#FCRA: सरकार टक्कर के मूड में नहीं है।
1. ईसाई (Christian) समुदाय के लोगों से बात करके ही बिल लाया जाएगा। सरकार को नॉर्थ ईस्ट और गोवा की चिंता है। किसी भी सूरत में ऐसा माहौल नहीं बनना चाहिए जिसमें देश के दो अल्पसंख्यक समुदाय नाराज़ दिखे। हर बैठक में होम सेक्रेटरी भी मौजूद रहे और आगे भी रहेंगे। ईसाई समुदाय की बैठक सीधे गृह मंत्री के लेवल पर ही हो रही है। इन सबको 12 तारीख बताई गई है। ज्यादातर ईसाई संगठन बिल को वापस लेने के पक्ष में हैं। सरकार बिल लाएगी लेकिन सबको साथ लेकर चलने की ही कोशिश है।
2. टॉप लेवल की मीटिंग में ईसाई समुदाय के धर्मगुरुओं, प्रबुद्ध लोगों और नेताओं को यही बताया गया कि इस बिल की ज़्यादातर बातें पुरानी ही है। यही बिल सोनिया गांधी आज से 16 साल पहले लाने वाली थीं।
3. ईसाई समुदाय के बीच वही अफवाह फैला दी गई है जो मुस्लिम समुदाय में फैलाई गई थी।
अफवाह: सरकार चर्च पर कब्जा कर लेगी। विदेश से पैसा नहीं आएगा...दान नहीं मिलेगा तो चर्च का खर्च कैसे चलेगा?
सच्चाई: दुनिया बदली हुई है। अब विदेश से आए चंदे और दान का पांचवां हिस्सा भी ईसाई कम्युनिटी के खाते में नहीं जाता है। पांचवें हिस्से से भी कम चर्च और कॉन्वेंट के पास पहुंचता है। मेन पैसा तो कहीं और जा रहा है। सरकार उसी पर नज़र रखना चाहती है।
#6August : शाम 5 बजे के बाद :
1. सरकार डिलिमिटेशन बिल लाने का मन बना चुकी है। आज सुबह गिनती पूरी हो गई। 360 से ज्यादा सांसद साथ में आ चुके हैं। डीएमके वाली बात गलत फैलाई जा रही है
2. सरकार की तरफ से एक बार फिर राहुल गांधी से बात की गई है। किरेन रिजीजू ने राहुल गांधी को फोन किया था। राहुल ना "हां" बोले ना ही "ना"। राहुल ने कहा "अलायंस के बाकी लोगों से बात करके बताएंगे"
3. अमित शाह सदन में आकर अपनी बात कहने के लिए तैयार हैं। एक राउंड बातचीत हो भी गई थी। आज डेडलॉक ब्रेक होने ही वाला था। लेकिन फिर वही हुआ जो बार-बार होता है। अमित शाह के पोस्टर वाली तख्तियां आ गई। सरकार का मानना है कि देश जंतर-मंतर से आगे बढ़ गया है। अब विपक्ष भी जंतर-मंतर से आगे बढ़े।
4. सरकार के टॉप लेवल पर ये राय बन चुकी है कि डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण के संशोधित बिल पर अगर कांग्रेस साथ आ जाए तो अच्छा वरना बिल तो लाएंगे।
उमाशंकर सिंह की यह खासियत !
यूपी विधानसभा चुनाव चुनाव से पहले उमाशंकर सिंह का निधन बसपा के लिए सबसे बड़ा झटका है!
