"सत्ता से सवाल करना अब आसान नहीं रहा..."
@news24tvchannel छोड़ने के बाद वरिष्ठ पत्रकार गरिमा सिंह ने टीवी मीडिया का ऐसा सच सामने रखा है, जिसे हर नागरिक को सुनना चाहिए।
अगर किसी सरकार के दौर में पत्रकारों को सवाल पूछने से पहले दबाव, ट्रोलिंग और स्टूडियो तक पहुँचने वाली भीड़ का डर सताने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
जब पत्रकार निर्भीक नहीं रहेंगे, तो जनता भी सच से वंचित होती जाएगी। इसलिए यह मुद्दा किसी एक पत्रकार या एक चैनल का नहीं, पूरे लोकतंत्र का है।
बाक़ी, आपकी समझदारी पर छोड़ता हूँ।
75 साल की उम्र में पता चला है मोदी जी को कि गालियां नहीं देनी चाहिए किसी को लेकिन उन्होंने सोनिया गांधी को कांग्रेस की विधवा 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड जर्सी गाय राहुल गांधी को हाइब्रिड यह सब क्या था देखें पूरा @dhruv_rathee#GaaliFromFrand
जब सरकार ही मिलावटखोर हो तो मिलावटखोरों का एकतरफा राज चलेगा ही . मिलावटखोर, कमीशनखोर, रिश्वतखोर, सूदखोर और सारे के सारे चोरों पर सरपरस्ती किसकी है? #YouthMovement#ViksitBharat#मिलावटखोर#Milavatkhor
यूपी की फैक्ट्रियों में गेहूं के साथ पत्थर की पिसाई: फैक्ट्री का ऑपरेटर बोला- 'मालिक ज्यादा मुनाफे के लिए आटे में सफेद पत्थर का चूरा मिलाते हैं', आटा देशभर में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बिक रहा; रिपोर्टर ने मजदूर बनकर आटे की फैक्ट्री में 25 दिन गुजारे, जानें कैसे एक्सपोज हुआ यह खेल
पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें- https://t.co/zgpEC6abSj
#UPNews #HindiNews #Investigation
क्रान्ति झोपड़ी वालों ने ही हमेशा लाई है. हर बड़ी क्रांति में ऐसी झोपड़पट्टीयों का बड़ा योगदान होता है.
पैसे की पहचान जहाँ इंसान की क़ीमत कोई नहीं.
बच के निकल जा इस बस्ती में यहाँ करता मोहब्बत कोई नहीं.. #Youth4ViksitBharat#EVM#GORAKHALAND#students_power
मिलिए उस मोहम्मद इरफ़ान से, जो जंतर-मंतर के उस वायरल वीडियो से पूरे देश में पहचाना जा रहा है, जिसमें वह संविधान की प्रस्तावना को जिस आत्मविश्वास, लय और भाव के साथ सुनाता है, वह आसपास खड़े हर व्यक्ति को कुछ पल के लिए ठहरकर सुनने पर मजबूर कर देता है।
एक टूटे-फूटे घर में रहने वाला यह युवा लोकतांत्रिक मूल्यों को केवल पढ़ता नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में जीने की कोशिश करता है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा है।
इरफ़ान को केवल उसकी प्रतिभा के अनुरूप सही अवसर, उचित मार्गदर्शन और मंच मिलने की देर है। उसके भीतर सीखने की भूख, बोलने की क्षमता और आगे बढ़ने का जज़्बा है। यक़ीन मानिए, एक बार उसे अवसर मिल गया तो वह अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर अपनी मंज़िल खुद बना लेगा।
देश की असली ताकत ऐसे ही युवाओं में छिपी है। ज़रूरत सिर्फ़ उन्हें पहचानने, उन पर भरोसा करने और उनका हाथ थामने की है।
ये डंकी चौधरी चंदाचोरों का पिछवाड़ा लाल करने की हिम्मत नहीं कर पाया. चंदाचोरों का भडुआ स्टूडेंट के पिछवाड़े लाल करने के लिए फड़क रहा है. #StudentProtest#JantarMantarProtest
प्रोटेस्ट में जा रहे खाने को भी दिल्ली पुलिस नहीं छोड़ रही है, डिलीवरी मैन को पहले ही रुकवा कर खाना ले ले रही है.
गजब चिरकुटई है भाई ये तो! https://t.co/LLyTsFLd1C
सरकार की चापलूसी और अंधभक्ति करना बहुत आसान है लेकिन सरकार की आलोचना करना, सरकार के विरुद्ध खड़े होकर के आंदोलन करना, साहस के साथ सवाल करना बहुत कठिन है। #cjp#संसद_मार्च#JantarMantarProtest
एक वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि @MumbaiPolice प्रदर्शन कर रहे छात्रों को धमका रही है कि अगर वे दोबारा प्रदर्शन करने लौटे, तो उन्हें झूठे ड्रग्स के मामले में फँसा दिया जाएगा और पूरी ज़िंदगी जेल में सड़ना पड़ेगा।
अगर यह सच है, तो यह सिर्फ़ छात्रों को डराने की कोशिश नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। अपनी आवाज़ उठाना अपराध नहीं है। छात्रों के सवालों का जवाब धमकियों से नहीं, जवाबदेही से दिया जाना चाहिए।
#Students #Mumbai #MumbaiPolice
@VarshaEGaikwad
दिल्ली के बदरपुर मेट्रो स्टेशन पर जंतर-मंतर जा रहे छात्रों को CISF ने गैर-कानूनी तरीके से रोक दिया। सिर्फ हाथों में पोस्टर होने की वजह से उन्हें यात्रा करने से मना कर दिया गया। अपनी आवाज़ उठाना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इस तरह रोकना सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला और सरेआम तानाशाही है।
सोचिए इनके पास इतना पैसा है कि 2 रील बनाने के 40 हजार रुपये दे रहे हैं बच्चों के प्रोटेस्ट को बदनाम करने और सरकार की तारीफ करने के लिए और ये भी देखिए कि नई उम्र के ये बच्चे वो पैसा ठुकरा रहे हैं...
जब एक तरफ तो हाकिम ही बेदर्द बेरहम हो और दूसरा न्याय का तराजू भी हाकिम की तरफ ही झुका हुआ हो तो फिर किससे उम्मीद और किससे आस न्याय की कीजियेगा? जब देश का सीजेआई खुद देश के युवाओं को पैरासाइट या कॉकरोच मानता हो उससे तो किसी भी प्रकार के न्याय की उम्मीद ही मत कीजिये #संसद_मार्च
इन सुरक्षा कर्मियों को किसने कहा था इस धरना प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए खुद के डंडे से गाड़ियों के शीशे तोड़फोड़ करो ??
क्या यह आदेश गृहमंत्री अमित शाह जी को पता हैं ??