🚨 #SagaScam – सरकार तक पहुँच जानी चाहिए ये आवाज़!
ये 7 सोसाइटियाँ मिनिस्ट्री ऑफ कोऑपरेशन (सहकारिता मंत्रालय) से रजिस्टर्ड थीं और उनकी निगरानी में चल रही थीं:
Loni Urban Multi-State Credit & Thrift Co-operative Society (LUCC)
LJCC
Human Welfare Credit & Thrift Co-operative Society
SSV Co-operative Society
SS Credit Co-operative Society
Wishvaas Co-operative Society
Yashodeep Co-operative Society
मिनिस्ट्री के लाइसेंस और ऑडिट के बावजूद पूरे भारत के 16 राज्यों में 25,000 करोड़+ की ठगी!
45 लाख परिवार बर्बाद हो गए – बच्चे भूखे सो रहे हैं, घर टूट रहे हैं।
ऑडिट क्यों नहीं हुआ? इतनी बड़ी ठगी कैसे हो गई?
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समीर अग्रवाल दुबई में फरार, शबाब हुसैन पर मुंबई गिरगांव कोर्ट में ₹4.44 करोड़ चेक बाउंस केस – 4 फरवरी को हाजिर होने का आदेश था, लेकिन अभी तक कोई बड़ा एक्शन क्यों नहीं?
दिल्ली में FIR दर्ज है, फिर भी कार्रवाई कहाँ है?
हम सब पीड़ित है
सरकार चाहे तो मैं पूरा बयान देने को तैयार है– बताऊंगा किन-किन लोगों को गिरफ्तार करने से पैसा वापस निकल सकता है।
पब्लिक जागो! हर शेयर से सरकार और मीडिया तक आवाज़ पहुँचेगी।
45 लाख लोग इंतजार कर रहे हैं – अब चुप नहीं बैठेंगे!
#पैसे_वापस_दो #SagaScam #LUCCScam #SagaGroupScam #JusticeFor45Lakh #FinancialFraud #BoycottSilentMedia #सहकारिता_मंत्रालय_जवाब_दो
निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने उठाए पांच सवाल: राज्य कर्मचारियों के साथ बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाय
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दीपावाली के पूर्व 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी दीपावली के पूर्व बोनस दिया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत वर्ष नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 का आयोजन है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि इसी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में तैयार की गई थी।
इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई गई। उप्र में निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से उप्र पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उप्र में ग्रेटर नोएडा में काम कर रही निजी कम्पनी एन पी सी एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी आर कुमार की डिस्कॉम एसोशिएशन का ट्रेजरार बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना गया जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी की आपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर पूरी कार्यवाही की जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने कई बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप्र में बिजली के निजीकरण को लेकर कार्पोरेट घरानों के बीच 'कार्टेल' बन गया है जो बहुत गम्भीर बात है।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी को आधार मानकर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
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विजया दशमी के पहले बोनस देने के बजाय पॉवर कॉरपोरेशन की बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी : निजीकरण के लिये उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां करने का आरोप
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश के अनुसार नवरात्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति में लगे बिजली अभियंताओं और कर्मियों को विजया दशमी के पूर्व बोनस देने के बजाय पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी शुरू कर दी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता की पूरी सूची जारी कर इनके विरुद्ध चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति तत्काल मांगी गई है जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर अभियंताओं को जबरन सेवा निवृत्त करना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 24 सितंबर को जारी किए गए पत्र में तीन दिन के अंदर 27 सितंबर तक अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की अद्यतन स्थित मांगी गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता पदों की पदोन्नतियां के लिये चयन पहले ही हो चुका है। ऐसे में सभी अधीक्षण अभियंताओं और सभी मुख्य अभियंताओं की सूची जारी कर उनके बारे में अनुशासनामक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति मांगने के पीछे जबरन सेवा निवृत्ति देना ही एकमात्र उद्देश्य दिखाई देता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि शक्ति भवन के कॉरिडोर से मिल रहे समाचारों के अनुसार निजी घरानों को सहूलियत देने के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों की बड़ी पैमाने पर जबरन सेवा निवृत्ति कर छटनी की जानी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन विगत कई महीनों से लगातार बिजली कर्मियों का अलग-अलग तरह से उत्पीड़न कर रहा है। अभी भी हजारों बिजली कर्मचारियों को फेशियल अटेंडेंस के नाम पर 3 माह से रुका वेतन नहीं दिया गया। बड़े पैमाने पर बिजली कर्मियों को दूर दराज स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, हजारों संविदा कर्मियों को डाउनसाइजिंग के नाम पर निकाला गया और अब जबरन सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा की बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं किंतु वह आम जनता को किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होने दे रहे हैं बिजली कर्मी नवरात्र, दशहरा और दीपावली पर जनता को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे, यह संघर्ष समिति का निर्णय है ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजीकरण हेतु की जा रही दमनकारी नीतियों के विरोध में आंदोलन तेज करने का फैसला दशहरे के बाद लिया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी ।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 307 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
