Repeat after me -
WE, THE PEOPLE OF INDIA having solemnly resolved to constitute India into a SOVEREIGN SOCIALIST SECULAR DEMOCRATIC REPUBLIC and to secure to all its citizens:
JUSTICE, social, economic and political;
LIBERTY of thought, expression, belief, faith and worship;
‼️ये नाली साफ करने वाला रोहन पाठक ब्राह्मण है
पर इसी की फोटो दिखाकर
@ambedkariteIND
सहित सारे अंबेडकरवादी लोग
अहीर कुर्मी मुसलमान और टीना डाबी के बच्चों के लिए आरक्षण माग रहे है‼️
Mohd Arbaz lured a 14 YO minor Hindu girl, took her to a secluded spot to assault her in Mira Bhayandar, Maharashtra. He was caught red-handed by locals and Hindu activists handed him over to the police.
Activist Rupesh Dubey alleges, in the police station, PSI Nandini Ware in collusion with a social worker tried to manipulate a key signature.
And when Hindu activists objected, they were threatened with FIRs and jail.
Is this for real, @MBVVPOLICE?
@DGPMaharashtra, please take charge.
CC: @CMOMaharashtra@HMOIndia@AmitShah
झारखंड के आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में आए पीयूष मिश्रा
रांची: अभिनेता, लेखक और गीतकार पीयूष मिश्रा ने JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे झारखंड के छात्रों का समर्थन किया है।
5 अगस्त 2026 को सामने आए एक वीडियो संदेश में पीयूष मिश्रा ने कहा, मैं आपके बीच बैठने आ रहा हूँ। पूरा बॉलीवुड खराब नहीं है, वहां बहुत अच्छे लोग भी हैं। हम आपके साथ हैं। उन्होंने बिना गाली-गलौज के शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चलाने के लिए छात्रों की सराहना भी की।
रांची में छात्रों का आंदोलन करीब दो सप्ताह से जारी है। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की जांच तथा पारदर्शी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कुछ छात्र मामले की CBI जांच और विवादित परीक्षा को रद्द करने की मांग भी कर रहे हैं।
JPSC प्रदर्शन में छात्रा की चेतावनी: "आजादी" के नारे लगाने वालों को बक्शा नहीं जाएगा
रांची: झारखंड में JPSC अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा का बयान सामने आया है, जिसमें उसने कथित रूप से आजादी के नारे लगाने वालों, ब्राह्मणवाद को गाली देने वालों को कड़ी चेतावनी दी।
छात्रा ने कहा कि आंदोलन स्थल पर देश विरोधी नारे लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उसने यह भी कहा कि यदि कोई इस तरह के नारे लगाएगा, तो वह स्वयं उसका विरोध करेगी।
(Tag Neha Bora to help avoid such situations, for her own good.)
SHOCKING CONVERSION ATTEMPT IN MIRA BHAYANDAR, MAHARASHTRA!
Accused woman allegedly performed certain black magic (or some chemical or drugs) to sicken a minor Hindu girl and then attempted to convert the family.
The entire act was caught on video.
When activists confronted her: "You come into our homes and tell us our Gods aren't equal."
@MBVVPOLICE has reportedly not yet registered any FIR in the matter despite a written complaint.
>नाम नेहा बोरा
>काम आंदोलन चोरी
>असली काम छात्र आंदोलन का अभिनय करना
>झारखंड के असली छात्रों ने विधानसभा मार्च की तारीख 10 अगस्त रखी है
>मैडम ने झारखंड आंदोलन पर शुरुआत से कुछ नहीं बोला
>जब देश भर के कैमरे झारखंड आंदोलन की तरफ घूमे तो मैडम को कैमरों की याद सताने लगी
>मैडम ने छात्रों के विधानसभा मार्च को भटकाने के लिए और कैमरों का रुख खुद की तरफ मोड़ने के लिए 7 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान कर दिया
>मैडम चाहती तो 10 अगस्त वाले आंदोलन को मजबूती और समर्थन दे सकती थीं
>लेकिन फिर कैमरे मैडम के अभिनय को कैसे कैद करते
>जरूरी नहीं हर आंदोलन को पहली पंक्ति से ही लीड किया जाये और कैमरे का फोकस खाया जाये,
>ये सब लोग झारखंड आंदोलन को दीमक की तरह खाकर और क्रेडिट लेकर ढपली की धुन पर नाचने वाली रील बनाना चाहते हैं
>मुझे उम्मीद है कि झारखंड के छात्र सचेत रहेंगे
FYI,
Similar data was presented in MP High Court to counter OBC reservation,
& judges agreed that extra reservation is not needed in that case.
