वित्त मंत्री निर्मला जी पेपर लीक के फायदे गिना रही हैं
“पेपर लीक होने से बच्चों को पढ़ने का और ज़्यादा वक़्त मिल गया जिससे वह बेहतर कर सके”
चलिए मैडम, अब लगे हाथ जिन 22 बच्चों ने अपनी जान दे दी उसके फ़ायदे भी गिना दीजिए
हद होती है - How brazenly insensitive are you?
It is painful to see young students from different parts of the country assembled for days on the streets of New Delhi. Their anxieties and concerns regarding the examination system are genuine and must be handled with empathy and a desire to find a lasting solution. I fervently hope that this is not treated merely as a law-and-order issue to be tackled through the use of force. It is very painful to see that even young girls were brutally mishandled.
Such use of force shall alienate large sections of Indian society from the national goal of Viksit Bharat.
यह देखना अत्यन्त पीड़ादायक है कि देश के विभिन्न भागों से आए युवा छात्र कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर एकत्रित हैं। उनकी चिंताएँ और सरोकार वास्तविक हैं। इन्हें सहानुभूति तथा दूरगामी समाधान की दृष्टि से हल किया जाना चाहिए। मुझे पूरी आशा है कि इसे केवल कानूनी और व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं देखा जाएगा जिससे बलपूर्वक निपटा जाये। मुझे य़ह देखकर अत्यन्त पीड़ा हुई है कि महिलाओं और युवत��यों पर निर्मम बल प्रयोग किया गया।
ऐसे बल के उपयोग से भारतीय समाज का बड़ा हिस्सा विकसित भारत के लक्ष्य से बहुत दूर चला जाएगा।
झूठ न बोलिये प्रधानमंत्री जी!
महिला आरक्षण बिल 20 सितंबर 2023 को लोकसभा में और 22 सितंबर 2023 को राज्यसभा में पास हुआ था. 16 अप्रैल 2026 की रात 10:00 बजे भारत सरकार ने नोटिफिकेशन भी जारी किया. सितंबर 2023 का राज्यसभा के इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड में सत्ता पक्ष - विपक्ष दोनों के सभी 171 वोट पक्ष में दिख रहे हैं.एक भी वोट विरोध में नहीं.
लोकसभा में इस बिल के 452 वोट सपोर्ट में और AIMIM के दो वोट विरोध में पड़े, ये कै��े झुठलायेंगे ? अगर 2023 में महिला आरक्षण पास नहीं हुआ होता तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उस शाम दिल्ली में बीजेपी के मुख्यालय में स्वागत और भाषण क्यों होता?
17 अप्रैल 2026 की शाम मोदी सरकार को लोकसभा में मिली हार का संबंध महिला आरक्षण से नहीं है.
महिला आरक्षण कानून बन चुका है और उसका जश्न मनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ढाई साल पहले BJP के दफ्तर में अपने भाषण में विपक्ष और सभी राजनीतिक दलों का और स���ी सांसद साथियों का भी अभिनंदन कर चुके हैं.
Dear Gyanesh Gupta ECI ji
How did you allow this blatant violation of Model Code of Conduct when state elections are on, the MCC is in force, and Modi's party is a key contender in all states? Will you disqualify his candidates now? I am sure you would, as you are recognised as one of the most honest, independent and fearless CECs of all time.
Thank you.
