@NutanSharm60654#लबों पर ताले हैं और
खामोश हैं सारे अल्फाज,
मगर दिल में जो #कसक है, वो शोर मचाती है बहुत।
बात बंद है हमारी,
पर ये कैसी बेबसी है,
कि तेरी यादें ही अब हमसे,
बातें कर जाती हैं बहुत।"
@NutanSharm60654#लबों पर ताले हैं और
खामोश हैं सारे अल्फाज,
मगर दिल में जो #कसक है, वो शोर मचाती है बहुत।
बात बंद है हमारी,
पर ये कैसी बेबसी है,
कि तेरी यादें ही अब हमसे,
बातें कर जाती हैं बहुत।"
ये साला ढलती उम्र का प्यार भी बड़ा ज़ालिम होता है यार
कभी शौहर से डरना पड़ता है
तो कभी बच्चे बड़े हो रहे है
कह कर खुद मे ही सिमटना पड़ता है
बेवफा हम हरगिज नहीं होते
लेकिन बढ़ती उम्र को देख कर बेवफा होना पड़ता है
जमाना क्या कहेगा
बस ये सोच कर
तन्हा तन्हा रोना पड़ता है
ग़ज़ल : “तेरे रूप की धूप में "
मेरी हर साँस ने ढूँढा कोई ठाँव,तेरे रूप की धूप में,
उतर आया रगों में एक ठहराव,तेरे रूप की धूप में।
ना कोई डर रहा अब ना है #ग़लत का ही कोई शोर,
मेरा दिल बन गया ख़ुद ही गाँव,तेरे रूप की धूप में।
इन थकी आँखों ने जब भी तुझे जी-भर के देखा है,
बदल गयी मुक़द्दर की हर छाँव, तेरे रूप की धूप में।
मैं जिस रास्ते पर भटकता रहा हूँ एक मुद्दत तलक,
उसी राह पे पाया अब नया ठाँव,तेरे रूप की धूप में।
बड़े सलीक़े से जलाया है ये जिस्म मेरा तेरी नज़र ने,
क्यूँ राख़ में भी महकता है गाँव,तेरे रूप की धूप में।
नज़र भर के अग़र तू मुस्कुरा दे रू ब रू आकर मेरे,
पिघल जाए ज़माने का हर दाँव,तेरे रूप की धूप में।
मैने भी दुआओं में यही एक नाम माँगा है हमेशा से,
मिल जाए उसे ता उम्र का ठाँव,तेरे रूप की धूप में।
ठाँव-- ठोर, ठिकाना
#अशोक_मसरूफ़
#गीतमाला #ग़लत