Please save all such results where SC/ST/OBC take UR seats.
This can be used as a proof in Court as to why reservation is not needed😂
पता नहीं सरकारें, चाहे भाजपा की हों, कांग्रेस की हों, या किसी भी दल की, आख़िर कब तक ऐसे मामलों में संवेदनहीन बनी रहेंगी? सत्ता बदलती रहती है, लेकिन आम नागरिक के हिस्से में अक्सर वही पीड़ा, वही अन्याय और वही दमन आता है।
सोशल मीडिया पर हम सभी करणी सेना के प्रदर्शन के कई वीडियो देख ही रहे हैं। देखिए, दिल्ली में भी पुलिस भाजपा की नहीं थी। वहाँ जहाँ पुलिस की कार्रवाई उचित लगी, हमने उसे स्वीकार किया; और जहाँ उसने मर्यादा लांघी, वहाँ उसकी आलोचना भी की। हमने कभी एकतरफ़ा बात नहीं की।
लेकिन करणी सेना के प्रदर्शन में हमें एक भी ऐसा दृश्य नहीं मिला, जहाँ प्रदर्शनकारी किसी व्यक्ति पर हिंसक हमला कर रहे हों। उन्होंने बैरिकेड्स ज़रूर तोड़े, लेकिन केवल बैरिकेड तोड़ देना अपने आप में हिंसा नहीं है। हिंसा तब होती है, जब किसी की जान पर हमला हो, किसी पुलिसकर्मी को पीटा जाए या आगज़नी और तोड़फोड़ से लोगों को नुकसान पहुँचाया जाए।
बैरिकेड्स तब तोड़े गए, जब प्रदर्शनकारियों को लगा कि प्रशासन अपने ही वादे से मुकर गया है। पहले कहा गया था कि आप कलेक्टर कार्यालय तक मार्च करेंगे, ज्ञापन देंगे और शांतिपूर्वक लौट जाएंगे। रास्ते पहले से तय थे। लेकिन उसी तय रास्ते पर अचानक बैरिकेड्स खड़े कर दिए गए। ऐसे में लोगों के भीतर यह भावना आना स्वाभाविक था कि उनके साथ छल हुआ है।
कितनी ही वीडियोज़ में हमने साफ़ देखा कि वहाँ खड़े लोग पुलिस पर हमला नहीं कर रहे थे। वे पुलिस के लिए तत्काल कोई ख़तरा नहीं थे। फिर भी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जिस तरह का बल प्रयोग किया गया, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
संलग्न वीडियो में प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक झंडे लेकर आगे बढ़ते दिखते हैं, बिना किसी पत्थरबाज़ी, आगज़नी या पुलिस पर हमले के। इसके बावजूद हुए बल प्रयोग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वॉटर कैनन का अत्यधिक प्रेशर के साथ उपयोग किया गया।
और हमारे बीच… देवराज सिंह पलाड़ा नहीं रहे।
देवराज सिंह, जो ओबीसी समाज से आते थे, उनकी मृत्यु की ख़बर केवल एक समाचार नहीं है। यह एक परिवार का उजड़ जाना है। यह उन सपनों का टूट जाना है, जो शायद उन्होंने अपने घरवालों के साथ मिलकर देखे होंगे। यह उस पीड़ा का नाम है, जिसे शब्दों में बाँधना आसान नहीं।
अब सवाल केवल एक व्यक्ति की मृत्यु का नहीं है। सवाल यह है कि क्या इस मौत से कोई सबक लिया जाएगा? क्या इसकी निष्पक्ष जाँच होगी? क्या जवाबदेही तय होगी?
