वोट गौमाता के नाम से लेकर सता में आए और अब उसी गौमाता की जमीन ओरण गोचर को कंपनियों को कौड़ियों के दाम में देकर गोवंश को खत्म करने पर तुले हो ....
सरकार जिंदा ओरणों को कांट-छांट कर दर्ज कर रही। दर्ज ओरणों को ही बार-बार प्रचारित कर लोगों को भ्रमित कर रही है।#झूठे_लोग_झूठी_सरकार
ओरण केवल भूमि नहीं, यह हमारी आस्था, परंपरा और प्रकृति का जीवंत स्वरूप है।
इन पावन धरोहरों का संरक्षण और संवर्धन हमारा कर्तव्य है, ताकि वन्यजीवों और गोवंश को सुरक्षित, स्वाभाविक चरागाह मिल सके।
ओरण सुरक्षित रहेंगे, तो संस्कृति संरक्षित रहेगी…
#ओरण_बचाओ_गाय_बचाओ
तभी आप लोग आरोप आरोप खेलकर जनता को बरगला रहे हो, हमे संजीवनी की मीटिंग में आपका नाम , इथियोपिया का बताकर मोटिवेट किया जाता था , तभी चंगुल में फंस गए अब सिर्फ पछतावा कर रहे है, खैर भगवान के घर देर है अंधेर नहीं वो जरूर न्याय करेगा
खैर पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल में तों संजीवनी घोटाले का पर्दाफाश नहीं हो सका लेकिन अब तो आपकी डबल इंजन की सरकार है और आप केन्द्र में मंत्री हो तों फिर देर क्यों लगा रहें हों, जनता का उनके पसीने का पैसा वापस दिलाओ। हमें लगता हैं आप दोनों मिले हुए हो ,
“मुझे बदनाम करने से
तुम्हारा काम बनता है
तो चलो एक अहसान और सही”…अशोक गहलोत जी अपने पुत्र का राजनीतिक करियर बनाने के लिए संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी प्रकरण में मेरा नाम घसीटकर मुझे कलंकित करने के प्रयास में बुरी तरह असफल रहे हैं। माननीय उच्च न्यायालय ने भी मुझे दोषमुक्त माना है। गहलोत जी स्वयं भली-भांति जानते थे कि मैं निर्दोष हूँ। मेरा एकमात्र ‘दोष’ यह है कि मेरे परिश्रम और जोधपुरवासियों के मुझसे अपार स्नेह से न केवल उनके पुत्र, बल्कि स्वयं उनकी राजनीति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
मैं @ashokgehlot51 जी से आग्रह करता हूँ कि वे संजीवनी प्रकरण के पीड़ितों की वेदना का उपयोग अपने राजनीतिक स्वार्थ और पुत्र की देवतुल्य जनता द्वारा रचित पराजय की खीझ निकालने के लिए न करें। इसके बजाय यदि वे सरकार का मुखिया रहते हुए मुझे फँसाने के बजाए ईमानदारी से पीड़ितों को राहत पहुँचाने का प्रयास करते, तो पीड़ितों का कुछ भला अवश्य हो सकता था।
भाजपा की प्रचंड विजय के चलते अपने ही दल में अप्रासंगिक हो जाने के कारण यदि मेरे नाम की माला जलाने से आपका अपनी पार्टी में कुछ भला हो जाए, तो इसे भी मैं अपना उन पर एक और अहसान ही मानूँगा।l
देश के सबसे चर्चित और युवा विधायक रविंद्र सिंह भाटी सिर्फ़ रील और अपनी बेबाक़ी से नहीं बल्कि काम से पहचाने जाते हैं आज पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर ज़िले के लिए सबसे सुखद ख़बर है तो यह है कि DNP क्षेत्र में केंद्र सरकार ने शिथिलता दी है इस क्षेत्र के शिव विधानसभा क्षेत्र में DNP से जुड़ी समस्याओं से स्थानीय बाशिंदों को जो परेशानी थी उसका निवारण रविंद्र सिंह भाटी की लगातार मेहनत और सही तरीक़े से पेश करने के कारण मिला है वाक़ई में सैल्यूट है इस प्रकार के विधायक की कार्यप्रणाली को जो पिछले लंबे अरसे से नहीं हो पाया वो 1 साल के भीतर कर दिखाया
@RavindraBhati__
आह! हाथ में कलम और कागज़ के साथ इतनी सुंदर धारा प्रवाह भाषा में अपनी बात कहना वाकई कमाल है। जयपुर ग्रामीण लोक सभा से सांसद @RaoRajendraBJP ने सदन में परिष्कृत हिंदी के परिभाषिक शब्दों का प्रयोग करते हुए संतुलित वाक्य विन्यास के साथ बेहद सुंदर व प्रभावी तरीक़े से अपनी बात रखी है।
वित्त प्रबंधन, अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति का कल्याण, वर्षा जल संचयन, कृषकों के प्रति संवेदनशीलता, पेयजल, सिंचाई, कर व्यवस्था, अंतरिक्ष विज्ञान का वाणिज्यिक महत्व, नवीनीकरण ऊर्जा आदि क्षेत्रों पर यह भाषण सुनने योग्य है।
जातिवाद का ज्ञान देने वाले ने भी निर्दलीय चुनाव का नामांकन भी भरा लेकिन सिर पे स्वजातीय मोदीजी का हाथ था तो राज्यसभा में बिठा दिया और अब अध्यक्ष बने हैं तो राजस्थान में भाजपा की लुटिया डुबोएंगे @BJP4Rajasthan@narendramodi@madanrrathore#राजपूतविरोधी_मदनराठौड़
वाह! रंग रजपूती ने रंग !!
