साथियों,
शिक्षा विभाग ने शैक्षिक चिन्तन के अन्तर्गत विचार आमन्त्रित किये थे मैंने भी अपने कुछ विचार शब्द बद्ध किये थे जिनको विभाग ने सितम्बर 2020 की शिविरा में पृष्ठ 16 व 17 पर स्थान दिया है यदि आप अवलोकन का समय निकालकर इसमें रही कमियों से अवगत करा सकें तो आशीर्वाद समझूंगा |
21-22 की प्रिन्सिपल DPC अभी तक नहीं हुई है। जिस से राजस्थान के 2300 से अधिक विद्यालयों में प्रिन्सिपल के पद ख़ाली पड़े है। ये DPC 1/4/21 को होनी थी। बीकानेर निदेशालय किसी एक संगठन के दबाव में है !3
@QamarAnchor@RajCMO@DrBDKallaINC
डिग्गी कल्याण धणी के आशीर्वाद से और दादा-दादी एवं आप सम्मानीयो के आशीर्वाद से लोक सेवा के लिए दूसरी पीढी तैयार। बेटी अल्का सिंह ने पुलिस उप निरीक्षक के बाद आर ए एस में सामान्य मेरिट में 291 वां स्थान पहले प्रयास में ही प्राप्त किया। शाबाश बेटी- keep it up.
दादा- दादी का आशीर्वाद
डिग्गी कल्याण धणी के आशीर्वाद से और दादा-दादी एवं आप सम्मानीयो के आशीर्वाद से लोक सेवा के लिए दूसरी पीढी तैयार। बेटी अल्का सिंह ने पुलिस उप निरीक्षक के बाद आर ए एस में सामान्य मेरिट में 291 वां स्थान पहले प्रयास में ही प्राप्त किया। शाबाश बेटी- keep it up.
दादा- दादी का आशीर्वाद
आज लम्बे समय बाद मैं ट्विटर पर फिर से उपस्थित हूं। मेरा अकाउंट काफी लम्बे समय से सस्पेंड चल रहा था। आज बहाल हुआ है। अब पुनः आप सभी सम्मानीयो से विचारों का आदान प्रदान संभव हो पायेगा। आप सबका पुनः स्वागत है।
@Aakansha_India@AwanishSharan@ankidurg I am sorry to say that the decision is not in favor of the students serious for the study. It is in favor of time pass students. Circumstances are changing speedily. Last year examinations held in the last of June and I st of July. So it was not impossible to take examinations.
कोई कोरोना संक्रमण के लिए शिक्षक को जिम्मेदार ठहरा देता है; कोई कोरोना गाइड लाइन के विपरीत 6 बजे तक कार्यालय में उपस्थित रहने को मजबूर करता है; कोई रोजाना मीटिंग करने पर विवश करता है; कोई बार बार सर्वे के लिए लोगों से सम्पर्क के लिए विवश करता है वो भी बिना किसी सुरक्षा के,क्यों ?
कोई कोरोना संक्रमण के लिए शिक्षक को जिम्मेदार ठहरा देता है; कोई कोरोना गाइड लाइन के विपरीत 6 बजे तक कार्यालय में उपस्थित रहने को मजबूर करता है; कोई रोजाना मीटिंग करने पर विवश करता है; कोई बार बार सर्वे के लिए लोगों से सम्पर्क के लिए विवश करता है वो भी बिना किसी सुरक्षा के,क्यों ?
शिक्षकों पर नित नए मनमाने आदेश थोपे जा रहे हैं पर सुविधा और सुरक्षा के नाम पर भूल जाते हैं कि शिक्षक भी इन्सान है फील्ड में सबसे अधिक खतरनाक कार्यों को करने के बावजूद कोरोना वाॅरियर नहीं माना; अपने जिम्मे से इतर कार्य करने के बावजूद कार्य को महत्व नहीं दिया जाता; क्यों ? कब तक ?
शिक्षकों पर नित नए मनमाने आदेश थोपे जा रहे हैं पर सुविधा और सुरक्षा के नाम पर भूल जाते हैं कि शिक्षक भी इन्सान है फील्ड में सबसे अधिक खतरनाक कार्यों को करने के बावजूद कोरोना वाॅरियर नहीं माना; अपने जिम्मे से इतर कार्य करने के बावजूद कार्य को महत्व नहीं दिया जाता; क्यों ? कब तक ?