न कोई फूल, न कोई खुशबू, ना कोई रौनक,
उस पर कांटों की ज़हालत नहीं देखी जाती..!
हमने खोली थी इसी बाग में अपनी आंखें
हमसे इस बात की हालत नहीं देखी जाती ।।
जब इंसाफ़ की आवाज़ उठाने के लिए किसी को हिरासत में ले लिया जाए, वही समय कलयुग है।
समाजवादी पार्टी की मा. सांसद का गुनाह क्या केवल इतना है कि वो उस माँ की मदद कर रही थीं, जिसने अपना बेटा खोया है, और जो संवेदनहीन-निर्मम भाजपा राज में न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर है।
भाजपा के समर्थक भी इस बात से शर्मिंदा होंगे और इस जुल्म और ज़्यादती की निंदा करेंगे।
पीडीए अब सहेगा नहीं, कहेगा!
हमें किसी के “वंदे मातरम्” पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। और “वंदे मातरम्” का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है, इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर “दुर्गा माता” से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही “माँ, मैं तेरी पूजा करता हूँ” यही वंदे मातरम् का अर्थ है। यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।
वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। मुसलमानों की देशभक्ति के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियाँ इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्ज हैं।
हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं!
#ArshadMadani
#कश्मीर#श्रीनगर देश के महत्वपूर्ण बुजुर्ग नेता नेशनल कांफ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री जम्मू कश्मीर माननीय डाक्टर #फारूक_अब्दुल्ला_साहब से उनके कोठी पर मुलाकात की
पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी घटना के प्रति मैने अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
@yadavakhilesh
ये सत्य है कि आतंकियों ने धर्म पूछ कर मारा।
मगर ये भी सत्य है कि फौज नहीं थी वहां और बचाने वालों ने धर्म देखकर नहीं बचाया, कोई कंधे पर लेकर भागा तो कोई घोड़े से।।
ये सत्य है कि आतंकियों ने कलमा पढ़वाया।
मगर ये भी सत्य है कि आदिल हुसैन ने लोगों को बचाने के लिए आतंकियों की बंदूक छीनने की कोशिश की और उसे 3 गोली मारी गई।।
ये सत्य है कि कपड़े उतरवा लोगों को अलग कर मारा गया।
मगर ये भी सत्य है की अनंतनाग के GMC अस्पताल में डॉ रुकसाना की टीम 3 दिन से अस्पताल छोड़कर घर नहीं गईं, सभी घायलों को जान लगाकर ज़िंदा बचाया।।
मारने वालों ने नफरत चुनी,बचाने वालों ने इंसानियत।
पाकिस्तान चाहता है कि हिंदुस्तान में नफरत बढ़े और देश का नुक़सान हो। आपको चुनना है कि उसे कामयाब करना है या नाकाम। जय हिंद,जय हिंद की सेना।
मुंबई में जैन मंदिर ध्वस्त कर दिया वो भी कोर्ट की सुनवाई से पहले!
क्या BMC अब अदालत से ऊपर हो गई है?
जहाँ बिल्डरों की अवैध मीनारें फल-फूल रही हैं, वहाँ आस्था के एक शांत मंदिर पर बुलडोज़र चला दिया गया।
BMC की 'हिम्मत' सिर्फ कमजोरों पर चलती है ना बिल्डर डरते हैं, ना घोटालेबाज़।
तो फिर सवाल उठता है: ये आदेश किसके इशारे पर चला? और इंसाफ को रौंदने की ये ज़िम्मेदारी कौन लेगा?
250 साल पहले मुगल सुल्तान ने फरमान जारी किया था। इसमें लिखा है कि गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं से कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा। किसी को धमकी नहीं दी गई कि उनका पासपोर्ट या लाइसेंस जब्त होगा या उन्हें जेल भेजा जाएगा। संघी मुगलों को जितनी गालियां देना चाहें दे सकते हैं, लेकिन इतिहास कुछ और कहता है।
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