डीएमके ने राज्यसभा में एक प्राइवेट बिल लाया है, जिसमें कहा गया है कि बिना जनगणना और डिलिमिटेशन के ही महिलाओं को तुरंत 33% आरक्षण दिया जाए।
अगर बीजेपी सच में महिलाओं के हक में है, तो उसे इस बिल को सपोर्ट करना चाहिए
2014 में सत्ता में आने के बाद पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है, जब मोदी सरकार को सदन के भीतर अपनी कमजोरी का एहसास हुआ होगा। वरना 2023 में जब महिलाओं को विधायिका में 33 फीसदी आरक्षण देने से संबंधित बिल लगाया गया था, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने पूरी सहमति से उसे पारित कर दिया था।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के नेता कल्याण बनर्जी और द्रमुक सांसद लगातार जोर दे रहे थे कि सरकार 2023 के बिल को तुरंत लागू कर दे, लेकिन सरकार इसे परिसीमन के साथ जोड़कर ही लागू करना चाहती थी, मगर उसकी यह बाजीगरी काम ��हीं आई।
लोकसभा में आज जो कुछ हुआ, उसके दो संदेश साफ हैं, पहला यह कि 2024 के लोकसभा चुनाव में 240 सीटों पर सिमट जाने वाली भाजपा तेलुगू देशम पार्टी और जनता दल (यू) के सहयोग से सरकार में है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की छवि कमजोर पड़ चुकी है और उनकी अंतरात्मा की अपील भी सरकार के काम नहीं आई है।
दूसरा यह कि अपने तमाम अंतर्विरोधों के बावजूद सदन के भीतर विपक्ष एकजुट है। इसका यह भी मतलब है कि मोदी सरकार के लि��� संसद में आगे आने वाले दिनों में मुश्किलें बढ़ेंगी, कम नहीं होंगी।
बीजेपी की उपलब्धि ये नहीं है कि वो लगातार सरकार बना रही है, बल्कि उपलब्धि ये है कि उसने ह्युमन साइकॉलजी को गहरे से पकड़ लिया है।
#सैडिज़्म
सैडिज्म है- दूसरों के दुख, तकलीफ और मुश्किलों को देखकर ख़ुश होना�� हर इंसान में थोड़ा-बहुत ये नेचुरल होता है। अक्सर हम दूसरों को दुखी देखकर ख़ुश हो जाते हैं, जबकि उसके दुख से हमें कोई फ़ायदा नहीं हुआ। लेकिन ये हर इंसान में होता है। लेकिन हरेक इंसान अपने भीतर के सैडिज़्म को अक्सर कंट्रोल करके रखता था, बाहर दिखाने से परहेज़ करता था। क्योंकि सैडिज़्म से ज़्यादा इंसान के भीतर Empathy स्ट्रॉन्ग होती थी।
यही वजह थी कि जब भी हम डिस्कवरी चैनल पर शेर और हिरण की रेस देखते थे, तो दुआ करते थे कि हिरण इस रेस में जीत जाए और बच जाए। जबकि लोगों की ना हिरण से कोई दोस्ती है और ना ही शेर से कोई दुश्मनी। लेकिन किसी कमज़ोर के साथ खड़े होने की भावना, किसी को मुश्किल में देखकर दुखी होना, उसकी चिंता करना... इसी को सहानुभूति, Empathy, करुणा, Compassion बोलते हैं। इसी ह्यूमन नेचर की वजह से ये दुनिया, ये इंसानियत ज़िंदा है।
लेकिन पिछले कई साल में एक तय प्रोग्राम के ज़रिए इस ह्यूमन नेचर को ख़त्म किया गया और लोगों के भीतर के सैडिज़्म को ट्रिगर किया जा रहा है।
इसीलिए आज बड़ा कॉमन हो गया है कि लोग किसी ग़रीब के घर पर बुल्डोज़र चलता देखकर ख़ुश होते हैं। लोग को ख़ुशी मिलती है, जब पुलिस किसानों पर, मजदूरों पर, स्टूडेंट्स पर, बेरोज़गारों पर, मुसलमानों पर लाठियां बरसाती है।
