नीले कबूतरों ने कहा 3000 साल तक पानी
नहीं पीने दिया फिर भाई ने पूरा इतिहास खोला
1947 से लेकर पिछले 1000 सालों की टाइम लाइन गिना दी अब कोई दलित ये नहीं कहेगा उन्हें सवर्णो ने पानी नहीं पीने दिया
इस भाई ने नीले कबूतरों की धोती खोल दी 🔥
@KrishanTaneja1@YadmullaPelu@Uppolice@gorakhpurpolice हां, दादरी पुलिस ने आलम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी वाले वायरल वीडियो के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। एसीपी प्रशाली गंगवार ने प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
तिब्बत/नेपाल से सामने आया यह वीडियो शायद प्राकृतिक आपदा की सबसे भयावह तस्वीरों में से एक है।
जलवायु परिवर्तन कोई भविष्य की चेतावनी नहीं, आज की हकीकत है। इसकी कीमत आम इंसान चुका रहा है, जबकि दुनिया के अरबपति और क्रोनी पूंजीपति अब भी मुनाफे में व्यस्त हैं।
प्रकृति से छेड़छाड़ का खामियाजा तो हम जैसे लोगों को ही भुगतना पड़ेगा।
#नेपाल_त्रासदी
Urgent appeal and attention to every GC Activist
उत्तर प्रदेश सरकार ने चार सरकारी मेडिकल कॉलेज—अम्बेडकर नगर, जालौन, कन्नौज और सहारनपुर में 90% आरक्षण दे रखा था।
इसके खिलाफ हाई कोर्ट में मुकदमा किया गया था, जिसमें जनरल कैंडिडेट की विजय हुई थी और कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था।
खुद उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट ने कोर्ट में बोला था कि इस बार लागू करने दो, अगली बार यह नहीं लागू करेंगे।
लेकिन @myogiadityanath, @brajeshpathakup और @UPGovt ने अपना वादा तोड़ते हुए आज 2 तारीख को जो काउंसलिंग हो रही है, उसमें सीट मैट्रिक्स निकाला है।
जिसमें कुल 85 राज्य कोटा सीटों का विभाजन इस तरह से किया है:
• SC: 62 सीटें (72.94%)
• ST: 05 सीटें (5.88%)
• OBC: 11 सीटें (12.94%)
• UR (जनरल): मात्र 07 सीटें (8.24%)
यानी एससी/एसटी आरक्षण 78.82% और कुल आरक्षण 91.76% किया है, जो संविधान का खुला उल्लंघन है।
क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसी कीमत पर एससी, एसटी और ओबीसी तीनों का कुल आरक्षण मिलकर 50% से ज्यादा न किया जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने दलील दी है कि क्योंकि यह एससी/एसटी बजट से बनता है इसलिए आरक्षण बढ़ा सकते हैं। लेकिन ध्यान से देखिए, अगर यह एससी/एसटी बजट से बना हुआ है तो इसमें ओबीसी का आरक्षण क्यों घुसेड़ा गया है?
यानी यह सिर्फ राजनीति है।
और सबसे मुख्य बात, जब हम कोर्ट में केस जीत चुके हैं, तो उसके बाद भी यह करने का मतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार सामान्य कैटेगरी को बुरी तरीके से चिढ़ा रही है।
साथ ही माननीय हाई कोर्ट लखनऊ के आदेश की अवहेलना भी कर रही है
और अपने शपथ पत्र से मुकर रही है।
दलित तुष्टिकरण में बीजेपी सरकार हर सीमा क्रॉस कर चुकी है।
एक सवाल है, अगर एससी/एसटी के लिए चार मेडिकल कॉलेज अलग से बनाए गए हैं, तो हम जनरल कैटेगरी के लिए चार मेडिकल कॉलेज क्यों नहीं बनाए जा रहे हैं?
क्या हम लोग टैक्स नहीं देते हैं? क्या इस मेडिकल कॉलेज के लिए सिर्फ एससी/एसटी से ही टैक्स वसूला जा रहा है?