त्याग का भाव बड़ा महान होता है। अपने जीवन का त्याग करके जिनके पुरखों ने भूमि बचाई आज देश के लिए उसी भूमि का दान करना कितना महान कार्य है। आज की दुनिया बड़ी नगुणी (एहसान फरामोश) नज़र आती है, कभी मन में विचार भी आता है कि इस देश के लिए पीढ़ियां की पीढ़ियां स्वाहा करने के बाद भी हमे नफरत और गालियों के सिवाय क्या मिला ?
पर ये बड़ा संकुचित विचार है जबकि क्षात्र धर्म की परिभाषा बड़ी वृहद है। दुनिया को जो कहना है कहे हम अपने स्वधर्म पालन से मुंह नहीं मोड़ेंगे। शायद यही गुण रहे होंगे हमारे पूर्वजों में जो आज हजारों वर्षो बाद भी हम कायम है।
खेती किसानी से जीवनयापन करने वाले मगरा के राजपूत परिवार द्वारा 171 बीघा जमीन का दान करना हम सभी को ही स्वधर्म पालन के मार्ग में प्रेरणा देगा।
निर्दलीय विधायक रविंद्रसिंह भाटी लोकसभा का चुनाव कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल से सामने 1,18,176 अंतर से हार गए। लेकिन, उनके संघर्ष की चर्चा जयपुर से लेकर दिल्ली तक हो रही है कि एक लड़का जो कि कुछ महीने पहले विधानसभा चुनाव में बागी होकर चुनाव लड़कर विधायक बन गया और जब सांसद का चुनाव आया तो फिर ताल ठोक दी।
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाटी को 5 साल विधायक रहकर अपनी जनता का कामकाज करवाना था। लेकिन, उसके बावजूद भी कम समय में 2600 बूथों पर अपनी टीम तैयार करके चुनाव में 5,86,500 वोट लेकर आना और 8 में से 4 विधानसभा में आगे रहकर बीजेपी के वोट बैंक को अपने में ट्रांसफर करना ये काफी हद तक सफल होना माना जा रहा है।
रविंद्रसिंह चुनाव तो हार गए।लेकिन, इस लोकसभा चुनाव में एक बात तो साफ हो गई कि इतने कम समय में रविंद्र सिंह भाटी की लोकप्रियता जबरदस्त तरीके से बढ़ी है। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
बीजेपी ने विधानसभा चुनाव से पहले से लगाकर लोकसभा चुनाव तक भाटी को पूरी तरीके से हल्के में लिया। इसी वजह से पहले विधानसभा चुनाव में और अब लोकसभा चुनाव में बीजेपी को करारी का सामना करना पड़ा। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाटी खुद भी नहीं जीते और बीजेपी का भी खेल खराब कर दिया। ऐसे में अब भाटी के लिए अगले साढ़े चार साल थोड़ी मुश्किल और संघर्ष भरे हो सकते हैं।
आज बालोतरा में प्रताप दान जी चारण पर हुआ जानलेवा हमला अत्यन्त दुखद है।ऐसे अपराध की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है।सभ्य समाज में ऐसी विभत्स और जघन्य अपराध का कोई स्थान नहीं है।
पुलिस आमजन की सुरक्षा का माकूल बंदोबस्त करे व तुरंत अपराधियों को गिरफ्तार कर कड़ी क़ानूनी कार्यवाही करे ताकि भविष्य में ऐसा भयावह कृत्य करने की कोई हिम्मत न कर सके।
इस तरह की घटनाएँ निंदनीय हैl
@BhajanlalBjp@PoliceRajasthan
जितना समय, जितनी ऊर्जा.. रविंद्र सिंह भाटी को सोशल मीडिया पर ग़द्दार घोषित करने में लगाये हैं, उससे आधे प्रयास सबने अगर ज़मीन पर कर लिए होते तो बाड़मेर में भाजपा के वोट बढ़ जाते!
चुनाव के ऐसे समय में अपनी रेखा लम्बी करनी चाहिए ना कि दूसरे की रेखा छोटी करने का सोचना चाहिए!
Twitter पर अपनी Reach बढ़ाने के चक्कर में भाजपा का नुक़सान ना करें, क्योंकि इससे Ground पर भाजपा प्रत्याशी का ही नुक़सान हो रहा है🙏
आइए हम सब @RavindraBhati__ बनकर चुनाव लड़े और देशभर के युवाओं में जो एक उम्मीद एक आशा जगाई है रविंद्र ने उसे साकार करें। बाड़मेर जैसलमेर और बालोतरा में एक नया इतिहास लिखा जा रहा है हम उसके भागीदार बनें।