#stop_privatization_of_uppcl
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निजीकरण के दस्तावेज को अनुमोदित कराने हेतु पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन पर गलत आंकड़ों के आधार पर पैरवी का आरोप : निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि निजीकरण हेतु तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को अनुमोदित कराने हेतु पावर कार्पोरेशन प्रबंधन गलत आंकड़ों के आधार पर पैरवी कर रहा है और दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 304 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदो पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट द्वारा तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को अनुमोदित कराने के लिए नियामक आयोग से लेकर शासन के उच्च स्तर तक दौड़ लगा रहे हैं। पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष मुख्य सचिव के पास जाकर गलत आंकड़ों के आधार पर घाटा दिखाकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पैरवी कर रहे हैं ।
संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव से अपील की है कि वह निजी घरानों से मिली भगत में बनाए गए निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट को किसी भी प्रकार मंजूरी न दें। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को भी पत्र भेजकर मांग की है कि निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट को कोई भी मंजूरी देने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का पक्ष विद्युत नियामक आयोग को सुनना चाहिए क्योंकि निजीकरण से बिजली उपभोक्ताओं के साथ सबसे अधिक प्रभाव बिजली कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ने वाला है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजी घरानों के साथ मिली भगत है और उन्होंने सरकारी विभागों के बकाया और सब्सिडी की धनराशि को घाटे में जोड़कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के घाटे को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अतिरिक्त दोनों विद्युत वितरण निगमों की एक ए टी एंड सी हानियां बढ़ा चढ़ा कर दिखाइ गई हैं।
यह पता चला है कि ए टी एंड सी हानियों को बढ़ाकर दिखाने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में निजी नलकूपों की बिजली खपत कम करके आंकी जा रही है। उल्लेखनीय है कि निजी नलकूपों को उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार मुफ्त बिजली मिलती है। ए टी एंड सी हानियों को बढ़ा कर दिखाने से गत वर्ष की तुलना में विद्युत वितरण निगमों की अधिक हानि दिखाई गई है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार लगातार इस बात का प्रचार करती रही है कि 2017 में 41% ए टी और सी हानियों को वर्तमान सरकार ने घटाकर 16% के नीचे कर दिया है। अब निजीकरण के लिए इसके विपरीत ए टी एंड सी हानियों को बढ़ाकर बताया जा रहा है जिससे चुनिंदा निजी घरानों को लाभ दिया जा सके ।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि आगरा और कानपुर के निजीकरण के समय भी आगरा और कानपुर शहर की ए टी एंड सी हानियों को बढ़ाकर दिखाया गया था। आगरा के विषय में कैग की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है और निजी कम्पनी को बेजा लाभ देने का आरोप लगाया गया है । इसके बावजूद आगरा का फ्रेंचाइजी करार रद्द करने के लिए पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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बिजली का निजीकरण करने के लिए कंसल्टेंट के तौर पर Grant thornton एक ब्रिटिश कंपनी पावर कॉरपोरेशन से 2.39 करोड़ का टेंडर लेते वक्त झूठा शपथ पत्र देती है कि पिछले 3 साल में उसके ऊपर कोई पेनल्टी नहीं लगी है। लेकिन बाद में जब पता चला कि अमेरिका के रेगुलेटर "पब्लिक कंपनी अकाउंटिंग आवर साइड बोर्ड" ने 20 फरवरी 2024 में GT पर 40000 US doller की पेनल्टी लगाई थी।
अमेरिका में लगी पेनल्टी का ऑर्डर सामने आने के बाद फ्रॉड और धोखाधड़ी के मामले में कंपनी पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए था, ब्लैक लिस्ट होनी चाहिए थी और उसके द्वारा तैयार किए गए निजीकरण के डॉक्यूमेंट को निरस्त किया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ पूरा मामला दबा दिया गया है आज भी वह कंपनी निजीकरण के लिए डॉक्यूमेंट तैयार करने का काम कर रही है।
इसलिए पूरे प्रदेश के बिजली कर्मियों ने संकल्प लिया है कि यदि गरीब विरोधी, किसान विरोधी, युवा विरोधी, छोटे व्यापारी विरोधी, कर्मचारी विरोधी, छात्र विरोधी, आरक्षण विरोधी बिजली के निजीकरण का टेंडर जारी होता है तो उसी क्षण पूरे प्रदेश के बिजली बिजली कर्मी लोकतांत्रिक तरीके से "जेल भरो आंदोलन" प्रारंभ करने के लिए विवश होंगे।
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि धोखाधड़ी कर झूठा शपथ पत्र देकर टेंडर लेने वाली कंसल्टेंट कंपनी Grant thornton को ब्लैक लिस्ट कराने की कृपा करें तथा इसके द्वारा बनाए गए निजीकरण के प्रस्ताव को व्यापक जनहित में निरस्त किया जाये।
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