जनपद रामपुर, तहसील स्वार के रुस्तम नगर म��ं स्कूली बच्चों द्वारा गोगा नदी पार कर स्कूल जाने का यह दृश्य भाजपा सरकार के विकास के दावों की जमीनी हकीकत दिखा रहा है। इसके अलावा रामपुर जिले में ही घूघा और पीलाखार नदी पर भी पुलों के अभाव में ग्रामीण लकड़ी ��र अन्य साधनों से बनाए गए अस्थायी पुलों के सहारे जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।
बारिश आते ही ये अस्थायी पुल बह जाते हैं और कई गांवों का संपर्क टूट जाता है। किसान खेतों तक नहीं पहुंच पाते, बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और स्थानीय कारोबार भी प्रभावित होता है।
विकास के नाम पर भाजपा ने सिर्फ अपने इंजनों की संख्या बढ़ाई है।
“इंजन भरपूर, जनता मजबूर!”
''जिन्होंने सच्ची श्रद्धा से दान नहीं किया, राम मंदिर में उन्हीं का चढ़ावा चोरी हुआ''
- सतीश महाना, यूपी विधानसभा अध्यक्ष
राम मंदिर में चोरी का महापाप हुआ है, लेकिन BJP के नेता भक्तों की श्रद्धा पर ही सवाल उठा रहे हैं।
👉 क्या देश के करोड़���ं रामभक्त इन्हें माफ करेंगे?
जब एक छोटी-सी बच्ची कैमरे के सामने खड़े होकर कहती है - "हम पढ़ना चाहते हैं, लेकिन हमारे गाँव में स्कूल नहीं है" - तो यह सिर्फ़ एक बच्चे की आवाज़ नहीं, बल्कि देश के लाखों ग्रामीण बच्चों की पीड़ा है।
किसी को 10 किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते स्कूल जाना पड़ता है, किसी के गाँव में स्कूल ही नहीं है, कहीं बिजली नहीं है, कहीं शिक्षक नहीं हैं। फिर भी मंचों से "विश्वगुरु" और "विकसित भारत" के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।
अगर बच्चों को शिक्षा पाने के लिए सुरक्षा, सड़क, स्कूल और बुनियादी सुविधाओं की भीख माँगनी पड़े, तो यह किसी भी लोकतंत्र के लिए गंभीर सवाल है।
सरकार को नारों से नहीं, स्कूलों से जवाब देना होगा। क्योंकि देश का भविष्य भाषणों से नहीं, कक्षाओं से बनता है।
हर बच्चे को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना कोई कृपा नहीं, उसका संवैधानिक अधिकार है।
सोनम वांगचुक जी के समर्थन में आए फिल्मी दुनिया के जाने माने अभिनेता सयाजी सिन्दे उन्होंने कहा👇
शांतिपूर्ण मार्ग से भी क्रांति लाई जा सकती है, यह एक बार फिर सिद्ध हो रहा है। उपवास कमजोरी की निशानी नहीं, बल्कि अपनी भूमिका पर दृढ़ विश्वास की भाषा है। जो खुद के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति के लिए, हिमालय के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपवास करते हैं, उन��ी आवाज सुनी जानी चाहिए। सोनम वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन को मेरा मन से पूरा समर्थन।
Sonakshi Sinha:
“मैंने पहले कभी कोई बयान नहीं दिया, लेकिन अब मैं चुप नहीं रह सकती। सोनम जैसी जानी-मानी हस्ती छात्रों के लिए 18 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और सब चुप हैं।
अब मैं आवाज़ उठाऊंगी; अगर हम बोलते हैं तो हम देश-विरोधी नहीं हो जाते, हमारी भी आवाज़ सुनी जानी चाहिए। मैं डरती नहीं हूं, जो होगा देखा जाएगा।
सरकार को सोनम सर से बात करनी चाहिए।”
कावड़िये ठाकुर योगी आदित्यनाथ मंत्र का उच्चारण कर रहे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांवड़ियों का तांडव शुरू।
रामराज्य में अम��तकाल चल रहा है।
ये गुंडे उपद्रवी हत्या भी कर सकते हैं यूपी में कानून से ऊपर हैं इनके ऊपर पुलिस वाले हेलीकॉप्टर से फूल वर्षा भी करेंगे।
दलितों को बेरहमी से पीटने वाले पुलिसवाले इन लोगों को हाथ लगाकर दिखाएं, बोलो SSP अविनाश पांडे है हिम्मत इन लोगों पर कार्यवाही करने की 🔥🔥
शांतिपूर्ण आंदोलन को उन्माद बताते हैं और तांडव करने वाले को श���ंतिपूर्ण, शर्मनाक स्थिति है लॉ एंड ऑर्डर की।