ये है आदेश सीट मैट्रिक्स जो आज जारी की गई है
सोनिया गांधी एक आत्मकथा लिख रही हैं ।अच्छी बात है। उन्होंने पेंगुइन प्रकाशन से संपर्क किया। पेंगुइन ने कुछ मुद्दों को लेकर स्पष्टीकरण और सबूत मांगा जिसे सोनिया गांधी ने देने से इनकार कर दिया। पेंगुइन प्रकाशन ने भी छापने से इनकार कर दिया। अब वह किताब अमेरिका के किसी पब्लिशर द्वारा छापी जा रही है।
किताब में क्या लिखा है, यह तो छपने के बाद पता चलेगा। लेकिन जो कहा जा रहा है उसके अनुसार सोनिया गांधी आरएसएस, मोदी, अमित शाह और चीन के बारे में लिखी होगी। मोदी और शाह की तारीफ तो करेंगी नहीं।
सोनिया गांधी ने चीन विवाद के किस काल खंड का जिक्र करेंगी। 1962 के पहले का, 1962 के बाद का या अभी-अभी जो घटनाएं हुई है उस पर।
पत्रकार प्रदीप सिंह ने कुछ सवाल पूछे हैं और उम्मीद करते हैं कि सोनिया गांधी अपनी किताब में इसका जिक्र जरूर किया होगा।
1. 2008 में कांग्रेस पार्टी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच में क्या समझौता हुआ था?
2. सोनिया गांधी की शादी राजीव गांधी से 1968 में हुई थी और उन्होंने भारत की नागरिकता 1983 में लिया था। 15 साल तक उन्होंने भारत की नागरिकता क्यों नहीं ली?
3. विदेशी मूल की होते हुए भी प्रधानमंत्री के सरकारी आवास पर 15 साल तक क्यों विराजमान रही? उस दौरान भारत में इमरजेंसी भी लगा। प्रधानमंत्री आवास में गोपनीय जानकारियां भी आती रही है। उन्हें क्या क्या जानकारियां थी?
4. बिना भारत के नागरिकता लिए हुए संजय गांधी की कंपनी मारुति में डायरेक्टर कैसे बन गई?
5. नागरिक बनने से पहले उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल हो गया?
6. जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई तब वहां दो गवाह हम मौजूद थे। आरके धवन छाता लेकर चल रहा था। पिस्तौल और ऑटोमेटिक गन से गोलियां चल रही थी लेकिन धवन को खरोच भी नहीं आया। आखिर क्यों? गोलियों की आवाज सुनकर सोनिया बाहर आई लेकिन उनसे कोई पूछताछ नहीं हुई। क्यों? उनको गवाह भी नहीं बनाया गया। क्यों? ठक्कर कमीशन के अनुसार हत्यारे सतवंत सिंह की ड्यूटी आरके धवन ने लगवाई थी। क्यों? धवन की ड्यूटी राजीव गांधी के साथ भी कैसे लग गई?
7. हर सभा में राजीव गांधी के साथ जाने वाली सोनिया उनके आखिरी पेरंबदूर की सभा में क्यों नहीं गई? राजीव गांधी का शरीर कई टुकड़ों में बट गया था। अखबारों के मुताबिक डीएनए टेस्ट के लिए सोनिया गांधी ने राहुल गांधी का ब्लड सैंपल देने से मना कर दिया। हो सकता है कि यह झूठ हो लेकिन स्पष्टीकरण तो आना ही चाहिए।
8. जब राहुल गांधी को अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था, उनसे बरामद सामान भी सामने आ गया था। राहुल गांधी को छुड़ाने के लिए अटल जी के सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्र को किसने फोन किया था? क्या सोनिया गांधी ने अटल जी को फोन किया था?
9. जब डोकलाम विवाद चल रहा था, तब राहुल गांधी चीन के राजदूत से मिलने आधी रात को उनके घर क्यों गए थे?
