We respectfully urge the authorities to restore the earlier result of Assistant Professor Advertisement No. 51. (April 16-17, 2025).Thousands of deserving candidates are looking forward to a fair decision. #Assistant_Professor_Advt51_Old_Exam@RahulGandhi@myogiadityanath
सहायक आचार्य विज्ञापन संख्या 51 (अप्रैल 16-17, 2025) के अभ्यर्थी केवल न्याय की अपेक्षा रखते हैं।
पूर्व परिणाम को बहाल कर चयन प्रक्रिया में विश्वास बनाए रखा जाए।
We respectfully urge the authorities to restore the earlier result of Assistant Professor Advertisement No. 51. (April 16-17, 2025)
Thousands of deserving candidates are looking forward to a true and fair decision. @PMOIndia@upesscprayagraj@myogiadityanath
We respectfully urge the authorities to restore the earlier result of Assistant Professor Advertisement No. 51. (April 16-17, 2025)
Thousands of deserving candidates are looking forward to a fair and just decision.@PMOIndia@upesscprayagraj@myogiadityanath
माननीय मुख्यमंत्री जी एवं उच्च शिक्षा विभाग से विनम्र अनुरोध है ��ि सहायक आचार्य विज्ञापन संख्या 51(अप्रैल 16-17,2025 )का पूर्व परिणाम पुनः बहाल किया जाए।
हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य एवं न्यायसंगत चयन प्रक्रिया की रक्षा की जाए @UPGovt @upesscprayagraj @RahulGandhi @ravish_journo
माननीय ��ुख्यमंत्री जी एवं उच्च शिक्षा विभाग से विनम्र अनुरोध है कि सहायक आचार्य विज्ञापन संख्या 51(अप्रैल 16-17,2025 )का पूर्व परिणाम पुनः बहाल किया जाए।
हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य एवं न्यायसंगत चयन प्रक्रिया की रक्षा की जाए @UPGovt @upesscprayagraj @RahulGandhi @ravish_journo
माननीय मुख्यमंत्री जी एवं उच्च शिक्षा विभाग से विनम्र अनुरोध है कि सहायक आचार्य विज्ञापन संख्या 51(अप्रैल 16-17,2025 )का पूर्व परिणाम पुनः बहाल किया जाए।
हजारों अ���्यर्थियों के भविष्य एवं न्यायसंगत चयन प्रक्रिया की रक्षा की जाए @UPGovt @upesscprayagraj @RahulGandhi @ravish_journo
जिस घपले-घोटाले की सज़ा शिक्षामंत्री को मिलनी चाहिए उसकी सज़ा शिक्षक को क्यों दी जा रही है।
भाजपा अपनी कमियों, कमज़ोरियों और भ्रष्टाचार के लिए हमेशा ही किसी और को निशाना बनाती है। कभी ‘दानाजीवी’ तथाकथित पत्रकारों से मीडियाबाज़ी करवाकर शिक्षा से जुड़े यूट्यूबर्स पर बेबुनियाद आरोप लगवाती है और कभी उनके शैक्षिक संस्थान बंद करवाती है। इसके लिए भाजपा संस्थान ���े भवनों के अवैध निर्माण का बहाना बनाती है। अगर कोई अवैध निर्माण हुआ है तो हम ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण’ के उन सभी अधिकारियों के निलंबन और उनसे वसूली की माँग करते हैं, जिनके समय में ये निर्माण हुआ या फिर जिन्होंने आज तक उस पर आपत्ति नहीं की। 24 घंटे में इस कार्रवाई की रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।
भाजपा शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों की विरोधी है। देश के इतिहास में अब ये पहली बार होगा कि शिक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जाएगा। प्राइमरी के सरकारी स्कूलों को बंद करने; यूनिफ़ॉर्म, स्टेशनरी, मिड-डे मील जैसे घोटालों से लेकर कॉपी की हेराफेरी व भ्रष्ट-मूल्यांकन, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण की हक़मारी, हर संभव परीक्षा धांधली, रिजल्ट में बेईमानी व कोर्ट में परिणाम फँसाने की भाजपाई चालबाज़ी जैसे विषयों पर चुनाव होगा और जनता भाजपा को हमेशा के लिए बाहर कर देगी।
सरकारी परीक्षाओं में अव्यवस्था अब खबर नहीं,
लगभग routine ही बनती जा रही है।
Video में seriousness देखिए !
Exam hall के अंदर खुलेआम mobile लेकर paper दिया जा रहा है।
अब इस पर क्या ही कहा जाए?
यहां स��धे-सीधे exam centres की व्यवस्था,
निगरानी, और जिम्मेदार लोगों की संवेदनशीलता पर सवाल उठते हैं।
लेकिन शायद उन्हें भी पता है कि
ना कोई बड़ी कार्रवाई होनी है,
ना blacklist होना है..........
अगली बार फिर Centre मिल ही जाएगा।
फिर अंत में वही statement जारी होगा
परीक्षा पूर्ण पारदर्शिता और सुचारु रूप से सम्पन्न हुई।
इतनी “पारदर्शिता” कि आराम से mobile से answer check करके exam दिया जा सके।
सबसे दुखद बात यही है कि
अब लाखों मेहनती छात्रों ���ा भरोसा टूटना भी system को गंभीर समस्या नहीं लगता।
Launching a campaign demanding the resignation of Education Minister Dharmendra Pradhan.
