण निगमों का उपभोक्ताओं पर लगभग 115000 करोड रुपए का बिजली राजस्व का बकाया है। पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन के आंकड़ों के अनुसार लगभग 110000 करोड रुपए का घाटा है। संघर्ष समिति प्रारंभ से ही यह बात कह रही है कि 115000 करोड रुपए का राजस्व वसूल लिया जाए तो कोई घाटा नहीं रहेगा, उल्टे पावर कॉरपोरेशन 5000 करोड रुपए के मुनाफे में आ जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार लगभग 34 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं और इनमें से लगभग 06 लाख स्मार्ट मीटर अभी तक वापस नहीं किए गए हैं। कितने लाख मीटर में पुरानी रीडिंग शून्य की गई है या नष्ट की गई है यह एक बड़ी जांच का विषय है।
संघर्ष समिति ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर निजीकरण की प्राथमिक शर्त है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद निजीकरण होने पर निजी कंपनियों को राजस्व वसूली में किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें स्वतः राजस्व मिलता रहेगा।
स्पष्ट है कि निजीकरण हेतु स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और इस नाम पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने निजीकरण के पहले बड़े पैमाने पर डाउनसाइजिंग करना प्रारंभ कर दिया है।
वर्ष 2017 के मापदंडों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 20 कर्मचारी और शहरी क्षेत्र में 36 कर्मचारियों का नियम था। बड़े पैमाने पर संविदा कर्मचारियों की डाउन साइजिंग करने के लिए मापदंड में प्रतिगामी परिवर्तन किया गया। उपभोक्ताओं की संख्या 2017 की तुलना में कई गुना बढ़ चुकी है। इसके बावजूद अब शहरी क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 18:30 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 12.5 कर्मचारी का मापदण्ड बनाकर बड़ी संख्या में संविदा कर्मी निकाले जा रहे हैं। यह सब निजी घरानों की मदद के लिए किया जा रहा है।
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बिजनेस प्लान और आरडीएसएस स्कीम में अरबों रुपए खर्च करने के बाद पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का कोई औचित्य नहीं: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति , उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में आरडीएसएस स्कीम और बिजनेस प्लान के तहत अरबो रुपए की योजनाएं स्वीकृत करने के बाद इन निगमों को निजी घरानों को मात्र 6500 करोड रुपए की रिजर्व प्राइस पर सौंपने का क्या औचित्य है । संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि जितनी धनराशि सुधार के लिए खर्च की जा रही है उससे कहीं कम धनराशि की रिजर्व प्राइस पर इन विद्युत वितरण निगमों को बेचा जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन निजी घरानों के साथ मिली भगत में उत्तर प्रदेश सरकार सरकार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर एक लाख करोड रुपए की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के मोल बेचना चाहते हैं।
आज लगातार 275 वें दिन निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी धरना प्रदर्शन जारी रहा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि हाल ही में उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने बिजनेस प्लान के तहत पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 824.65 करोड रुपए और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 819 करोड रुपए का बिजनेस प्लान स्वीकृत किया है। बिजनेस प्लान के तहत इन दोनों विद्युत वितरण निगमों में बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु कार्य किया जाना है। संघर्ष समिति ने कहा की इन दोनों विद्युत वितरण निगमों में बिजनेस प्लान के तहत 16.43 अरब रुपए खर्च करने के बाद इन निगमों को निजी घरानों को कौड़ियों के मोल बेचना कदापि स्वीकार्य नहीं है।
संघर्ष समिति ने कहा कि भारत सरकार की आरडीएसएस योजना के अंतर्गत विद्युत वितरण निगमों में नए बिजली उपकेंद्रों को बनाने और बने हुए बिजली उपकेंद्रों को सुधार करने और उनका नवीनीकरण करने का कार्य किया जा रहा है। इस हेतु भी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के लिए भारत सरकार ने 7089 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं।
आरडीएसएस योजना के अंतर्गत पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 3842 करोड रुपए और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 3247 करोड रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि आरडीएसएस योजना और बिजनेस प्लान में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के लिए कुल 8732 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है।
संघर्ष समिति ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा निजीकरण हेतु तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट के तहत इन विद्युत वितरण निगमों को बेचने की रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड़ पर रखी गई है जबकि इनकी परिसंपत्तियों लगभग एक लाख करोड रुपए की हैं।
संघर्ष समिति ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि बेचने के लिए जो रिजर्व प्राइस रखी गई है उससे अधिक की धनराशि इन विद्युत वितरण निगमों के सुधार में खर्च की जा रही है। यह कौन सा रिफॉर्म है जिसमें सरकारी धन से सुधार कर इसे निजी घरानों को कौड़ियों के मोल बेचा जा रहा है ?
