तुम्हारा साढ़े चार पहर मेरे साथ इतने रंगों इतने ढंगों में यूँ रहना
जीवन की एकरसता में इतने रस घोल गया है कि हृदय सन्तूर, मन मृदंग हो गया है
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तुम्हारे गालों और ठोढ़ी के बीच ये जो तीन तिल हैं ना
काव्यशास्त्र में वर्णित कवियों के तीन गुण हैं
तुम्हारी आँखों में देखते हुए भूल सकता हूँ सबसे भयानक तानाशाह की सबसे डरावनी हँसी
बस अड्डे के इन्तज़िारी कमरे में
मुझे अपनी गोद में लिटा धीमे-धीमे कान में तुम्हारा एक सौ सोलह चाँद की रातें...सुनाना एक बार गुलज़ार को भी रश्क करने पर मज़बूर कर सकता है
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हर इक से कहते हैं क्या 'दाग़' बेवफ़ा निकला
ये पूछे उन से कोई वो ग़ुलाम किस का था
#DaghDehlvi@Hindi_Kavitaa ke #UrduStudio द्वारा @adithikalkunte के साथ बड़ी ख़ूबसूरती से इस वीडियो को पेश किया गया था, ज़रूर देखें
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तुम्हारे ख़त में ��या इक सलाम किस का था
न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किस का था
वो क़त्ल कर के मुझे हर किसी से पूछते हैं
ये काम किस ने किया है ये काम किस का था
वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
रहा न दिल में वो बेदर्द और दर्द रहा
मुक़ीम कौन हु�� है मक़ाम किस का था
न पूछ-गछ थी किसी की वहाँ न आव-भगत
तुम्हारी बज़्म में कल एहतिमाम किस का था
तमाम बज़्म जिसे सुन के रह गई मुश्ताक़
कहो वो तज़्किरा-ए-ना-तमाम किस का था
हम कहाँ हैं ये पता लो तुम भी
बात आधी तो सँभालो तुम भी
दिल लगाया ही नहीं था तुम ने
दिल-लगी की थी मज़ा लो तुम भी
हम को आँखों में न आँजो लेकिन
ख़ुद को ख़ुद पर तो सजा लो तुम भी
जिस्म की नींद में सोने वालों
रूह में ख़्वाब तो पालो तुम भी
@DrKumarVishwas
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#Hindi