दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान पर्ल हार्बर पर जापानी हमला हुआ।
यह अचानक हमला था। आज तक जापानी मूल के अमेरिकीयों को अमेरिका मे खतरा नहीं माना गया था। मगर हालात बदल गए। अब वे शत्रु समाज थे।
•••
जल्दी ही राष्ट्रपति रुजवेल्ट के आदेश पर जापानी मूल के लोगो पर निगाह रखी जाने लगी। सामाजिक रूप से प्रभावी लोग, बिजनेस लीडर्स, पुरोहित पकड़े गए।
सवा लाख से अधिक जापानी लोग गिरफ्तार किये गए। उन्हें कंसनट्रेशन कैम्प मे रखा गया। संदिग्ध प्रतीत होने वाले जापानियों से पूछताछ औऱ मारपीट हुई। इसमें 2000 से अधिक लोग मारे गए।
•••
इंडियन डायस्पोरा लम्बे समय से दुनिया के तमाम देशो मे कदम जमाता रहा है। नासा औऱ सिलीकन वैली मे हाई प्रोफाइल जॉब्स से लेकर होटल, मोटल, परचून के व्यवसाय तक धीमे धीमे वे रोजगार औऱ अवसर तलाशते रहे।
गाँधी औऱ बुद्ध के देश के रहवासी होने के नाते उन्हें कभी खतरे की तरह नहीं देखा गया। पश्चिम के देशो ने भारतीयों को सेफ, औऱ सहयोगात्मक समझा। नतीजतन साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा लोग विदेशो मे सुख से रह रहे हैं।
•••
भारत की सामाजिक जकड़न औऱ लो क्वालिटी लाइफ को त्यागकर, विदेशो मे बसने की आदत हाल के वर्षो मे घटी नहीं, बढ़ी है।
सरकारी आंकड़े कहते हैं कि पिछले 12 सालों मे दस लाख से अधिक भारतीयों ने, अपनी नागरिकता त्याग कर विदेशी नागरिकताये ली है।
मगर ऐसे लोग जो बिना नागरिकता त्यागे, लॉन्ग टर्म वीजा, शिक्षा, औऱ अस्थाई प्लेसमेंट पर विदेशो मे रह रहे है, उनकी संख्या इससे कही ज्यादा होगी।
•••
पर अब इन सबमे ब्रेक लगा है। भारतीय पासपोर्ट की रैकिंग गिरी है। वीजा मिलना कठिन हुआ है। भारतीयो को संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा है।
या ज्यादा स्पष्ट कहें, तो हिन्दुओ को खतरे के रूप मे देखा जाने लगा है। दुनिया के इतिहास मे यह पहली बार हुआ है।
हिन्दुओ ने कभी आक्रामक धर्म प्रचार नहीं किया। विदेशी जमीनो को हड़पने की कोशिश न की। धमकी की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। किसी देश की आंतरिक राजनीति मे दखल नहीं दिया।
किसी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नीचा दिखाने की कोशिश नहीं की। पर ये अब सारे संयम तोड़े जा रहे है।
•••
हिन्दू सुप्रीमेसी का कांसेप्ट भारत की जनता के बीच खूब बिका है। विदेशो मे रह रहे भारतीय इससे अछूते नहीं रहे।
विगत एक दशक मे 200 से अधिक संगठन, विदेशो मे सक्रिय रूप से न सिर्फ इन्हे ऑर्गनाईज कर रहे हैँ, बल्कि उन्हें भाजपा आरएसएस के एजेंडे से जोड़ने मे सफलता पायी है।
अमेरिका मे मेडिसन स्कवेयर से लेकर मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम मे तक भारतीय ताकत की शो केसिंग की गयी। अबकी बार ट्रम्प सरकार के नारे लगे।
•••
तो ज़ब ऑस्ट्रेलियन पीएम ने उस समारोह मे मोदी को बॉस कहा, तो वे दरअसल अपने लिए इस समुदाय मे वोटो का जुगाड़ कर रहे थे।
सोचिये, तब उनके विपक्षी दल, क्या नोट कर रहे होंगे??
