युवा मोदी के खिलाफ है।
किसान मोदी के खिलाफ है।
दलित मोदी के खिलाफ है।
आदिवासी मोदी के खिलाफ है।
ओबीसी मोदी के खिलाफ है।
अल्पसंख्यक मोदी के खिलाफ है।
फिर मोदी को वोट दे कौन रहा है?
क्या आप @DelhiPolice बता सकते हैं के सफेद शर्ट में लाठियां चलाने वाला दिल्ली पुलिस से जुड़ा हुआ है? या बीजेपी ने अब पुलिस में भी lateral entry शुरू कर दी?
Truck loaded with stones have been parked at Jantar Mantar.
What are the police authorities upto? Are they orchestrating stone-pelting on the peaceful CJP protesters?
मोदी ही नहीं चाहिए ये clear हो गया है.. मोदीजी आप क्यों ज़बरदस्ती लोगों के मम्मी पापा मसीहा बने हो, लोग नहीं चाहते है आपको.. इतना मौज काट लिया है झूठ फरेब करके, अब देश को बख्स दो न प्लीज
ये लोग कौन हैं ? इनकी क्या पहचान है? पुलिस की किस शाखा के हैं जो लाठी लेकर बैठे हैं। पुलिस कवर करने वाले पत्रकारों को पता होगा बस उनके संपादक छापने की हिम्मत कर पाएँ । उम्मीद है दिल्ली पुलिस जवाब देगी।
ये वीडियो मैंने शाम 4 बजे के आसपास शूट किया है। हाथ में अंबेडकर की तस्वीर लिये ये लड़का पुलिस की पिटाई से पूरी तरह बेजान हो चुका था। पुलिस रिकॉर्ड करने पर धमका रही थी। सोने से पहले दुआ कर रही हूँ इसकी जान बच जाए। इसकी हालत बेहद ख़राब लग रही थी।
“जल्दी निकल जाओ, वरना कपड़े फाड़कर तुम्हें नंगा भगाएंगे”
एक रोती हुई लड़की ने बताया कैसे कई पुलिसवाले सिविल ड्रेस में थे और मां-बहन की भद्दी गालियां देकर मार रहे थे
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ वालों की असलियत
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
स्कूलों में टीचर से कहा जाता है कि आप बच्चों पर छड़ी नहीं चला सकते। उन्हीं बच्चों पर पुलिस लाठी चला रही थी। शहर देख रहा था। बच्चों के माँ बाप और उनके व्हाट्स एप अंकिल चुपचाप देख रहे थे। पेपर लीक करने वाले आज पार्टी मना रहे होंगे। मनाओ तुम लोग। अभी धर्म का मुद्दा खोजा जा रहा होगा ताकी गोदी ऐंकर धर्म रक्षक बन कर चिल्लाने आ जाएँ। जनता को पता है गोदी मालिक, गोदी ऐंकर, गोदी संपादक अपने पेशे के धर्म की रक्षा कभी कर ही नहीं सकते।अख़बारों की हेडलाइन कैसे मैनेज होगी? लिख कर दे दिया गया है या ख़ुद से लिख लेंगे?
दिल्ली जाम मतलब दिल्ली जाम।
हर कोने में 10-20 हजार छात्र।
जंतर मंतर नहीं है, CP का सेंट्रल पार्क है।
सिर्फ दलित नहीं है, सिर्फ पिछड़े नहीं है, सिर्फ सवर्ण नहीं हैं, सिर्फ मुसलमान नहीं हैं, सिर्फ किसान नहीं हैं, सिर्फ बेरोजगार नौजवान नहीं हैं। सब है सब।