10. भगवा आतंक का नरेटिव क्यों खड़ा किया गया था? समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट के पाकिस्तानी आतंकियों को गिरफ्तार किया गया, उन्हें छोड़ने का आदेश किसने दिया? बदले में कुछ हिंदुओं को जिसमें स्वामी अधिमानंद शामिल थे, को किसके कहने से गिरफ्तार किया गया?
11. 2008 के मुंबई आतंकी घटना को लेकर अमेरिका से 26 बार चेतावनी आई थी कि आतंकवादी समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसेंगे। उसे रोकने के लिए क्या काम किए गए? बदला लेने के लिए जब भारतीय वायुसेना और सेना तैयार खड़ी थी तो उन्हें किसके कहने पर रोका गया? पाकिस्तान प्रायोजित बड़ी बड़ी आतंकवादी घटनाएं होती रही लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
12. मुंबई हमले के बाद जब पाकिस्तान में बाढ़ आई थी तो उन्हें 25 मिलियन डॉलर की मदद किसके कहने पर दी गई थी?
13. सोनिया मनमोहन सिंह के कार्यकाल में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान को किसके कहने पर रोका गया था? छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की पूरी फ्रंट लीडरशिप को नक्सलियों ने खत्म कर दिया था। सीआरपीएफ के 76 जवानों की हत्या कर दी गई थी, फिर भी उनके खिलाफ निर्णायक एक्शन क्यों नहीं लिया गया था? जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में सीआरपीएफ के जवानों की हत्या का जश्न मनाया गया था, उनके खिलाफ एक्शन क्यों नहीं लिया गया?
ऐसे हजारों सवाल हैं जिसका जवाब स
सिर्फ सोनिया गांधी दे सकती हैं। क्या हम उम्मीद कर सकते हैं कि सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण में सभी सवालों का ईमानदारी से जवाब दिया होगा?
अपवाह उड़ाया जा रहा है कि सरकार इस किताब को छापने से रोकेगी। यह अफवाह सिर्फ किताब की बिक्री बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। किताब छपकर जब आएगी तो इस पर प्रश्न खड़े होंगे? जो सही बात होगी उसका समर्थन होगा, जो गलत होगा उसका विरोध होगा, जो छुपाया गया है उसे सामने लाया जाएगा।
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जंतर-मंतर के उपद्रवियों की FIR हट सकती है…
तो स्वर्ण समाज पर लगाए गए झूठे SC/ST Act के मुकदमे क्यों नहीं?
अगर सरकार के पास FIR हटाने का रास्ता है,
तो न्याय सिर्फ कुछ लोगों के लिए क्यों?
बीमारी सिर्फ SC/ST को होती है क्या?
GC/OBC बीमार नहीं होते?
बीमारियों के इलाज में भी जाति देखकर इलाज़ होगा, गरीबी देखकर नहीं???
आखिर हम देश को कहाँ लेकर जा रहे हैं, और ऐसी नीतियों से जातिवाद खत्म होगा क्या?
योगी जी vs मुख्तार अंसारी युद्ध की पूरी सच्चाई🔥🤟
योगी जी पर कैसे 2008 में जानलेवा हमला हुआ था
यह हमला मुख्तार अंसारी के लोगों ने किया था
योगी जी बहुत मुश्किल से बच पाए थे
एनिमेशन वीडियो में पूरा कहानी देखिए
अब आया कांग्रेस पहाड़ के नीचे।
अब उन्हें अपनी गलती का एहसास होगा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ संविधान संशोधन में मोदी सरकार का क्यों साथ दिया था?
