जब पहली बार दिल टूटता है,तो लगता है कि अब कभी प्यार नहीं होगा,की हम पहले जैसा प्यार अब किसी से कर ही नही पायँगे लेकिन फिर एक दिन,जब हम बिल्कुल तैयार नहीं होते और किसी रिश्ते की उम्मीद भी नहीं कर रहे होते,कोई चुपके से ज़िंदगी में शामिल हो जाता है शुरुआत में बस यूँ ही बात करते हैं,फिर पता ही नहीं चलता कि वो बातें कब रोज़ की आदत बन जाती हैं और एक अजनबी कब सबसे अपना हो जाता है उसकी बातें सुकून जैसी लगती हैं जिन छोटी-छोटी बातों को लेकर कभी मन अशांत होता था,वही बातें वो बिना कहे समझने लगता है तब हैरानी होती है कि जिसे समझाने में सालो कम पड़ गई,वो बिना कहे इतना कुछ कैसे समझ गया...!