अलग अलग जगहों से छात्र आंदोलन में पहुंच रहे हैं, छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता है।
जितने सत्ता पोषित लुटेरे सिस्टम में बैठे हैं उनको नींव हिलाने छात्र अब झारखंड पहुंच रहे हैं।
मेनस्ट्रीम मीडिया से भले ही मुद्दा गायब हो, लेकिन खुरप��च टीम छात्रों के लिए डटी रहेगी।
झारखंड युवा पेपर लीक को लेकर सड��कों पर हैं लेकिन सरकार चैन की बंसी बजा रही है।
मीडिया का दोगलापन देखिए,
झारखंड के युवाओं की आवाज उठाने वाला कोई नहीं है।
@arvindchotia Varify account k view bhadane k liye X aapke post aese logo ko show karta h jinko aapke post me koi intrest nhi ho
Bar bar aese post dekh kar irritation hoti
Jo log kevel apne intrest k post dekhna chahte h wo jabardasti thope gaye post ko block kar dete h
आज मैं सभी देशवासियों को मन में सोचकर ये शपथ लेता हूं कि,
अगर सांसद विधायकों का भत्ता, व���देश यात्रा, मोबाइल फंड, फ्री ट्रेन यात्रा, फ्री हवाई यात्रा बंद कर दिया जाएगा तो,
मैं अपनी कार पूरे एक साल के लिए घर में खड़ी कर दूंगा,
और घर में किसी प्रकार का कोई गोल्ड नहीं आएगा।
मेरा वचन ही है मेरा शासन...
हम दिनभर में कोई भी ची��� कंज्यूम करें या दिख जाए हमें उसमें इस्तेमाल हुए इंग्रेडिएंट्स और केमिकल्स को पढ़ना चाहिए ,
फिर तुरंत गूगल कीजिए, ये चेक करिए कि सेफ लिमिट्स क्या हैं? क्या FDA और यूरोपियन यूनियन ने उसे बैन कर दिया है? सेम ब्रांड के प्रोडक्ट्स जो भारत में बिक रहे हैं और विदेशों में बिक रहे उनमें कंपैरिजन करिए,पाल्म ऑयल, एडेड शुगर जैसी चीजों को तो तुरंत बंद करवाना है।
अगर आपको अपने माता पिता , बच्चों , पत्नी और आ��े वाली जनरेशन से सच में प���यार है तो इस मुहिम से जुड़िये, हमारी और आपकी मदद के लिए कोई नहीं आएगा , बस #SudharJaoFSSAI हैशटैग के साथ प्रोडक्ट की तस्वीर और उसमें इस्तेमाल हुए हार्मफुल इंग्रेडिएंट्स और केमिकल के बारे में बताते हुए बस एक ट्वीट कीजिए ,
फिर आप डर का माहौल देखेंगे, आपके फेवरेट एक्टर एक्ट्रेस सेलिब्रिटीज ऐसे प्रोडक्ट्स का ऐड करने से बचेंगे , @fssaiindia और सख्त होगा, देश में बीमारियां कम होंगी।
ये अभिनेता कितने बड़े अभिनेता होते हैं...