या फिर यह घटना भी कुछ दिनों की सुर्खियाँ बनकर इतिहास के किसी कोने में दबा दी जाएगी? इस पर हमें गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सोचना होगा।
"UGC तो हम लागू नहीं होने देंगे! और हुआ तो पूरे देश में आंदोलन होगा!
सवर्ण जितना शांत है, उतना उग्र भी है। और अगर उग्रता की बात आई तो यहाँ से लेकर दिल्ली तक हिला देंगे"
-कहना है एक छात्र का
अब धीरे धीरे सवर्ण भी जग रहे हैं!
ट्रेन में कोई कोना नहीं होता। मुसलमान आने-जाने के रास्ते केपी ब्लॉक करते हैं, ट्रेन में भी, सड़कों पर भी। कांवड़ियों की सारी सीट है, हिंदू बैठे हैं, बोल-बम का नारा लगा रहे हैं, तुम्हें क्यों पेट में दर्द हो रहा है? तुम्हारे मस्जिद में या मक्का की फ्लाइट में तो बोल-बम नहीं बजा दिया ना? हिंदू अपने देश में ट्रेन में नाचे नहीं कह कि कोई मुल्ला नाराज़ हो जाएगा! कहाँ है यहाँ कोई मुल्ला?
विरोध क्या होता है, अब भाजपा भी समझेगी। शायद मोदी सरकार को लगा था कि जनता चुप है और डर के सहारे शासन चलता रहेगा। लेकिन अब सवाल आरक्षण, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था पर भी उठेंगे। देश में चोरी और महिलाओं के खिलाफ अपराध क्यों बढ़ रहे हैं? क्या कानून-व्यवस्था विफल हो चुकी है?
(यह बात बिहार के एक सवर्ण नागरिक ने कही है, जो मौजूदा व्यवस्था और प्रशासन से नाराज़ है।)
"जयपुर में हुए UGC आंदोलन का BJP पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा! ऐसे आंदोलन होते रहते हैं और हम लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं!"
-वरिष्ठ BJP नेता
इसको कहते हैं अहंकार!
और अहंकार तो रावण का भी नहीं टिका!
#JusticeForDevrajSingh
कल करणी सेना के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, जिससे एक भी हिंसा का समाचार नहीं आया, पुलिस का लाठीचार्ज हुआ और जैसा कि अपेक्षित था एक व्यक्ति की बलि के साथ सरकार ने इस यज्ञ की पहली आहुति ले ली है!
ईश्वर देवराज सिंह पलाड़ा को सद्गति दें और इस घमंडी पार्टी को सद्बुद्धि!
देवराज स्वयं ओबीसी समाज से थे पर सामान्य वर्ग के विषय के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। मैं जाति का नाम नहीं लिखता पर हर पार्टी जाति-जाति करती है, इस कारण लिख रहा हूँ।
सोते हुए को जगाया जा सकता है लेकिन जो
सोने का नाटक कर रहे लोगो को जगाना मुश्किल है
वही हाल इस समय सरकार है
मैं अपने गांव का एग्जाम्पल दे रहा हु
95% सवर्णों ने 2024 में इनको वोट दिया
यूजीसी के बाद कोई इनका नाम नहीं सुनना चाहता है
ओर ये लोग इधर उधर की बात करने में लगे है
पता सबको है स्वर्ण मतदाताओं ने अपने परंपरागत पुरानी पार्टी को छोड़ नए प्रशांत किशोर को वोट दिया
अब it सेल के लोग अलग अलग दलील दे रहे है
सब कुछ कर देंगे बस अपनी गलती नहीं स्वीकारेंगे