BJP सरकार और दिल्ली पुलिस की गुंडई 👇
4PM की पत्रकार शाहीन ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछा तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और मारपीट की।
शाहीन का कहना है- जब पुलिसवालों को पता चला कि वो मुसलमान हैं तो उन्हें और बेरहमी से मारा गया। उनके शरीर पर जख्म हैं.. कैमरापर्सन भी बेसुध पड़ी है।
एक पत्रकार के साथ ऐसा बर्ताव कतई सही नहीं है, दोषी पुलिसवालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, इसकी उम्मीद कम है, क्योंकि- BJP सरकार में सवाल पूछना गुनाह हो चला है।
मुल्लानी हमारी तरफ देखकर मुस्कुराते हैं।
हम एक होकर एक पार्टी बनाएंगे, एक मुल्ला-मुक्त भारत।
हमने निश्शु के पिता का सिर फोड़ दिया, जिससे सात टांके आए। धारा 307 लागू होती है।
वह जान से मारने की स्थिति में थे, लेकिन हम जेल नहीं गए क्योंकि हमें कपिल मिश्रा और चिराग पासवान के फोन आए थे।
हिंदू राष्ट्रवादी स्वतंत्र भारद्वाज ने मुस्लिम महिलाओं का अपमान करने वाली टिप्पणियाँ करते हुए बड़े-बड़े दावे किए।
@RubikaLiyaquat आपके पास मुद्दों की कोई कमी नहीं थी। प्रधानमंत्री मोदी जी को घेरने के लिए बहुत कुछ था। उनके काम पर सवाल करते, उनकी नीतियों पर सवाल करते, उनके फैसलों पर सवाल करते।
Ye bhi janti h sab 🤪🤪🤪🤪
Schools are being shut down for these people who are rubbing bhang & creating chaos on roads. Only 3-4% are true devotees. The rest just use religion as an excuse for hooliganism and substance abuse. Stop calling it faith.
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले 80% नौजवान गरीब व माध्यम परिवारों से ही होते हैं। मासिक आय बहुत अधिक नहीं होती। लगातार फीस बढ़ाना वास्तव में चिंता की बात है। इसे हमने भी फेस किया है।
राहुल गांधी ने प्रयागराज में युवाओं के साथ संवाद करके इलाहाबाद यूनिवर्सिटी प्रशासन के तमाम फैसलों पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया। संभव है कि अब उसपर अमल भी हो।
सपा विधायक:- (नारा लगाते हुए) चंदा चोर गद्दी छोड़
सतीश महाना:- आप लोगो मे किसी ने चंदा दिया हो तो रसीद लेकर आ जाओ😳
जरा देखे तो सही आपका कौन सा पैसा चोरी हुआ है
सपा विधायक:- बजरंगबली को नचाने वाले कहां मिलेंगे, BJP के दफ्तर में
सतीश महाना:- अनिल प्रधान तुम तो पैदा भी नही हुए थे जब मंदिर बना था 😳
सपा विधायक:- NEET का पेपर कहां मिलेगा, BJP के दफ्तर में
सतीश महाना:- मै बताता हूं कहां मिलेगा
जिस समय छद्मभेष को निकाल दिया जाएगा तो जो देश की संसद के बाहर मिला वो वहीं मिलेगा !!
सतीश महाना यूपी विधानसभा के अध्यक्ष/स्पीकर है जो स्पीकर होने के बावजूद आज सदन मे भाजपा की तरफ से पूरी तरह सा मोर्चा सम्भालते दिखे !!
अगर उत्तर प्रदेश विधानसभा में अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे सतीश महाना यह कहें कि "जिन्होंने राम मंदिर का विरोध किया, अगर उन्होंने चंदा दिया है तो रसीद दिखाएँ, तब देखेंगे कि उनका पैसा चोरी हुआ या नहीं," तो सवाल सिर्फ़ एक बयान का नहीं, बल्कि विधानसभा की गरिमा का है।
क्या अब कोई चुनी हुई विधानसभा का सदस्य अपनी आस्था के आधार पर चोरी को चोरी भी नहीं कह सकता? क्या अब हत्या को हत्या, डकैती को डकैती कहने से पहले लोगों को अपने मज़हब का हलफ़नामा देना होगा?
फिर यही उसूल वक़्फ़ बोर्डों पर क्यों लागू नहीं होता, जहाँ ग़ैर-मुस्लिमों को ज़बरन शामिल किया जाता है? हिन्दू एंडोमेंट बोर्डों को मिलने वाली संवैधानिक सुरक्षा औक़ाफ़ को क्यों नहीं? और जिस पार्टी का लोकसभा में एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है, उसे तीन तलाक़ जैसे असंवैधानिक क़ानून (जो सिर्फ़ मुसलमानों से जुड़ा है) बनाने का अधिकार कैसे मिल जाता है?
अगर उसूल एक है, तो सब पर बराबर लागू होना चाहिए।