मुझे आज प्रत्यक्ष तौर पर पता चला। 3 दिन पहले क�� गई इस पोस्ट के लिए आज सुबह-सुबह एक मैसेज मिला कि हम अक्षय कुमार की टीम से हैं। आपसे बात करना चाहते हैं। फिर फोन आया। बताया गया कि अक्षय कुमार देवमाली गांव की बेटियों के लिए दिल से कुछ करना चाहते हैं।
उन्होंने पूरा का पूरा दोष गांव के सरपंच पर डाल दिया। कहा कि सरपंच की ओर से कोई ईमेल वगैरा नहीं आया जिससे अक्षय कुमार देवमाली गांव की बच्चियों के खातों में पैसा नहीं डाल पाए। अगर आपके पास कोई कांटेक्ट नंबर हो तो आप हमें उपलब्ध कराइए, हम बात करेंगे।
अब बताइए आप, मई 2024 में फिल्म जाॅली एलएलबी की शूटिंग हुई। इस दौरान अक्षय कुमार वहां पर कई दिन तक रुके। उनकी टीम भी कई दिन तक रुकी। क्या उन्होंने इतना बड़ा वादा करके किसी का भी कांटेक्ट नंबर नहीं लिया? क्या राजस्थान के सरपंचों के बारे में वह नहीं जानते कि वह कितना उनको ईमेल कर पाएंगे? कितना बड़ा कुतर्क दिया है अक्षय कुमार की टीम ने, मुझे सुनकर ही शर्म आने लगी।
अक्षय कुमार देश के समृद्धतम अभिनेताओं में से एक हैं। अगर सरपंच उनसे कांटेक्ट नहीं कर सके तो अक्षय कुमार के पास तो इतने संसाधन हैं ही कि वह किसी को भेज कर संपर्क कर सकते थे। वे राजस्थान सरकार से संपर्क कर सकते थे। स्वयं मुख्यमंत्री से संपर्क करके इस काम को कर सकते थे। लेकिन नहीं। उनका काम हो गया था। गांव के लोगों को एक भरोसा दे दिया और इस भरोसे में गांव वाले उनके आगे पीछे घूमते रहे। गांव वालों ने 300 बच्चियों के खाते खुलवा दिए और आज तक उनमें पैसा आने का इंतजार कर रहे हैं।
आदरणीय अक्षय कुमार जी, मैंने इसीलिए उसे दिन लिखा था कि आप यह नकली अभिनय छोड़िए और राजनीति के असली अभिनय में आइए। आप फिल्मों से भी बड़ी सफलता राजनीति में प्राप्त करेंगे। आप किसी से वादा करके 2 साल तक भूले रह सकते हैं और 2 साल बाद आपकी पोल खुलने पर आपके लोग उन्हें ही जिम्मेदार ठहरा सकते हैं जिनसे आपने वादा किया है तो आप एक सफल राजनेता होने के सारे गुण रखते हैं।
@akshaykumar
@Lap_surgeon Log andhvishwasi h
Aap to scientific temperament wale insaan ho doctor ho Aap ko kisne roka h aap bhi kar lo aese sonography kon rok raha h
अजीत भाई पिछले दो सालों में काफी कुछ बदला है ,
• फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर नौकरी पाने वालों की संख्या में गिरावट , क्योंकि कमीशनों ने फॉर्म भरने की प्रक्रिया को जटिल किया है, लेकिन अभी और सुधार बाकी हैं,
• आपके यहां इसको क्या कहते हैं, फर्जी मोटिवेशनल स्टोरीज, तजुर्बा एक्सपर्ट, गोंडा के बॉम्ब, ये सब रीलें और खबरों की संख्या में भारी गिरावट है,
• सरकारी नौकर और अधिकारी जो रीलें और यूट्यूब विडियोज बनाने के कार्यक्रम में व्यस्त रहते , अब इक्का दुक्का बचे हैं वो भी बंद होंगे ,
• कोचिंगों द्वारा किए जाने वाले भ्रामक प्रचारों की संख्या में गिरावट , हमने उसको काफी लंबे समय तक सोशल मीडिया और अन्य इंस्टीट्यूशनल माध्यमों से परसू किया,