हिंदुत्व के नाम पर जुड़ा यह जमावड़ा, उस देश मे सूक्ष्म माइनॉरिटी है। मजमे कर रहा है, संगठित हो रहा है। मोदी सरकार उसे समेट कर उस देश के राइट विंग दलों के पाले मे डाल रहा हैं।
वह राईट विंग जिसे दुनिया- फासीवाद औऱ नाजीवाद के चश्मे से देखती है। जिसे लोकतंत्र विरोधी, मेजोरिटिज्म का संवाहक समझा जाता है। वह हिन्दू धर्म की पहचान से जोड़ा जा रहा है।
••••
इन सबसे अगर कोई कमी छूट गयी, तो आरएसएस के सरसंघचालक स्वयं दुनिया की राजधानी पहुंच गए। वे हिन्दुओ का वैश्विक पोप बनने की कोशिश मे हैं।
जरा सोचिये - सम्पूर्ण हिंदू समाज का प्रतिनिधि दिखने की कोशिश, वह शख्स कर रहा हैं - जिसे दुनिया मे "हिन्दू पैरामिलिट्री" "हिन्दू मिलिशिया" "गाँधी किलर " के रूप मे पहचाना जाता है। औऱ जिसकी "फासीज्म रुट " साफ साफ दिखाई देती हैं। वह हिन्दू पहचान को, भारतीयता पर लगभग थोप चुका है।
••••
जो वेंडालिज्म, हठेलापन, बड़बोलापन, गुंडा वृत्ति भारत की सीमाओ के भीतर इसलिए सफल है, कि यहाँ आप सत्ता मे है। वही तत्व विदेशी डायस्पोरा मे एक्सपोर्ट करना आपको उसी दिशा मे ले जाता है, जहाँ आप लोकल पॉपुलेशन के लिए शत्रु समाज के रूप मे देखे जाते हैं।
यह कितना बड़ा खतरा है, एक बड़ा तबका अनिवासी भारतीय तबका समझ रहा है। भागवत के कार्यक्रम के विरोध मे 50 से ज्यादा भारतीय संगठन खडे हुए।
लेकिन यह अपर्याप्त है।
•••
विदेशो मे बसे भारतीय, जो इनके कार्यक्रमों मे शिरकत करते है, इनके संगठनों से जुड़ते हैं, फंड देते हैं, नाच गाना करते है, रील बनाते है -
इंडियन डायस्पोरा के सबसे बड़े दुश्मन हैं। यह खतरा गहराता जा रहा है। भारत मे हिन्दू खतरे मे हो, या न हो, विदेशो मे बसा हिन्दू..
इस वक़्त सचमुच खतरे मे है।
पूरी बीजेपी और उसके इकोसिस्टम को आपत्ति है कि मुसलमानों के एतराज़ के कारण बंदे मातरम के केवल दो शुरुआती पद गाने का फ़ैसला हुआ।
मेरा सवाल है कि क्या मुसलमान इस देश के नागरिक नहीं? अगर उन्हें किसी चीज़ से आपत्ति हो तो क्या उसे अनसुना कर देना चाहिए? क्या उन्हें अनसुना करके, अपमानित करके ही देशभक्ति सिद्ध होती है?
हमारे पुरखे ऐसा नहीं मानते थे। वे हिन्दू-मुसलमान सबका ख्याल करते थे। इसलिए सबको भरोसे में लेकर फ़ैसला हुआ।
यही लोकतंत्र है, यही देशभक्ति है।
देश के भीतर किसी समुदाय की राय को दरकिनार करना, उसे अपमानित करना देश को कमज़ोर बनाना है, बांटना है।
Hear this girl. She is the voice of the average student in this country. And then look at the ruling party and its media ecosystem debating ‘Vande Mataram’ while a generation cries out to be heard. No words
जब राम मंदिर के दानपेटी से चोरी हुई लगा था इससे निकृष्ट क्या ही होगा!
बिहार में तो डस्टबिन में घोटाला हो रहा है!
मंगल पांडे कितना अमंगल किए बिहार का?
15 हज़ार का कचरापेटी देखा है किसी ने ?
Bankim Chandra Chatterjee served the British colonial government from 1858 to 1891, spending around 33 years as a Deputy Magistrate and Deputy Collector.
He was awarded the title Rai Bahadur in 1891 and made a Companion of the Order of the Indian Empire (CIE) in 1894.
500 रुपए का Dustbin 15490 रुपए में खरीदने वाले मंगल पांडे & गैंग की गिरफ़्तारी कब होगी?
बिहार में हुए 617 करोड़ के
Dustbin घोटाला का जवाब कौन देगा?
