@Sundarspeak57 कणखर बाण्याचे पत्रकार मेले केव्हाच,सध्याचे पाकीट पत्रकार आहेत, जे कणखर होते ते वैतागून किराणा दुकान चालवतात आता, इतक्या खालची भाषा ऐकून पण गप्पगुमान आहेत पत्रकार बंधू ?
Miracl
@shaheena451 वास्तविकता से परे है ये सब, इतिहास को अपने फायदे के लिए तोड़मरोड़ कर लिखना मतलब ऐसा आप के समूह के बारे में कुछ नहीं जो लिखा जा सके ये किसी भी व्यक्ति समूह संगठन के लिए शर्म की वजह है