•अभी हमारे पास ल���भग 50- 70 फर्जी सर्टिफिकेट वाले अधिकारियों की लिस्ट है , जिनके एक्सपोज के बाद फर्जी सर्टिफिकेट वाले मामले में भी हमें बहुत कुछ पॉजिटिव देखने को मिलेगा ,
• हाल में ही हुई MPLADS कैंपेन बहुत सफल रही ,सांसदों को MPLADS अपडेट करने के लिए मजबूर होना पड़ा और सरकार ने MPLADS में काफी बदलाव किए हैं,
• IAS अधिकारियों द्वारा धांधली करके जल शक्ति मंत्रालय से जो अवॉर्ड लिए गए ,उसकी कलई खुलते पूरे देश ने देखा , पिछले एक महीने से लगातार उस पोर्टल को अपडेट किया जा रहा है,
• पिछले दो सालों में कई बड़े और छोटे छोटे एक्सपोज में हमें सफलता मिली और ग्राउंड पर परिवर्तन देखने को मिला ,
इस वर्ष क्या क्या करना है
• इंश्योरेंस कंपनीज का तंत्रजाल
• कुछ बड़ी स्कीम्स जिनमें नीचे के कर्मचारी और अधिकारी धांधली कर रहे ,
• FSSAI संस्था , इसके अधिकारी , इनकी Modus operandi, फर्जी सिलेक्शन, फेवर्ड पॉलिसीज, फेवर्ड लाइसेंसिंग, जैसे गुजरा�� की एक कंपनी को इन्होंने गुड़ की प्रोसेसिंग में कैंसर करने वाली टेक्सटाइल डाई को यूज करने की परमिशन दी है, ऐसे तमाम मुद्दे,
• और भी तमाम चीजें देखने को मिलेंगी ,
हालांकि आपकी बात से सहमत हूं कि शत प्रतिशत सफलता नहीं मिली , लेकिन थोड़ा बहुत परिवर्तन देखने को मिला है और वही परिवर्तन हमारे लिए मोटिवेशन का काम करता है, हम इसी प्रकार काम करते रहेंगे , समय समय पर आप सभी के सहयोग के लिए तहे दिल से धन्यव��द।
आपका नाम रवीश कुमार है। आप पत्रकार हैं, लेकिन आपको देखकर कई बार लगता है कि सवाल पूछने से ज़्यादा आप कहानी सुनाने में लगे रहते हैं , जहाँ फैसला पहले तय ह��ता है और तथ्य बाद में उसी हिसाब से फिट किए जाते हैं।
सत्ता से सवाल उठाना ज़रूरी है , इसमें कोई शक नहीं।
लेकिन आपके सवाल अक्सर एकतरफ़ा क्यों हो जाते हैं?
एक सरकार की हर गलती आपको देश का अंत लगती है और दूसरी तरफ वही गलती इतिहास , सिस्टम या मजबूरी बन जाती है।
यानी गलती वही तराज़ू अलग।
आज दुनिया फैक्ट-चेक , कई स्रोतों से पुष्टि और बैलेंस्ड रिपोर्टिंग की बात कर रही है,
और आप अक्सर भावनात्मक भाषण से ��ाम चलाते दिखते हैं।
भावना ठीक है , लेकिन जब भावना ही सब कुछ बन जाए और तथ्य पीछे छूट जाएँ,
तो वो पत्रकारिता नहीं , प्रोपेगेंडा के करीब पहुँच जाती है।
आप बेरोज़गारी , शिक्षा , स्वास्थ्य पर बोलते हैं अच्छा है।
लेकिन जिन सरकारों या राज्यों से आपकी सोच मिलती है , वहाँ पेपर लीक , भ्रष्टाचार , गुंडागर्दी , कानून-व्यवस्था पर आपकी आवाज़ अचानक धीमी क्यों पड़ जाती है?
क्या जवाबदेही सिर्फ़ दिल्ली की कुर्सी पर बैठने वालों की ही होती है?
आप “आम आदमी” की बात करते हैं,
तो फिर विकास, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी पर गंभीर बहस क्यों नहीं?
या फिर आम आदमी को सिर्फ़ डराया जाए, निराश किया जाए ~ ताकि नैरेटिव चलता रहे?