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 275 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण के विरोध में अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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उपभोक्ता परिषद ने कहा निजीकरण के नाम पर मेगा घोटाला कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल इस संस्था के हैं महासचिव उन्होंने अपने पद का किया दुरुपयोग किसी प्राइवेट संस्था को करोड़ों का नहीं दे सकता कोई चंदा और सदस्यता शुल्क पावर कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष है इसके डायरेक्टर जनरल
उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार का भुगतान किया:घाटे के नाम पर निजीकरण की दलील देने वाले किस मद में डिस्कॉम एसोशिएशन को कर रहे हैं भुगतान-संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज खुलासा किया कि विगत 03 जून 2025 को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और उप्र के पांचो विद्युत वितरण निगमों ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान किया है। संघर्ष समिति ने सवाल किया है कि एक ओर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन घाटे के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की दलील दे रहा है और दूसरी ओर एक निजी संस्था ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को करोड़ों रुपए का चंदा दे रहा है, यह बहुत गम्भीर मामला है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन से लेकर उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों द्वारा डिस्कॉम एसोशिएशन को चंदा देने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाय।साथ ही हितों के टकराव को देखते हुए उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल को निर्देश दिया जाय कि वे या ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री का पद छोड़ दें या पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद से उन्हें हटा दिया जाय।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन और चंदे की ऊपर से दिखाई दे रही रकम "टिप ऑफ द आईस बर्ग" है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे मेगा घोटाला है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों को बहुत बड़े घोटाले से बचाने के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति ने यह आरोप पुनः लगाया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन विद्युत वितरण निगमों में समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन कर रही है और विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण में पूरी मदद कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन के पीछे देश के बड़े कॉर्पोरेट घरानों का हाथ है और इस एसोसिएशन का गठन विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण हेतु किया गया है।आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर इसीलिए निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि को नियुक्त किया गया है। इस एसोसिएशन में निजी क्षेत्र की कई विद्युत वितरण कंपनियां सम्मिलित हैं और उप्र सहित अन्य प्रांतों में निजीकरण हेतु दस्तावेज तैयार कराने में उनकी अहम भूमिका है।
संघर्ष समिति ने बताया कि उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सदस्यता लेने के लिये 10 लाख रुपए और 01.80 लाख रुपए जी एस टी मिलाकर 11.80 लाख रुपए का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त इनीशियल कॉन्ट्रिब्यूशन के रूप में 10 लाख रुपए का अलग भुगतान किया है।इस प्रकार उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कुल 21.80 लाख रुपए का भुगतान विगत 03 जून 2025 को किया।
उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के निर्देश पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम,दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम,पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम,मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और केस्को ने इसी प्रकार ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को अलग-अलग 21 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान 03 जून 2025 को किया है।
इस प्रकार उप्र पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड और उप्र के विद्युत वितरण निगमों ने कुल मिलाकर एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को किया।
संघर्ष समिति ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन यह बताये कि एक करोड़ तीस लाख अस्सी हजार रुपए के भुगतान हेतु पॉवर कारपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग से पूर्व अनुमति ली है या नहीं।और यदि अनुमति नहीं ली है तो इस चंदे की धनराशि को खर्च में जोड़कर उपभोक्ताओं पर भार डालने का आधार क्या है ? संघर्ष समिति ने कहा कि घाटे के नाम पर एक निजी संस्था को करोड़ों रुपए का चंदा देना और उसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर डालना कितनी नैतिकता है?