उमाशंकर सिंह का राजनीतिक प्रभाव सिर्फ बलिया तक नही था।पूर्वांचल की कई सीटों पर था ,प्रदेश में बसपा की मजबूती के लिए हमेसा मायावती के साथ खड़े रहे।
बीएसपी के टिकट पर 2012 में पहली बार चुनाव जीता था।उनके रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है 2017 में बीजेपी की लहर में भी वह रसड़ा से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुचे ,2022 में बीएसपी के इकलौते विधायक थे ,जो विधानसभा में पहुचे थे।
बसपा के कमजोर होने के बाद लोग बसपा को छोड़ कर दूसरी पार्टियो में जाने लगे।मगर उमाशंकर सिंह राजनीति की शुरुआत से अंत तक सदन में बीएसपी की आवाज बने रहे।
अमितशाह जी कल लोकसभा में FCRA बिल रखेंगे । क्रिश्चियन मिशनरीज और उनके पालतू कुत्ते जो NGO के माध्यम से देश में धर्मांतरण कीवैश्यावृत्ति कर रहे थे वे बेचैन हैं । और विदेशी ताकतों के दलाल पार्टियां हंगामा कर रही है । जब अमेरिका का विदेश मंत्री कलकत्ता जाकर मदर टेरेसा के आश्रम गया था तभी पता चल गया था कि क्रिश्चियन लॉबी भारत की सरकार के खिलाफ खड़ी हो साजिश कर रही है । देश हिट में इस कानून का हिंदू स्वागत करें । अमितशाह और नरेंद्र मोदी आपके आनेवाली पीढ़ियों को सुरक्षित कर रहें हैं । नेहरू खानदान ने देश बेचा है सिर्फ ।
#Meta पर मोदी के मंत्री आज भारी पड़े। @AshwiniVaishnaw पूरी तैयारी करके आए थे। रेल भवन में ये मीटिंग बुलाई गई थी। I मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर Joe Kaplan को सॉरी कहना पड़ा। मेटा ने कहा " प्रधानमंत्री मोदी के पोस्ट को रोकने के लिए माफी मांगते हैं"। Joe Kaplan की Exact लाइन : " I apologise to the minister on behalf of Meta for the error restricting PM Modi’s post ". अभी माफी पर मुद्दा खत्म नहीं हुआ है। इस बार 'सीधा" किया जाएगा। 24 घंटे बाद फिर बुलाया गया है।
देहरादून से बहुत बड़ी खबर!
मुस्लिम लड़कों की गैंग ने राहुल, पवन और मिशेल ने बनकर देहरादून में सोशल मीडिया पर 10+ हिंदू लड़कियों से दोस्ती की।
उन्होंने लड़कियों को नौकरी और मॉडलिंग के ऑफर का लालच दिया, फिर उन्हें ड्रग दिया, रेप किया और उनका वीडियो बनाया, और पीड़ितों को एस्कॉर्ट का काम करने के लिए मजबूर किया।
फरहान की मां और बेगम भी इसमें शामिल थीं, जो घर पर लड्डू गोपाल की मूर्ति रखकर हिंदू बनकर घूम रही थीं।
बजरंग दल ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया
ब्रेकिंगः #PM ने नए #NDA सांसदों से की बातचीत
“दिल्ली ख़तरनाक जगह है” - PM
“लटियन ज़ोन में संभल कर रहें” - PM
“मकडजाल से बच कर रहें” - PM
“किस से मिल रहे हैं, कहाँ मिल रहे हैं, इसका ध्यान रखें” - PM
PM राज्यसभा में आए 36 नए सांसदों से मिले!”
>His name is Abhinav.
>He went on a trip to Bali and a beautiful German girl named Safira instantly fell for his natural charm.
>He didn't have to fund expensive cafe dates or deal with any unnecessary attitude.
>She didn't ask for his bank balance or salary package; she just loved him and invited him straight to Germany.
>Now he is living his best life in a gorgeous wooden house hand-built by her father.
>He is exploring underground natural fridges and enjoying the ultimate European village vibe.
>Indian girls with a 10-page list of unrealistic demands are watching his vlogs and fuming in jealousy.
>He completely bypassed all the dating drama and secured a massive international win for the boys.
Why tolerate the delusional standards of modern Indian girls when an international flight ticket is literally cheaper?