अमित शाह की पुलिस बिना नेम टैग और वर्दी के छात्रों पर लाठियां चलाई थी। वही हमारी झारखंड पुलिस को देखिये सबने नेम टैग लगा रखे है।
किन्हीं ने गर्मी के वजह से नेम टैग नहीं हटाया है 😊
भ्रष्टाचार, महँगाई, नफ़रत: ये सब बच्चे तो थे, लेकिन लोकतंत्र नहीं आया था। उसको स्कूल से क्यों निकाल दिया? क्योंकि वह सवाल करता था? देखिए शेखर सुमन की बेहतरीन पेशकश
@zoo_bear BJP treats bypolls like opinion polls.....just to check the public mood.
Sometimes the mood disappoints them.
Then comes the 'real election🤫.... where suddenly the entire ecosystem wakes up.... aur tab inke ladoo kaam aate hain..always.
What a remarkable coincidence.
देश के प्रधानमंत्री 24 घंटा Victim Card खेलते रहते हैं.. मुझे गाली दी, मां को गाली दी.. चुनावों में विपक्ष पर यह आरोप लगाते थे, अब बच्चों पर लगा रहे हैं..
रही बात लड़कियां कैसे भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं,
आपलोग बिल्किस बानो के बलात्कारियों को छोड़ देते हो, फूल माला पहनाते हो,
बलातकारी बाबाओं को पैरोल मिलता है,
आपके नेताओं पर Me Too के मामले लगते हैं,
आप किसी को जर्सी गाय, किसी को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड कहते हो..
और आपको युवाओं के भाषा से परेशानी है..
चिंता करना है तो देश में जो नफरत आपने फैलाई है, उसकी चिंता कीजिए.. विक्टिम बनना बंद कीजिए मोदीजी!
Gen Z की भाषा में आप Chill कीजिए...
"My friends think I look like a young Hrithik Roshan."
That was @SauravDassss' response to @BDUTT
after Kangana Ranaut called him "useless", "unemployed" and dismissed Gen Z protesters as the "generation gutter."
The Cockroach Janata Party spokesperson chose humour over outrage, saying he has no personal ill will against Kangana and would rather have a conversation than trade insults. His message to her: "Yo Kangana, just take a chill pill. Let's talk this out."
Watch full interview here: https://t.co/b3ZbIqRSaH
#cockroachjantaparty
@Cockroachisback
Uncles who cheered rapists, mob-lyncings, encounters, ethinc cleansing, bulldozers and dehumanizing of minorities are sad about abusive language in protests 💔
जेन जी गाली दे रही है!!
संसद से शयनकक्ष तक बड़ी चिंता है। जेन जी, गालीबाज है। घटिया मीम बनाती है, गंदे इशारे करती है।
अशिष्ट मीम बनाती है।
●●
चिंतित है सब। इस उम्र में अपने बच्चो को यह सब करते देखना शॉकिंग है। उस उम्र में हम भी उच्ऋंखल थे, शैतान थे,नो डाउट, लेकिन मर्यादा में रहते थे।
हमारे मां बाप तो अमीर नही थे। सरकारी हस्पताल में जन्मे, और सरकारी स्कूल में पढ़े। बीमार पड़े तो सरकारी दवा खाई। सरकारी एग्जाम पास किये, सरकारी कॉलेज गए, नौकरी की, छोटा धंधा किया, बढाया- दो पैसे कमाये।
और अपने बच्चो को हर वह चीज दी, जो हमे न मिली थी। तो कमी कहाँ रह गयी?
●●
जेन जी, प्राइवेट नर्सिंग होम में पैदा हुई, प्राइवेट स्कूलों में पढ़ी, प्राइवेट गाड़ी में चलती है। प्राइवेट वैक्सीन लगवाती है, प्राइवेट कॉलेज में पढ़ती है, प्राइवेट नौकरी करती है।
इस पीढ़ी ने, सरकार से कुछ लिया नही।
सरकार उससे जरूर ले रही है। टैक्स, चन्दा, रिश्वत, कमीशन, टोल, वोट, तालियां, थाली, लाइक्स।
देने वाला, मांगने वाले की..
या कहें छीनकर लेने वाले की इज्जत करे??
दुनिया मे ऐसा नही होता। तो जेन जी से यह आशा क्यो?
