पावर कारपोरेशन के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016-17 में एटी&सी लॉसेस 40.79% थे जो वर्ष 2023-24 में घटकर मात्र 16.92 प्रतिशत रह गए हैं राजस्व वसूली जो वित्तीय वर्ष 2019-20 में 41219 करोड़ थी अब वित्तीय वर्ष 2023-24 में बढ़कर 62069 करोड़ हो गई है (जिसमें सरकार की सब्सिडी और सरकारी विभागों पर बकाया की धनराशि सम्मि��ित नहीं है) यह आंकड़ा दर्शाता है कि बिजली चोरी रोकने के लिए एवं राजस्व वसूली को बढ़ाने के लिए बिजली कर्मचारियों ने माननीय मुख्यमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में व्यापक सुधार किया है। 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2025 भारत सरकार की रिवैंप योजना के अंतर्गत 40000 करोड़ से अधिक का राजस्व सिस्टम को मजबूत करने में लगाया जा रहा है, हमें पूरा विश्वास है कि अप्रैल 2025 के बाद जब रिवैंप योजना का कार्य कंप्लीट हो जाएगा तो यह लाइन हानियां घटकर मात्र 12% रह जाएगी और राजस्व वसूली में गुणात्मक सुधार होगा। ऐसे में अगर वितरण व्यवस्था का निजीकरण किया जाता है तो बिजली के ढांचे में सुधार के लिए बड़े पैमाने पर खर्च किए गए सरकारी धन का लाभ प्राइवेट कंपनियों का होगा, मतलब खर्चा सरकार करेग�� और मुनाफा प्राइवेट कंपनी ले जाएगी, इसलिए हम कह रहे हैं कि यह निजीकरण नहीं बल्कि दिन दहाड़े सरकारी धन और सरकारी संपत्ति की खुली लूट है इसे जनहित में रोका जाना चाहिए, नहीं तो जनता सब समझ रही है कि किसको लाभ पहुंचाने के लिए जल्दबाजी में निजीकरण किया जा रहा है।
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