मध्य प्रदेश के छतरपुर में आदिवासी अपने अधिकारों के लिए चिता पर लेटकर 'जल-सत्याग्रह' कर रहे हैं, लेकिन BJP सरकार को उनकी चीखें सुनाई नहीं दे रहीं
'केन-बेतवा परियोजना' के नाम पर आदिवासियों की ज़मीन छीनना, घर उजाड़ना और उनकी आवाज़ अन्याय है
इसे विकास का फ़र्ज़ी नाम देना पाप है
कितना दर्द होगा उस इंसान के भीतर, जो अपने लिए नहीं, बल्कि इस देश के बच्चों के भविष्य के लिए भूखा बैठा हो।
शिक्षा केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि हर इंसान का सबसे बड़ा अधिकार है।
सबसे अधिक ज़रूरत उसकी उस बच्चे को है, जो गरीबी, वंचना और सामाजिक भेदभाव के बीच जन्म लेता है। क्योंकि शिक्षा ही वह रास्ता है, जिसके सहारे वह अपने जीवन की दिशा बदल सकता है। शिक्षा केवल रोज़गार नहीं देती, बल्कि सोचने की क्षमता, आत्मसम्मान और एक बेहतर इंसान बनने की समझ भी देती है।
जब किसी देश में सरकारी स्कूल लगातार बंद होने लगें, विश्वविद्यालयों पर बुलडोज़र चलने की ख़बरें आएँ, परीक्षाएँ बार-बार पेपर लीक से प्रभावित हों और लाखों युवाओं का भविष्य अनिश्चितता में झूलता रहे, तब यह केवल छात्रों की समस्या नहीं रह जाती। यह पूरे समाज और राष्ट्र की चिंता का विषय बन जाती है। ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा और भविष्य के लिए अपनी सेहत दाँव पर लगा देता है, तो यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक संवेदनाओं की परीक्षा भी है।
आज ज़रूरत किसी एक व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने की नहीं है। ज़रूरत उस विचार के साथ खड़े होने की है कि इस देश के हर बच्चे को ऐसी शिक्षा मिले जो सुलभ हो, गुणवत्तापूर्ण हो, ईमानदार व्यवस्था पर आधारित हो और उसके सपनों को सुरक्षित रख सके।
किसी भी राष्ट्र का भविष्य संसद की ऊँची इमारतों में नहीं, बल्कि उसके स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लिखा जाता है। यदि हम शिक्षा को नहीं बचाएँगे, तो आने वाली पीढ़ियों से एक बेहतर भारत का सपना भी उनसे छीन लेंगे।
युवाओं की आवाज़ को दबाने नहीं, सुनने की ज़रूरत है।
जंतर-मंतर पर सपा सांसद @dimpleyadav जी ने शिक्षा व्यवस्था, पारदर्शी भर्ती और युवाओं के भविष्य के सवालों को मजबूती से उठाया। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग का समर्थन करते हुए 20 जुलाई के संसद मार्च में युवाओं से बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया। यह सिर्फ़ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, अधिकार और सम्मान की लड़ाई को लोकतांत्रिक तरीके से बुलंद करने की अपील है।
मुग़ल बादशाह भारत को लूटने नही शासन करने आए थे.
भारत का एक रुपया भी बुखार या समरकंद नही गया.
Babur की मृत्यु आगरा में हुई. बाद में अवशेषों को काबुल में दफन किया गया. मुग़ल साम्राज्य में अफगानिस्तान भारत का अभिन्न अंग था.
Humayun की म���त्यु दिल्ली में हुई.
Akbar की मौत आगरा में हुई.
Jahangir कश्मीर के राजौरी में मरे, दफन लाहौर में किया गया.
Shahjahan की मौत आगरा किले में हुई. ताजमहल के तहखाने में दफन किया गया.
Aurangzeb की मौत महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुई, आज नाम अहिल्याबाई नगर है.
अनुपम खेर बताना चाहिए मुग़लों ने जो खजाना लुटा वो कहां लेकर गए. अगर अनुपम खेर का जन्म ��ुग़ल काल में हुआ तो अनुपम खेर अकबर के दरबार में मंत्री होते, बादशाह जिंदाबाद के नारे लगा रहे होते.
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में सरकारी स्कूल की छत भरभरा कर गिर पड़ी.
अच्छी बात है कि इस स्कूल में किसी BJP नेता, मंत्री या अधिकारी के बच्चे नहीं पढ़ते.
बाकी जनता को देशहित में थोड़ी कुर्बानी देनी होगी, ये तो उनका फर्ज है.