मोहब्बत ज़िंदाबाद 🔥
देव्यांशी शर्मा ने जाति व्यवस्था को कुचल कर अजय कुमार मीणा से शादी कर ली है ।
राजस्थान सरकार से अपील है कि अगर कोई प्रोत्साहन राशि बनती है तो इस प्रेमी जोड़े को तुरंत वो प्रोत्साहन राशि दी जाए ।
पोंगा वकील ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया है।
लेकिन दिन-रात मेरिट का डमरू बजाने वाली नेहा दास जैसे जातिवादी सवर्ण इसी फेक न्यूज के सहारे SC-ST Act एवं वंचित वर्गों के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर देते हैं।
10वीं का छात्र भी बता सकता है कि BNS की धारा 20 के अनुसार, सात वर्ष से कम आयु के बच्चे द्वारा किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं माना जाता है।
पहली बात तो 1 साल के बच्चे पर FIR के इस दावे में कितनी सच्चाई है, यह चेक करना होगा। दलितों एवं आदिवासियों के खिलाफ दुष्प्रचार करने में इन लोगों का कोई ईमान नहीं होता है। झोलाछाप वकील की भाषा ही बता रही है कि कैसे वह SC-ST समुदाय के खिलाफ जहर उगला रहा है। अगर यह सच भी है, तो जरूर थाने का SHO भी इनकी तरह ही पोंगा मेरिट वाला होगा, इसीलिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के खिलाफ जाकर एक साल के बच्चे पर FIR दर्ज कर दी। ऐसे में चाहे सिर्फ BNS का मामला हो या फिर BNS के साथ किसी अन्य विशेष लॉ की, अगर इंवेस्टिगेशन ऑफिसर ने 7 साल तक के किसी बच्चे पर चार्जशीट लगा भी दी तो Circle Officer, SHO सहित सभी जिम्मेदार पुकिसकर्मी नाप दिए जाएंगे।
दूसरी बात, SC-ST Act एक Special Law है। किसी भी व्यक्ति पर पहले BNS की धाराओं में मामला दर्ज होता है, क्योंकि BNS भारत का General Criminal Law है। हर बात पर जाहिलों की तरह मुंह उठाकर SC-ST Act के खिलाफ बक-बक करना तुम्हारी गोबरबुद्धि का परिचय देता है।
हालांकि मुझे पता है कि तुम लोग गोबरबुद्धि नहीं हो। तुम जातिगत श्रेष्ठता-बोध में जीने वाले नीच प्राणी हो, जो दिन-रात केवल इसी चिंता में मरे जा रहे हो कि तुम्हारे पुरखों की बनाई सड़ियल जातिवादी संस्कृति को दलित अपने पैरों तले क्यों कुचल रहे हैं।
चूंकि तुम्हारे श्रेष्ठता-बोध का दिन-रात सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला जा रहा है और पूरी दुनिया के मानवाधिकारों के लंबरदार तुम्हारी मानसिकता पर लाखों लानतें भेज रहे हैं, अतः तुम लोग इसी कुंठा और छटपटाहट में SC-ST Act एवं वंचित समुदाय के खिलाफ जहर उगलते रहते हो।
अच्छा है। तुम्हारी ये छटपटाहट और बौखलाहट देखकर हमें ऊर्जा मिलती है। वैसे भी करुणा और समानता की उम्मीद इंसानों से की जाती है। दलितों के खिलाफ जातीय द्वेष में लबरेज होकर जहर फैलाने के मामले में तुम लोग न तो इंसान रहते हो और न ही तुममें कोई इंसानियत रहती है।
This picture of Sahil's parents makes me cry. They lost their only son, but that wasn’t enough.
The media and casteist ecosystem, like vultures, have feasted upon the dignity of that innocent boy. They stripped Sahil of his dignity even after death.
Never forget, never forgive. Just wait for our time.