कभी भी खुद को इस गलतफहमी में नहीं रखना चाहिए, कि हमारी कमी लोगों को उदास कराएगी...ऐसा कुछ नहीं होता है, क्योंकि लोगों को...लोग मिल ही जाते हैं, कभी बेहतर तो कभी बेहतर से बेहतर...
अंतिम समय जब कोई नहीं जाएगा साथ
एक वृक्ष जाएगा
अपनी गौरैयों-गिलहरियों से बिछुड़कर
साथ जाएगा एक वृक्ष
अग्नि में प्रवेश करेगा वही मुझ से पहले
- नरेश सक्सेना
(पूरी कविता सुनिए 👇🏻)
#WorldEnvironmentDay