Please sign the petition:
https://t.co/WQ6MbRPTnK
#EduMinisterMustResign
@myogioffice@rashtrapatibhvn@htTweets@AmarUjalaNews@ravish_journo@yadavakhilesh@YogendraUpadhy@DainikBhaskar@JagranNews खुला पत्र
सेवा में,
माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश महोदय,
माननीय भारत के राष्ट्रपति महोदया,
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार,
विषय: उत्तर प्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा ��े संबंध में याचिका संख्या 368/2026 में माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का पालन करने हेतु।
महोदय
मैं यह पत्र केवल एक अभ्यर्थी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे नागरिक के रूप में लिख रही हूँ जिसे आज भी भारतीय संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता, न्याय और समानता पर विश्वास है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा 16/17 अप्रैल 2025 में सम्पन्न हुई असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का 7 जनवरी 2026 ��ो रद्द किया जाना ,वो भी सितंबर 2025 में 2 चरणों में साक्षात्कार की तिथियां घोषित करने के 4 महीने बाद, हजारों ईमानदार और मेहनती अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत पीड़ादायक सिद्ध हुआ है। अभ्यर्थियों ने 2022 से 2025 तक कठिन परिश्रम किया, आर्थिक और मानसिक संघर्ष झेले, पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी तैयारी जारी रखी और अ��ने भविष्य को इस भर्ती प्रक्रिया से जोड़ा।
कोई भी जागरूक नागरिक पेपर लीक, भ्रष्टाचार या अनुचित साधनों का समर्थन नहीं करता। यदि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए। परंतु न्याय का मूल सिद्धांत यह कहता है कि दंड व्यक्तिगत अपराध के आधार पर होना चाहिए, न कि सामूहिक रूप से निर्दोष लोगों पर थोपा जाए। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में यह स्पष्ट है कि पूरी परीक्षा ( जिसमें 33 विषय शामिल हैं) को सिर्फ 19 लोगो के ऊपर संदेह होने के चलते रद्द किया गया, वो भी 9 महीने बाद।
यदि कुछ व्यक्तियों पर संदेह या आरोप हैं, तो कार्रवाई उन्हीं तक सीमित रहनी चाहिए जिनके विरुद्ध ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध हों। हजारों मेहनती युवाओं के सपनों और वर्षों की मेहनत को बिना व्यापक और निर्णायक प्रमाण के समाप्त कर देना न्याय, समानता और संवैधानिक मर्या��ाओं के विरुद्ध ��्रतीत होता है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक निर्णयों में “प्रोपोर्शनट एक्शन” अर्थात “अनुपातिक कार्रवाई” के सिद्धांत पर बल दिया है, जिसके अनुसार दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों में अंतर करना आवश्यक है। सामूहिक दंड किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का पहला विकल्प नहीं होना चाहिए।
आज अनेक अभ्यर्थी मानसिक तनाव, सामाजिक अपमान और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। कई अभ्यर्थी आयु सीमा पार कर चुके हैं। अनेक महिलाओं एवं आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों ने इस भर्ती के कारण अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय टाल दिए। इस प्रकार की अनिश्चितता उनके जीवन पर स्थायी प्रभाव डाल रही है।
यह केवल एक परीक्षा का प्रश्न नहीं है; यह देश के युवाओं के उस विश्वास का प्रश्न है जो वे सार्वजनिक संस्थाओं और मेरिट प्रणाली पर रखते हैं। यदि ईमानदार अभ्यर्थियों को भी बिना दोष सिद्ध हुए दंडित किया जाएगा, तो ���ुवाओं का विश्वास व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है।
अतः इस खुले पत्र के माध्यम से मेरा वि��म्र निवेदन है कि—
1. निर्दोष एवं ईमानदार अभ्यर्थियों को सामूहिक दंड से बचाया जाए।
2. किसी भी परीक्षा रद्दीकरण अथवा कठोर प्रशासनिक कार्रवाई से पूर्व निष्पक्ष, पारदर्शी एवं साक्ष्य-आधारित परीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
3. जांच एजेंसियां न्यायालय एवं जनता के समक्ष ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करें, केवल सामान्य आरोपों या धारणाओं के आधार पर कार्रवाई न हो।
4. दोषियों को दंडित करते समय नि��्दोष अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों और भविष्य की रक्षा की जाए।
5. भविष्य में उत्तर प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने हेतु ठोस सुधार लागू किए जाएं।
मुझे आशा है कि देश की संवैधानिक संस्थाएं और उत्तर प्रदेश सरकार इस विषय को केवल प्रशासनिक मुद्दा न मानकर लाखों युवाओं के भविष्य और न्याय की भावना से जोड़कर देखेंगी।
इतिहास उन संस्थाओं को सम्मान देता है जो शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि निर्दोषों की रक्षा करते हुए न्याय सुनिश्चित करती हैं।
सादर,
समस्त चयनित अभ्यर्थी
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा,2022 (16-17अप्रैल, 2025)
Respectfully request Uttar Pradesh Education Service Selection Commission to conduct the interview process for UPHESC Advt. 51 Assistant Professor in a fair, transparent and timely manner in compliance with the recent judgment of the Hon’ble Allahabad High Court (Special Appeal No. 368/2026).
Eligible candidates are eagerly awaiting implementation of the judgment in the interest of justice and administrative fairness.
We all will be highly obliged.
@PrashantK_IPS90@upesscprayagraj