●●
और समझिये, कि इस पीढ़ी के लिए आपने कुछ छोड़ा नही है। इसके मां बाप, चचा, फूफा, मामा, ताऊ- इसके हिस्से की नियामतें खा चुके। बरबाद कर दिया है।
इसके हिस्से की हवा।
इनके हिस्से का पानी,
इसकी नदिया, इसके खनिज, इनके हिस्से की शांति, इनके हिस्से की मुस्कान
●●
इस पीढ़ी के सामने एक खौफनाक शून्य है।
जॉब्स, बिजनेस, शिक्षा, सुविधा, सम्मान- सब मुट्ठी भर लोगों के लिए सुरक्षित है। 90% लाकर कॉलेज नही मिलता, डिग्री लेकर जॉब नही मिलता।
जो सैलरी है, उतने में घर नही मिलता। सरनेम खास न हो तो किराए पर मकान नही मिलता।
हस्पताल में ड्यूटी पर डॉक्टर नही मिलता। पैसे देकर न्याय नही मिलता। टोल देकर सड़क नही मिलती। घर की औरतों के साथ निकले, तो इज्जत का अमान नही मिलता।
और इस पर मुंह से कुछ निकल जाये,
कचहरी से जमानत नही मिलती।
●●
इस पीढ़ी से सब कुछ छीन लिया गया है, जो पिछली पीढ़ियों को आसानी से, या थोड़े एफर्ट से मिल जाता था। बदले में 5 किलो राशन, 1500 नगद और ढेर सारा गर्व छोड़ा है।
मन्दिर, मुसलमान, गौमूत्र और पाकिस्तान छोड़ा है। जयजयकार की मजबूरी छोड़ी है।
नथिंग एल्ज!!
दिया कुछ नही, पर इनकी मासूमियत, जिंदगी की आसानियत, रहने का स्वस्थ महौल, भविष्य की सुरक्षा और वर्तमान का सुकून छीन लिया है।
तो देने के लिए इन हतभागियों देने को बचा क्या है?? गालियां..?
तो वही देंगे न!!
●●
आप कह रहे है कि जेन जी, गालीबाज है। घटिया मीम बनाती है, गंदे इशारे करती है। अशिष्ट मीम बनाती है। साहब ये तो अभी अल्हड़ उम्र की बड़ी मासूम अभिव्यक्ति है।
इसे जरा और पकने दीजिये।
इसे उबालिये, पकाइए। मुकदमे लगाइए, अकेला पाकर पीटीये, माफी मंगवा कर वीडियो बनाइये। भीतर जमा हो रहे बारुद का जखीरा बढ़ाइये। शौक से..
●●
और खूब बढ़ाइये।
क्योकि आप गालियों का अंत चाहते है।
और हम आपका अंत चाहते हैं।
सूत्रों के हवाले से ख़बर आ रही है कि एक बड़े न्यूज चैनल ने आज करीब 120 लोगों को नौकरी से निकाल दिया
जिसमें ऐसे कई एंकर भी हैं जो पिछले 10,12 सालों से चैनल से जुड़े थे, कई कैमरामैन, एडिटर, ग्राउंड रिपोर्टर।
लोगों का न्यूज से भरोसा उठ गया है, TRP नहीं आ रही है ऐड से रेवेन्यू नहीं बन पा रहा है।
मीडिया अपनी विश्वसनीयता खोता जाएगा तो उसकी कमाई गिरती जाएगी।
गोदी मीडिया से निपटने का एक ही आसान तरीका है घर के टीवी पर भूलकर भी न्यूज चैनल मत लगाइये इससे इनकी TRP गिरेगी और इन्हें ऐड मिलना बंद हो जाएगा।
हो सके तो टाटा स्काई, DTH पर कॉल करके वाकायदा नाम ले लेकर गोदी चैनलों को ब्लॉक करा दें इससे भी बड़ा फायदा होगा।
इस मुहीम को आगे बढ़ाए,
गोदी मीडिया आपकी परेशानी टीवी पर नहीं दिखाती तो आप ऐसा करके उन्हें परेशानी में डाल दो।
जय हिंद
द पास्ट, कैन नेवर फाइट द फ्यूचर!!