पत्रकार का काम आइना दिखाना होता है।
लेकिन अगर आइना हमेशा एक ही दिशा में घुमाया जाए,
तो सच नहीं दिखता~ सिर्फ़ पसंदीदा तस्वीर दिखती है।
सत्ता का अंधभक्त बनना ग़लत है,
लेकिन विपक्ष का स्थायी प्रवक्ता बन जाना भी पत्रकारिता नहीं।
संतुलन बना सको तो पत्रकार हो।
वरना नैरेटिव गढ़ना तो कोई भी सीख सकता है।
मैं मध्यम वर्गीय परिवार से हूं। यहां privacy जैसे चोंचलों की कोई जगह नहीं होती। यदि फ़ोन बज रहा है और हम किसी काम में व्यस्त हैं तो पापा, मम्मी, दीदी, भाई, पति या घर का कोई भी सदस्य फ़ोन रिसीव कर लेता है। यदि हमें सोशल मीडिया चलाते चलाते अचानक कोई काम आ जाए या नींद आ जाए और मैसेज बॉक्स खुला हो तो घर का कोई भी सदस्य मैसेज का रिप्लाई कर देता है कि वो सो गई/फलां काम में व्यस्त है, आप बाद में बात करना।
अब बात आती है उन लोगों की जो मुझे कहते हैं "सुशीला जी हम आपको बहन, भाभीजी, दोस्त.... मानकर आपकी इज़्ज़त करते हैं।" यही इज़्ज़त, सम्मान, पवित्र रिश्ते की बात कह कर वो मे���े मैसेज बॉक्स में बने रहते हैं और किसी दिन किसी मैसेज का रिप्लाई राहुल जी कर दें, specially voice message डाल दें कि "मैं राहुल हूँ, अभी वो काम में व्यस्त है, आप बाद में बात करना" उस दिन से ये लोग मुझे unfollow, block इत्यादि कर के निकल जाते हैं। ऐसा कौनसा रिश्ता था, कैसी इज़्ज़त थी जो आप यूं निकल लिए? नियत में कोई खोट तो नहीं थी कहीं?? क्यों कि यदि मैं किसी को मैसेज करूं तो उसके माता पिता या अन्य परिजन को भी मैं कह सकती हूं ना कि uncle/aunty/sister/bro मुझे फलां काम था, फलां व्यक्ति से कितने बजे बात हो सकती है? और अगर उसके किसी भी अपने से तुम कोई रिश्ता नहीं मानते तो क्यों मुँह उठाकर आ जाते हो किसी के भी इनबॉक्स में?
ये आपका ब्लॉक करना, अनफॉलो करना बताता है कि असल में आपको क्या चाहिए था?
IAS , IPS और IRS लॉबी कोई इक्का-दुक्का अफसरों की गड़बड़ी नहीं है , बल्कि एक पूरा सेट सिस्टम है। इसमें पोस्टिंग मेरिट से नहीं, सेटिंग से मिलती है। महत्व��ूर्ण कुर्सियाँ DM , SP , कमिश्नरv, सेक्रेटरी एक तय सर्कल में घूमती रहती हैं। जो अफसर सिस्टम के हिसाब से चलता है , वही बार-बार मलाईदार पोस्टिंग पाता है। जो सवाल करता है , उसे या तो साइड में डाल दिया जाता है या ऐसी जगह भेज दिया जाता है जहाँ उसका असर शून्य हो जाए। यह संयोग नहीं , सुनियोजित सिंडिकेट है।
टेंडर का खेल फाइलों में नहीं , ड्राइंग रूम में तय होता है। टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई जाती हैं कि सिर्फ ��पना ठेकेदार ही क्वालिफाई करे। काम घटिया होता है , बिल पूरा पास होता है और कमीशन ऊपर तक बंटता है। जो अफसर इस खेल में बाधा बनता है , उसका तुरंत ट्रांसफर। जो चुप रहता है , उसका प्रमोशन। जनता को खराब सड़क , टूटा पुल और अधूरा अस्पताल मिलता है और सिस्टम को मोटा मुनाफा।
पावर का इस्तेमाल कानून लागू करने के लिए नहीं , खुद को बचाने के लिए होता है। आम आदमी के लिए नियम सख्त हैं , लेकिन अफसरों के लिए एडजस्टमेंट। FIR रुक जाती है, जांच दब जाती है , फाइल गायब हो जाती है। नीचे का स्टाफ मजबूर रहता है। ऊपर से आदेश है कहकर हाथ खड़े कर देता है। कानून किताबों में रहता है , जमीन पर नहीं।
