भला इतना खराब एक्सप्रेसवे भी कोई हो सकता है? ये तो पूरा का पूरा मजाक हुआ है.
पिछले 15 दिन से रोज सड़क ही बन रही है. कहीं भी धंस जा रही. इस पर तो चलने वालों को संभलकर चलना पड़ेगा.
अब इस एक्सप्रेसवे को देखकर लगता है कि यहां 4700 करोड़ रुपए बर्बाद हो गया.
अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी गांवों में, लोग जब भी अपना फोन चालू करते हैं, तो उन्हें एक चीनी मोबाइल नेटवर्क से मैसेज मिलता है।
इसकी जांच हो. क्या ये आरोप सही है? यह सिर्फ नेटवर्क का मामला नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा लीक का बड़ा खतरा है!
देश के सीमावर्ती नागरिकों की लोकेशन, कॉल और पर्सनल डेटा सीधे चीनी सर्वर तक पहुँचने का जोखिम है।
56 इंच की बात करने वाली सरकार का आईटी मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय आख़िर इस गंभीर डिजिटल घुसपैठ पर खामोश क्यों हैं?
भारत सरकार को ऐसे गंभीर सवालों पर तत्काल जवाब देकर नागरिकों की शंका का समाधान करना चाहिए.
सलूम्बर जिले की धरियावद विधानसभा क्षेत्र की लसाड़िया तहसील की धुलिया ग्राम पंचायत के कराकला फला गांव में शिक्षा व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है। यहां वर्ष 2013 में सरकारी स्कूल तो खुल गया, लेकिन आज तक स्कूल भवन नहीं बन पाया। मजबूरी में बच्चों की पढ़ाई गांव के मंदिर में कराई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि करीब 60 बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी सिर्फ एक शिक्षक के कंधों पर है। एक ही शिक्षक सभी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ स्कूल का पूरा प्रशासनिक कार्य भी संभाल रहा है।
Chinese PLA has entered 60km inside India's territory of Arunachal Pradesh.
चीन भारत के 60Km अंदर तक घुस जाता है और हमारी सरकार और मीडिया को कोई खबर तक नहीं रहती है, वहाँ के स्थानीय लोगो को वीडियो प्रूफ दे के बताना पड़ रहा है?
See how local people video live on that moment.
रिजिजू जी, संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर यह कौन जानता होगा - महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ।
सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं?
2023 का क़ानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के।
“अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा” - कल प्रयागराज में एक छात्र ने मुझसे यही कहा। सालों की तैयारी, घर की ज़मीन बेची, माँ-बाप का कर्ज़ और फिर भी हाथ में कुछ नहीं।
यह हार उसकी नहीं है। यह उस व्यवस्था की हार है जिसने उसकी मेहनत का दाम देने से इनकार कर दिया।
तेरह दिन हो गए - गृह मंत्री अमित शाह के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। मोदी जी माफी मांगने की जगह क्षमा बाँट रहे हैं।
@AmitShah जी, यह मत समझिए कि हम जवाबदेही मांगना बंद कर देंगे। राजधानी की सड़कों पर बच्चों पर लाठियां और पैलेट चले - और आपने एक शब्द नहीं कहा। आज नहीं तो कल, इस जुर्म का जवाब आपको देना ही पड़ेगा।
छात्र देश की रोशनी हैं, और मैं उनकी पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूं।
#ChhatronKiGoonj
इसी स्याही से हम इंक़लाब लिख देंगे..
झारखंड के छात्र अभी भी साथ मिलकर लड़ रहे हैं एक बेहतर कल लिखने के लिए
जो लोग कभी छात्रों के मुद्दे और जीवन के बारे में जाने की कोशिश नहीं कर पाए उनको स्याही का काम कैसे पता होगा
भ्रष्टाचार का उदाहरण देखना हो तो उत्तर प्रदेश में जाकर देख लीजिए,
जब एक्सप्रेसवे का ये हाल है तो लोकल सड़कों का क्या होता होगा,
आखिरकार ऐसे कब तक चलेगा?