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निजीकरण का विफल प्रयोग उत्तर प्रदेश की गरीब जनता पर न थोपा जाय: संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की अपील की
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि वे प्रभावी हस्तक्षेप करने की कृपा करें जिससे देश के अन्य हिस्सों में विफल हो चुके निजीकरण के प्रयोग को उत्तर प्रदेश की गरीब जनता पर न थोपा जाय। बिजली कर्मचारियों ने आज लगातार 270 वें दिन निजीकरण के विरोध में विरोध में अवकाश के बावजूद व्यापक जनसंपर्क जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अपील करते हुए कहा है कि उनके मार्गदर्शन में बिजली कर्मचारियों ने रिकॉर्ड विद्युत आपूर्ति की है और लाइन हानियां में कमी कर उसे राष्ट्रीय मानक के नीचे कर दिया है। महाकुंभ के दौरान बिजली कर्मियों ने अथक परिश्रम कर 65 दिनों तक चले महाकुंभ में पल मात्र के लिए भी विद्युत आपूर्ति में व्यवधान नहीं आने दिया। आंदोलन रत रहते हुए भी बिजली कर्मियों ने भीषण गर्मी के दौरान लगातार बेहतर विद्युत आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में निजीकरण का प्रयोग एक विफल प्रयोग है। प्रांत के स्तर पर सबसे पहले वर्ष 1999 में उड़ीसा में विद्युत वितरण का निजीकरण किया गया था। निजीकरण का यह प्रयोग उड़ीसा के सबसे अधिक औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र में एक वर्ष में ही विफल हो गया। अमेरिका की एईएस कंपनी एक वर्ष बाद ही काम छोड़कर भाग गई और उसने महा चक्रवात के दौरान टूटे बिजली के ढांचे का पुनर्निर्माण करने से इनकार कर दिया। रिलायंस पावर अन्य तीन विद्युत वितरण निगमों में काम करता रहा। फरवरी 2015 में उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने बेहद खराब परफॉर्मेंस के चलते रिलायंस पावर के भी तीनों लाइसेंस रद्द कर दिये। उड़ीसा में यह दूसरी विफलता थी।
कोरोना के दौरान जून 2020 में उड़ीसा के चारों विद्युत वितरण निगमों का लाइसेंस टाटा पावर को दे दिया गया। इसी माह 15 जुलाई को उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए बेहद खराब परफॉर्मेंस के कारण टाटा की चारों कंपनियों को नोटिस जारी किया है और उनके परफॉर्मेंस पर जनसुनवाई का आदेश जारी कर दिया है ।उड़ीसा में यह निजीकरण की तीसरी विफलता है। उड़ीसा में भारतीय जनता पार्टी टाटा पावर के विरोध में लगातार आंदोलन कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पड़ोसी प्रांत बिहार में गया, भागलपुर और समस्तीपुर में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के नाम पर निजीकरण का प्रयोग किया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके पूरी तरह असफल रहने के चलते इसे एक साल बाद ही रद्द कर दिया। महाराष्ट्र में औरंगाबाद, जलगांव, नागपुर और झारखंड में रांची और जमशेदपुर में निजीकरण के विफल प्रयोग निरस्त किए जा चुके है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा और आगरा में निजीकरण का प्रयोग असफल रहा है। ग्रेटर नोएडा में आए दिन किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही है। ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनी का लाइसेंस निरस्त कराने हेतु स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा लड़ रही है। आगरा में टोरेंट पावर कंपनी अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के करार का खुलेआम उल्लंघन कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजी कंपनी मुनाफे के लिए काम करती है और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले 42 जनपदों में बेहद गरीब जनता रहती है। अतः प्रदेश के और आम जनता के व्यापक हित में निजीकरण का विफल प्रयोग उत्तर प्रदेश में न लागू किया जाए और तत्काल इसे निरस्त किया जाए।
आंदोलन के 270 वें दिन आज प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने व्यापक जनसंपर्क कर निजीकरण से होने वाले नुकसान से आम लोगों को और कर्मचारियों को अवगत कराया ।
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