This Indian YouTuber Paramvir was travelling in Africa. While he was in a restaurant, a group of women started flirting with him, asking for his number, saying "I love you," calling him daddy, and making videos while flexing that he was their boyfriend. They even offered to pay for his meal.
They were arguing among themselves over who would get his contact.
Even in India, these African women do the same. They come here for studies, date Indian men, and later go back to Africa and marry an innocent African guy.
I heard it's the same in Western countries.
इस मुलाकात में बांकीपुर पर क्यों बात होगी ? खुद सोचिए ।बांकीपुर तो फैसला सुना चुका है । फैसला #samrat पर होना है । बीजेपी पटना में किसी और को ‘चौधरी’ बनाने के मूड में है…देखिए आगे क्या होता है …लिस्ट में भूमिहार लीडर हैं लेकिन मौका पिछड़े लीडर को ही मिलेगा
एक कोई मुकुल अग्रवाल है , मोदी के साथ DP लगाए हुए। UGC के टाइम बोल रहा था कि हमलोगों को ब्राह्मणों के वोटों का अल्टरनेटिव ढूँढना चाहिए। ये लोग छोटा-मोटा बात पर प्रोटेस्ट करने लगता है।
समय आ गया है, नितिन नबीन को इसे अपना मुख्य सलाहकार बना लेना चाहिए। यहीं ढूंढकर लाएगा अल्टरनेटिव वोट।
अगर मुकुल को जरूरत पड़े तो अपना मुख्य सलाहकार नागfunny कुशवाहा को बना सकता है।
कांग्रेस ने 2018 में कमलनाथ को पार्टी अध्यक्ष बना कर जो गलत फैसला लिया था वह 2023 में वापस लिया।
कमलनाथ ने तब भी उसे स्वीकार नहीं किया।
और अपने बेटे सहित भाजपा में जाना चाहा।
मगर कांग्रेस दबाव में नहीं आई और नेतृत्व नेक्स्ट जेनरेशन के जीतू पटवारी को सौंप दिया।
नतीजा सामने है।
दतिया के विधानसभा उपचुनाव के बहुत फैक्टर हैं।
मगर कोई प्रदेश अध्यक्ष पूरे चुनाव में उस कांस्टेंसी में जाकर जम जाए और मतदान वाले दिन भी जब बाहरी लोगों को क्षेत्र से बाहर किया जाता है तो जाकर पास के सीमावर्ती जिले में बैठ जाए तो सबसे बड़ा फैक्टर वही होता है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और वे दोनों 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद साथ-साथ ही बने थे।
एक पर्ची से और एक सोच समझकर देखभाल कर।
मोहन यादव को लगातार उनके पार्टी के दूसरे नेताओं से चुनौतियां मिल रही हैं। विधानसभा का दूसरा उपचुनाव हारे हैं। उनके बनने के बाद तीन हुए।
जिनमें एक बुधनी का था। शिवराज सिंह चौहान को अचानक हटाने के बाद उनके विधानसभा क्षेत्र का जहां से उनसे इस्तीफा करवा दिया गया था।
वह तो शिवराज ने जीता दिया।
मगर बाकी दो एक विजयपुर का और दूसरा यह दतिया का मोहन यादव हारे।
और दूसरे शब्दों में जीतू पटवारी जीते।
राहुल और के सी वेणुगोपाल की पर्सनल पसंद हैं।
कोई बुराई नहीं है।
नेतृत्व अगर अपनी पसंद के नेताओं को राज्य सौंपता है और पूरी पावर देता है जैसा की मध्य प्रदेश में जीतू को दी तो फर्क आता है।