इस दृश्य के तुरंत बाद, शिक्षामंत्री ने इस्तीफा दे दिया। जिस व्यक्ति को, चार साल पहले ही अक्षमता और अकर्मण्यता के लिए हटा देना चाहिए था, उसे हटाने के लिए भारत के युवा को अनशन, प्रदर्शन और खुलेआम गाली गुफ्तार पर उतरना पड़ा।
●●
और अब भी यह इस्तीफा, सरकार के आत्मनिरीक्षण, मंत्रिपरिषद के कार्यो की मॉनिटरिंग, इवेल्यूएशन और इंडिकेटर्स के आधार पर नही, मजबूरी में हुआ है।
यह नोट करने की बात है।
एंटायर कैबिनेट जडमूर्ख, बकलोल, घमंडी, नालायको और बेईमानो से भरी है। आप कोई भी विभाग उठाकर देख लें। और इनकी मजबूत उपस्थिति का कारण सिर्फ एक है- वफादारी।
●●
नेता के प्रति, पार्टी के प्रति,
आरएसएस के प्रति।
इस सरकार के मंत्रियों को जनता नही, इसके मालिकानों से डर है। और मालिकान को परफॉर्मेंस, एफिशिएंसी, रिजल्ट नही चाहिए।
तो जिस गवर्मेंट के निर्माण मे ही मेरिटोक्रेसी बुनियाद नही, उससे परफॉर्मेंस की आशा बेकार है।
●●
और यह आंदोलन, इस निराशा से उपजी कुंठा का विस्फोट है। यह सूचक भी है, कि जिस तरह का समाज बनाने की कोशिश आरएसएस और उसके हजारों बेनाम संगठन कर रहे थे- वह प्रोजेक्ट स्पेक्टिकुलरली फेल रहा है।
उल्टे, इसने समाज को, इन युवाओ के पीछे लामबंद कर दिया है। जो देश में अंतहीन निरर्थक धार्मिक-जातीय विभाजन और अस्मिता की राजनीति को साफ साफ नकारता है।
और वह युवा, इस मंच पर राहुल गांधी के साथ खड़ा हो गया है।
●●
यह तस्वीर दर्शनीय है।
एग्जेक्टली वैसी है, जैसी होनी चाहिए।
सेंटर में वे है, जो क्षुब्ध है, पीड़ित हैं, आक्रोशित हैं। राहुल किनारे हैं, हाथ बांधे, उनकी आवाज को सुनते हुए।
बिल्कुल ऐसी ही लीडरशिप चाहिए।
हमे नेता ऐसा चाहिए- जो सुने।
अटेंशन दे, इस देश के बच्चों को प्यार से निहारे।
इस पूरे आंदोलन को, एक बार भी हाईजैक करने की कोशिश राहुल ने नही की। वे जंतर मंतर नही गए, वीडियो शूट न करवाये, बड़बोल बयान न दिए।
मगर अपने राजनीतिक वजूद को चुपचाप, छात्रों के पीछे खड़ा कर दिया।
●●
देश का अगला दशक, उसके छात्र बनाते है।
जो शिक्षक डॉक्टर, इंजीनियर, इनोवेटर, बिजनेसमैन, सोशल साइंटिस्ट और तमाम पेशों में जाकर हिंदुस्तान को अगले स्तर पर ले जाने वाले हैं।
नेता का काम तो महज उनकी सुनना, समझना, और उसकी सफलता के लिए- जरूरी सिस्टम रास्ते साफ करना है।आने वाले कुछ दशक, (अगर राहुल की यही तासीर बनी रहे,तो) आधुनिक भारत का स्वर्णयुग हो सकते है।
●●
और 1990 के मंदिर मस्जिद, मुसलमान, कश्मीर, हलाला, तलाक, पाकिस्तान, नफरत और ध्वंस की राजनीति, 2026 में कर रही भाजपा, आरएसएस और उनके तमाम गुंडे संगठन - आज के बाद- भारत का पास्ट हैं।
इस तस्वीर में दिख रहे लोग, ठीक इसी क्रम में जैसे कि वे खड़े है-भारत का फ्यूचर हैं। इनका वक्त आ गया है। इन्हें जीतना ही है।
हीन प्रतिगामी शक्तियों को मैदान छोड़ना ही होगा।बिकॉज द पास्ट,
कैन नेवर फाइट द फ्यूचर!!
❤️
उठा शमशीर
दिखा अपना हुनर
क्या लेगा!
ये रही जान
ये गर्दन
ये सर
क्या लेगा?
सिर्फ़ एक शेर
उड़ा देगा
तेरे परखचे तेरे
तू समझता है कि
ये शायर है
कर क्या लेगा