लूसेंट इसलिए जादुई किताब है
मेरे पास जो पुरानी किताब थी उसके अनुसार 37 में से 17 सवाल आए है
आप खुद ही जज करले की में इसका नाम क्यों ले रहा हु
क्योंकि मेने पढ़ी है
में चाहता हु आप सभी को सही राह पर चल कर सफलता प्राप्त करें
#sdmsureshkm#ras_2023
भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों का प्रदर्शन उनका जुझारूपन दिखाता है. इंसाफ के लिए पहलवानों के चुनौतीपूर्ण संघर्ष की पूरी कहानी पढ़िए इंडिया टुडे में - https://t.co/XY9f7hor5X
@saurabhtop
सभी लड़कियां और महिलाएं विशेष ध्यान दें।
भारत में आज नारी 18 वर्ष की आयु के बाद ही बालिग़ अर्थात विवाह योग्य मानी जाती है। परंतु मशहूर अमेरिकन इतिहासकार कैथरीन मायो (Katherine Mayo) ने अपनी बहुचर्चित पुस्तक "मदर इंडिया" (जो 1927 में छपी थी) में स्पष्ट लिखा है कि भारत का रूढ़िवादी वर्ग नारी के लिए 12 वर्ष की विवाह/सहवास आयु पर ही अडिग था। 1860 में तो यह आयु 10 वर्ष थी। इसके 30 साल बाद 1891 में अंग्रेजी हकुमत ने काफी विरोध के बाद यह आयु 12 वर्ष कर दी। कट्टरपंथी हिन्दुओं ने 34 साल तक इसमें कोई परिवर्तन नहीं होने दिया।
इसके बाद 1922 में तब की केंद्रीय विधान सभा में 13 वर्ष का बिल लाया गया। परंतु धर्म के ठेकेदारों के भारी विरोध के कारण वह बिल पास ही नहीं हुआ। 1924 में हरीसिंह गौड़ ने बिल पेश किया। वे सहवास की आयु 14 वर्ष चाहते थे। इस बिल का सबसे ज्यादा विरोध पंडित मदन मोहन मालवीय ने किया,
जिसके लिए 'चाँद' पत्रिका ने उनपर लानत भेजी थी। अंत में सिलेक्ट कमेटी ने 13 वर्ष पर सहमति दी और इस तरह 34 वर्ष बाद 1925 में 13 वर्ष की सहवास आयु का बिल पास हुआ। 6 से 12 वर्ष की उम्र की बच्ची सेक्स का विरोध नहीं कर सकती थी उस स्थिति में तो और भी नहीं जब उसके दिमाग में यह ठूस दिया जाता था कि पति ही उसका भगवान और मालिक है।
जरा सोचिये! ऐसी बच्चियों के साथ सेक्स करने के बाद उनकी शारीरिक हालत क्या होती थी? इसका रोंगटे खड़े कर देने वाला वर्णन Katherine Mayo ने अपनी किताब "Mother India" में किया है
कि किस तरह बच्चियों की जांघ की हड्डियां खिसक जाती थी, मांस लटक जाता था और कुछ तो अपाहिज तक हो जाती थी। 6 और 7 वर्ष की पत्नियों में कई तो विवाह के तीन दिन बाद ही तड़प तड़प कर मर जाती थी। स्त्रियों के लिए इतनी महान थी हमारी मनुवादी संस्कृति।
अगर भारत में अंग्रेज नहीं आते तो भारतीय नारी कभी भी उस नारकीय जीवन से बाहर आ ही नहीं सकती थी।
संविधान बनने से पहले स्त्रियों का कोई अधिकार नहीं था।
मनुस्मृति के अनुसार बचपन में पिता के अंडर, जवानी में पति की दासी और बुढ़ापे मे बेटे की कृपा पर निर्भर रहती थी।
बाबा साहब डॉ. अंबेडकर ने संविधान मे इनको बराबरी का दर्जा दिया। संपत्ति का अधिकार, नौकरी में बराबरी का अधिकार, ये सब बाबा साहब की देन है।
@the_VinayDubey 🏏 CSK 167/8 (20.0) vs DC 84/4 (13.1)
Match Dekha? Ab Fayda Dekho! GET 1300% WELCOME BONUS! and PLAY on Khiladi! https://t.co/wi2GRn2iME
1. बामसेफ, डीएस4 व बहुजन समाज पार्टी के जरिए सदियों से वंचित-शोषित बहुजन समाज को राजनीतिक शक्ति के रूप में खड़ा करके परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को आत्मबल व गति देने वाले मान्यवर श्री कांशीराम जी को आज जन्मदिन पर अपार श्रद्धा-सुमन।
Trigger Warning ⚠️:
"बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर की जीभ काटने वाले को दूंगा 10 करोड़"-संत परमहंस आचार्य, अयोध्या
रामचरितमानस को नफरत की किताब बताने पर भड़के संत
https://t.co/LKs7tLesqw
फ्लाइट में महिला पर पेशाब करने वाले यात्री शेखर मिश्रा पर दर्ज हुई FIR
Air India ने Shekhar Mishra पर लगाया 30 दिनों का प्रतिबंध
महिला आयोग ने 7 दिन में मांगी रिपोर्ट
#AirIndia#AirIndiaincident#NewYork#Delhi#flight