दतिया की जीत के बाद कांग्रेस को हर राज्य में अपनी हिचक समाप्त करना चाहिए और मजबूत मगर पार्टी के प्रति हर हाल में वफादार व्यक्ति को प्रदेश नेतृत्व सौंपना चाहिए।
जीत बहुत मायने रखती है। एक दिन में पर्सेप्शन बदल जाता है।
सात राज्यों के विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों में होने वाले हैं।
अभी से तैयारी और पूरी ताकत लगा दें तो नतीजे दतिया जैसे मिल सकते हैं।
वैसे हमने मजाक - मजाक में कह दिया कि नरोत्तम मिश्रा भी चाहते थे कि दतिया में BJP हार जाए लेकिन एक बात समझ लीजिए, BJP ने अपना पूरा संगठन, मशीनरी और पैसा लगा दिया था, नरोत्तम मिश्रा की भी खुलकर सामने आने की हिम्मत नहीं थी।
कांग्रेस की जीत घनश्याम सिंह की अपनी छवि, जीतू पटवारी की मेहनत और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जीत है, इसमें नरोत्तम मिश्र का कोई रोल नहीं है।
अगर नरोत्तम मिश्रा ख़ुद भी लड़ जाते तब भी कांग्रेस दतिया जीत जाती।
प्रशांत किशोर चाहते तो वे सालों पहले राज्य सभा जा सकते थे. ममता बनर्जी से लेकर स्टालिन तक का ऑफ़र उनके पास था. पर वे बीते चार सालों से बिहार में डटे हुए हैं. विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी संघर्ष जारी रहा. बांकीपुर में PK का कोई वोट नहीं था. पर सबने मिल कर उन्हें विजयी बनाया
मिनाक्षी कुमारी जो गाजियाबाद से गोरखपुर के लिए ट्रेन में सफ़र कर रही थी। एक लड़का इन्हें घूर रहा था।
और परेशान कर रहा था। फिर मिनाक्षी ने चैन पुल्लिंग करके गाड़ी रोकवा दी अपनी मदद के लिए।
अब जरा सोचिए हमारे देश कि हालत क्या हो गई है। एक लड़की अकेले ट्रेन में सफ़र नहीं कर सकती हैं।
आखिर ट्रेन में लोग अपने आप को कब सेफ समझेंगे
सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद विजय सिन्हा का क़द घटा दिया गया, डिप्टी CM से मंत्री बना दिए गए। दीपक कुशवाहा को मंत्री बनाए रखने के लिए देवेश कुमार से MLC पद छीन लिया गया।
बिहार में भाजपा की कुश-केंद्रित राजनीति ने सामान्य वर्ग के बीच नकारात्मक माहौल तैयार किया है। UGC और भरत तिवारी हत्याकांड तो इसकी सतह भर थे।
नीतीश कुमार का मामला अलग था। उन्होंने भी जाति वाली रैली से अपनी लालू विरोधी राजनीति का आग़ाज़ किया था, लेकिन 'लव' ने पढ़ाई-लिखाई और सरकारी नौकरियों पर अधिक ध्यान दिया। अब मामला अलग है, लालू राज वाला माहौल बन रहा है। लाठी से मजबूती का प्रदर्शन जब सत्ताधीश की जाति के लोग करने लगते हैं, तो बाक़ी जातियाँ असहज महसूस करती हैं, उन्हें असुरक्षा की भावना का जन्म होता है।
बाँकीपुर में जो हुआ, उसके अगर कारण यही हैं तो उनकी पुष्टि आगे ज़रूर होगी। फ़िलहाल इसे ट्रेंड नहीं माना जा सकता, जबतक आगे ये दोहराया न जाए। भाजपा की मशीनरी गहन आत्ममंथन व कड़े फ़ैसलों के लिए जानी जाती है, विशेषकर जबतक अमित शाह संगठनात्मक रणनीतियों के केंद्र में हैं तबतक हर कमज़ोरी को मजबूती में बदले जाने की परंपरा जारी ही समझिए।
बाँकीपुर अपवाद है या नियम, इसे समझने के लिए प्रतीक्षा करनी होगी। बिहार चौंकाता है, कोई भी सत्य अंतिम मत मानिए।