इस पूरे खेल में परिवार और रिश्तों की बड़ी भूमिका होती है। पत्नी NGO चलाती है, भाई ठेकेदार होता है , बेटा-बेटी PR , कंसल्टेंसी या स्टार्टअप में होते हैं , दोस्त रियल एस्टेट , माइंस या शराब के कारो���ार में। हितों का टकराव खुला दिखता है , फिर भी सिस्टम आंख मूंद लेता है। सैलरी सीमित होती है , लेकिन लाइफस्टाइल और संपत्ति कई गुना बड़ी फिर भी कोई सवाल नहीं।
ऊपर से एक मोटा PR कवच तैयार किया जाता है। जनता के टैक्स के पैसों से अखबारों में फोटो , अवॉर्ड और ईमानदार अफसर की कहानियाँ छपती हैं। वही अफसर बैकएंड में फाइल रोकता है और डील क्लियर करता है। जो पत्रकार सच लिखे , वह ब्लैकलिस्ट होता है। जो नागरिक सवाल पूछे , वह ट्रोल कहलाता है।
IRS एंगल भी अलग नहीं है। टैक्स का डर चुनिंदा लोगों के लिए होता है। छोटे व्यापारी निचोड़े जाते हैं, बड़े खिलाड़ी सेट रहते हैं। रेड , नोटिस और राहत सबका एक रेट तय है। नतीजा यह कि सिस्टम देश के लिए नहीं , अपने नेटवर्क के लिए काम करता है।
खुरपेंच इन 2024
•एक्सपोज्ड कोचिंग माफियाज
•एक्सपोज्ड माल प्रैक्��िसेज इन कोचिंग इंडस्ट्री
•UPSC फेक सर्टिफिकेट केसेज
•एक्सपोज्ड ब्यूरोक्रेटिक करप्शन
•एक्सपोज्ड गवर्नमेंट स्कीम्स
•एक्सपोज्ड हेल्थ एंड एजुकेशन सिस्टम
• एक्सपोज्ड फेक PR ऑफ ब्यूरोक्रेट्स
खुरपेंच इन 2025
• एक्सपोज्ड ब्यूरोक्रेटिक करप्शन
• एक्सपोज्ड गवर्नमेंट स्कीम्स
• एक्सपोज्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑफ कंट्री
• एक्सपोज्ड फेक अवार्ड्स
• एक्सपोज्ड फेक PR
• एक्सपोज्ड बेटिंग स्कैम्स
�� एक्सपोज्ड MPLADS
• एक्सपोज्ड बहुत स��रे छोटे मोटे इश्यूज
• एक्सपोज्ड इंडियन मीडिया
खुरपेंच इन 2026
• MPLADS
• हम FSSAI को एक्सपोज करेंगे रिपोर्ट बन रही
• टैक्स के पैसों का हिसाब लेंगे , पूरे देश में हमने 550 से ज्यादा RTI डाल रखी हैं,
• IAS,IPS और IRS लॉबी को एक्सपोज करेंगे
• इस साल करीब 50 फेक सर्टिफिकेट के केसेज को एक्सपोज करेंगे , हम लगातार काम कर रहे ,
• फेक ड्रग मैन्युफैक्चरिंग के नेक्सेस को एक्सपोज करेंगे ,
• फेक PR ऑफ लीडर्स एंड ब्यूरोक्रेट्स को एक्सपोज करेंगे,
• 5 गवर्नमेंट की स्कीम्स को एक्सपोज करेंगे , रिपोर्ट बन रही ,
• CSR फंडिंग को चारों खाने चित्त करेंगे,
• कुछ NGO हमारे निशाने पर हैं ,जो देश विरोधी और विकास विरोधी काम कर रहे ,
• इस साल हम कुछ बिजनेसस और बिजनेसमैन को एक्सपोज करेंगे,
• कुछ छोटे छोटे इश्यूज है जिनपर आप लगातार रिपोर्ट देखते रहेंगे ।
आप सभी का साथ बने रहने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
क्या आपके गांव/कस्बे में
पंचायत सचिव , ग्राम विकास अधिकारी (VDO) , सफाई इंस्पेक्टर , नलकूप ऑपरेटर, आशा–ANM , पटवारी , जूनियर इंजीनियर, राशन डीलर, बिजली लाइनमैन , प्रधान , पंचायत सहायक बिना चाय-पानी के काम नहीं करते?
जन्म प्रमाण पत्र हो ,आवास योजना हो ,
राशन कार्ड हो , बिजली कनेक्शन हो , इलाज हो या कोई सरकारी सुविधा क्या हर जगह पहले जेब ढीली करनी पड़ती है?
अगर हाँ ,
तो उनका नाम , पद और इलाका लिखकर भेजिए।
टीम खुरपेंच सवाल करेगी ,
जांच करेगी और इनकी चोरी बंद करवाई जाएगी।
क्योंकि सरकारी नौकरी
सेवा के लिए होती है,
लूट के लिए नहीं।