लहरों के उद्दाम
वेग सी
चातुर्मास के ���रसते
मेघ सी ......तुम !
एक अँजुरी नदी की
धार सी
सत मोतिकाओं के
अनुपम हार सी ....तुम !
#मनभावन प्रिय
मनमीत सी
रात में गाये हुए
गीत सी ....तुम !
कवि के गन्ध रचती
छंद सी
सम्बोधनहींन
#अनुबन्ध_सी.....तुम !
सिर्फ तुम!!!
#सागर
#सरस
#पहल
#सरस_चित्र_लेखन
गोरी दबाकर मुख से साड़ी का एक छोर
शायद चितवन देख रही प्रीतम की ओर
कजरा अखियां के लागे दोउ कोर
मुस्कान दिल में मचा रही थी शोर
नज़र न हटती थी उससे काउ ओर
दिल धड़क धड़क कर रहा पुर जोर
बिंदिया चमक रही माथे जैसे हुआ भोर
नहीं कोई साधारण वो लगती चित्त चोर
#सरस#पहल
चांदसा चेहरा झीलसी आंखें
माथ पर बिंदिया काजल की
किसी शायर की गजल हो तुम
या पूजा हो किसी पागल की
फूल बदन तुझे फूल कहूं
या बिजली कहूं किसी बादल की
लाज से पल्लू मुख में डाले
मुझसे क्यों शर्माती है
दुष्ट कहीं के, फिर से कह दो
सुन लूं बोली कोयल की
#राज#सरस#पहल
मुख में पल्लू दबाने से सागर में लहर आई है
और तू कहती है बस तू है,तनहाई है
ये जो खुश्बू है हवा में बड़ी नमकीन है
क्यूँ तू आँख के मोती गिरा के आई है
उसका वजूद तेरे संगसंग चलता है
जिसको तूने कहा बेवफा हरजाई है
अगर तू धूप को छू ले तो पता चल जाए
जला कौन है किसने क्या सजा पायी है
#सरस
पुरुष के लिए
स्त्री एक पुल की तरह है
जिससे होकर
वह गुजरना चाहता है
पर स्त्री के लिए
पुरुष एक सागर है,
जिसमें
वह डूब जाना चाहती है
सु प्रभात ज़िंदगी__💛
#Bk#सरस#पहल
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कथाकार और ग़ज़लकार दुष्यंत कुमार त्यागी(27 सितंबर1931-30दिसंबर1975)को कौन नहीं जानता।अपने छोटे से जीवनकाल में इन्होंने हिंदी साहित्य में ऊँचा मुका�� हासिल किया।इनकी 1975 में प्रसिद्ध ग़ज़ल संग्रह "साये में धूप"
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