आज लोकतन्त्र विश्व की सबसे स्वीकृत शासन-व्यवस्था है, लेकिन उसका वास्तविक स्वरूप संकटग्रस्त होता जा रहा है।
प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार रामशरण जोशी के पूरे लेख को सबलोग पढ़ने के लिए
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वरिष्ठ समाजशास्त्री प्रोफेसर आनंद कुमार के पूरे लेख को पढ़ने के लिए कॉमेंट बॉक्स में दिए गये लिंक पर क्लिक करें।
राष्ट्रीय संकट और लोकतान्त्रिकरण की नयी लहर https://t.co/h5XBpUbMpY
वीर भारत तलवार की पुस्तक ‘उत्पीड़ितों के विमर्श’ पर वरिष्ठ आलोचक और जन संस्कृति मंच के पूर्व अध्यक्ष रविभूषण के सम्पूर्ण समीक्षा लेख को पढ़ने के लिए क्लिक कर सकते हैं।
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दुर्गा प्रसाद गुप्त की कविताएँ समकालीन वैश्विक हिंसा के विरुद्ध एक गहरी मानवीय प्रतिरोध की आवाज हैं।
संजीव कुमार का यह समीक्षा लेख पाठकों को न सिर्फ दुर्गा प्रसाद गुप्त के काव्यलोक के तह तक ले जाता है बल्कि उनकी कविताओं से तरल मुलाकात भी कराता है।
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जोशना बनर्जी आडवाणी की कविता को लेकर पिछले दिनों फेसबुक पर छिड़ा युद्ध बताता है कि किसी एक कविता के पाठ एक-दूसरे से किस हद तक भिन्न हो सकते हैं। एक समूह इसे कविता मानने को तैयार नहीं है। सबलोग के अपने स्तम्भ कविताघर में प्रियदर्शन। https://t.co/AE6SwpZ18D
@Pepperfry Very poor customer service from your team !
I had purchased a bed from @Pepperfry only in March this year (Order id FM2151483-S-PM8729). The "Sheesham wood" has its center frame broken . Why is there a joint in frame! Replace it
Pls revert on [email protected]