20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने Dr. Subhash Kashinath Mahajan v. State of Maharashtra मामले में SC/ST Act के दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए कहा था कि:
1. हर शिकायत पर तुरंत गिरफ्तारी जरूरी नहीं है।
2. सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी से पहले संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी की अनुमति और गैर-सरकारी व्यक्ति के मामले में SSP स्तर की अनुमति होनी चाहिए।
3. DSP स्तर पर प्रारंभिक जांच (preliminary inquiry) की जा सकती है ताकि देखा जा सके कि आरोप प्रथमदृष्टया SC/ST Act का अपराध बनाते हैं या शिकायत झूठी/प्रेरित तो नहीं है।
4. यदि प्रथमदृष्टया मामला नहीं बनता या शिकायत स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण/झूठी है, तो अदालत अग्रिम जमानत दे सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कांग्रेस समेत सारे विपक्षी दलों और NDA के सहयोगी दलों ने देश भर में आंदोलन खड़ा कर दिया।
2018 में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटते हुए संविधान में संशोधन कर दिया और ऐसा draconian कानून बनाया की हर गैर दलित व्यक्ति इसकी चपेट में आ रहा है। दलित के खिलाफ जुबान खुली नहीं कि सीधे जेल। बिना मुकदमा चलाए सैकड़ों लोग आज भी देशभर की जेल की हवा खा रहे हैं।
राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में SC/ST Act के तहत FIR दर्ज होने की खबर है। BNS की धाराओं 196 और 299 तथा SC/ST Act की धारा 3(1)(Q) लगाई गई है। मामला उस विवाद से जुड़ा है जिसमें उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित “शुद्धिकरण” को जातिगत भेदभाव/छुआछूत से जोड़ा था।
सारी दफाएं गैर जमानती है।
अब कुछ सवाल आम लोगों से, बड़े वकीलों से, नेताओं से, सरकारों से और सुप्रीम कोर्ट समेत सभी अदालतों से पूछा जाएगा कि:
क्या राहुल गांधी के साथ वही कानूनी प्रक्रिया होगी जो एक आम नागरिक के साथ होती है?
क्या राहुल गांधी गिरफ्तार हो सकते हैं?
कानूनन—हाँ। सांसद या नेता प्रतिपक्ष होना उन्हें आपराधिक कानून से कोई सामान्य छूट नहीं देता।
लेकिन आम आदमी और बड़े नेता में फर्क है?
एक सामान्य व्यक्ति के पास अक्सर
महंगा कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं होता।
राजनीतिक प्रभाव नहीं होता।
मीडिया का ध्यान नहीं होता।
हाईकोर्ट/सुप्रीम कोर्ट तक तुरंत पहुंच नहीं होती।
वहीं राहुल गांधी जैसे व्यक्ति के पास देश के सबसे बड़े वकीलों की फौज और पीछे कांग्रेस जैसी राजनीतिक संगठन है।
क्या उन्हें बिना जांच के गिरफ्तार किया जा सकता है?
संविधान संशोधन तो यही कहता है कि बिना जांच गिरफ्तार किया जा सकता है।
क्या “कानून सबके लिए बराबर है”—
असली टेस्ट यही है।
मेरे विचार से इस मामले को BJP बनाम Congress के चश्मे से देखने के बजाय एक बेहतर कसौटी के रूप में परखा जाना चाहिए।
जो प्रक्रिया एक सामान्य नागरिक के साथ अपनाई जाती है, वही राहुल गांधी के साथ भी अपनाई जाए—न कम, न ज्यादा।
अगर सामान्य व्यक्ति के खिलाफ SC/ST Act में FIR होने पर पुलिस तत्काल गिरफ्तारी करती है, तो केवल राहुल गांधी होने के कारण उन्हें विशेष संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
बराबरी का मतलब है कि हर व्यक्ति पर समान कानून लागू हो।
अब समय आ गया है कि कांग्रेस समेत सारी राजनीतिक दल इस बात पर सोचें और विचार करें कि एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग रोकने के लिए तुरंत संविधान में संशोधन कर दिया जाए।
वरना आम जनता के दिमाग में यह भ्रम बना रहेगा कि कानून सबके लिए समान नहीं है।
आम आदमी के लिए अलग, रसूखदार आदमी के लिए अलग।