केंद्रीय शिक्षणमंत्री धर्मेंद्र प्रधान यांचा राजीनामा म्हणजे खरंतर लोकशाहीचा प्रचंड मोठा विजय आहे. मात्र पंतप्रधान नरेंद्र मोदींनी तो स्वीकारला की नाही? ते अजून कळलेलं नाही. शिवाय त्या संदर्भात पर्यायी व्यवस्था आणि जबाबदारी अजून कुणाकडे दिली, हे देखील कळायचं बाकी आहे. पण विद्यार्थी ताकद, युवाशक्तीचा आणि विरोधी पक्षांच्या एकजुटीचा आज मोठा विजय झाला आहे. मला वाटतं याचं एका वाक्यात वर्णन करायच झालं तर 'बिगिनिंग इज द एंड' असं होईल. - पृथ्वीराज चव्हाण, माजी मुख्यमंत्री
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(Prithviraj Chavan, Dharmendra Pradhan, Protest, Delhi, Narendra Modi)
The discussion that we had with Rahul Gandhi Sir today on the education system is the most fruitful.
देश में शिक्षा व्यवस्था को takeover पर चर्चा न करके युवाओं की आकांक्षाओं को ख़त्म किया जा रहा है, लेकिन आज जो बातचीत हुई, वह शानदार रही
छात्रों की जो तीन मांग राहुल गांधी जी ने रखी हैं, वो जायज हैं और उनसे कोई समझौता नहीं हो सकता
@neha_aisa जी
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा भेज दिया है
लेकिन अभी दो मांगे बाकी है
20 तारीख के लाठी चार्ज का जिम्मेदार
अमित शाह का इस्तीफा
दूसरा प्रधानमंत्री स्वयं माफी मांगे छात्रों से
"बदलना होगा चौथे स्तंभ को अपना किरदार,अब जनहित के मुद्दों पर ही होगी बात आर-पार।अगर वक्त रहते खुद को न सुधारा तुमने,तो तय है कि अगली बार गिरेगी तुम पर ही गाज!"
#DharmendraPradhan
“UPSC की तैयारी कर रही थी ,अब पुलिस वालों को देख कर मन नहीं कर रहा!
क्लियर हो गया तो कैसे इन लोगों के बीच रहूँगी? घुटन हो रही है ।”
~ छात्रा
मुझे समझ नहीं आ रहा क्या कहूँ!
क्या लिखूँ!
पोलिसांनी विद्यार्थ्यांच्या पायावर न मारता छाताडावर मारलं. अनेकांना करंट देण्यात आला, मुलींची कपडे फाडण्यात आली, हा नवा भारत आहे का? हा आघात भारतमातेवर केला आहे. - डिंपल यादव, खासदार
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(Dimple Yadav, CJP, Delhi, Abhijeet Dipke, Sonam Wangchuk, NEET)
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।