लोगों को ख़ुशी होती है, जब किसी की मॉब लिंचिंग होती है, जब कोई भीड़ किसी को बेरहमी से पीटती है, मार डालती है। लोगों की आंखों में ख़ुशी की चमक आ जाती है, जब वो देखते हैं कि एक भीड��� ने किसी ग़रीब की रेहड़ी तोड़ दी, किसी का ढाबा बंद करवा दिया, किसी का रोज़गार छीन लिया। लोग इस बात को चियर करते हैं कि सरकार भी पीड़ित के साथ नहीं, हमलावर के साथ खड़ी है। आज लोग चाहते हैं कि ताक़तवर शेर, कमज़ोर हिरण को नोंच-नोंचकर खा जाए।
किसी की लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी हुई सरकार तोड़ दी, किसी की पार्टी तोड़ दी, किसी के विधायकों को ख़रीद लिया, किसी को ED-CBI का डर दिखाकर पार्टी में शामिल कर लिया, क���सी को झूठे आ��ोप लगाकर जेल में डाल दिया, किसी का शो रोक दिया, किसी की किताब बैन कर दी, किसी का सोशल मीडिया अकाउंट उड़ा दिया, किसी का बॉयकॉट कर दिया... ये सब होने से निजी तौर पर लोगों का कोई फ़ायदा नहीं होता... लेकिन फिर भी वो ये सब देखकर ख़ुश होते हैं। क्योंकि अब लोगों की एम्पथी पर सैडिज़्म हावी हो चुका है।
फिलहाल करोड़ों लोग इस बिहेवर को पाल रहे हैं, ये सोचकर कि ये तो सिर्फ मोदी विरोधियों, विपक्षियों या मुसलमानो�� के ख़िलाफ़ ही वर्क करता है। लेकिन ये भ्रम है ! एकबार ये बिहेवियर वर्कआउट होने लगता है तो ये सारी हदें पार कर देता है। ये आपकी पर्सनल लाइफ़, आपकी सोशल लाइफ़, प्रोफेशनल लाइफ़, यहां तक कि बल्ड रिलेशन तक को खा जाता है। आप पहले से ज़्यादा उग्र, ज्यादा हिंसक, ज़्यादा इम्पेशेंट और नफरती होते जाते हैं। छोटी-छोटी बातों पर एक-दूसरे से रिश्ते ख़त्म कर देते हैं। यहां तक कि एक-दूसरे को ही ख़त्म कर देते हैं।
आज ये हो रहा है !! राजनीतिक हथियार, इंसानियत खो चुके हैं !!
#महेंद्र_सिंह
#WATCH | Delhi | Congress MP Shashi Tharoor says, "It has been a very convincing victory. The BJP fell 52 votes short of the two-thirds they needed to pass the constitutional amendment... We are feeling a certain sense of triumph. this is not a vote against women's reservation, but against delimitation and the mischief that delimitation and the dramatic expansion of Parliament would do to our democracy, so we voted to save our democracy..."
"We have said even in our speeches, that we will vote for women's reservation if you will delink it from delimitation. It is against their refusal to delink this that we have voted..."
2014 में भारत में कुल खपत का 27% तेल का अपना उत्पादन था।
मोदी सरकार के राज में ये घट कर 13% रह गया। क्यों?
ONGC, जिसका काम नए तेल के कुओं की खोज करना है, उसे कंगाल बना दिया। exploration के लिए उसके पास बजट ही कम हो गया! जिस ONGC के पास 2014 में ₹ 13000 करोड़ का कैश रिजर्व था, ��ज वो ₹78000 करोड़ के क़र्ज़ तले है।
2017 में सरकार ने तय किया कि तेल की स्टोरेज देश में बढ़ानी है। आज तक नहीं हुआ। जबकि चीन ने 2019 में फैसला किया कि स्टोरेज 80 दिन से बढ़ा कर 120 दिन करनी है। उसने कर लिया। भारत क्यों नहीं कर पाया?
2014 से लेकर 2025 एकटक न्यूक्लियर पॉवर पर मोदी सरकार शांत रही।
इन सब सवालों का जवान कौन देगा?
बिना कारण किसी देश के सर्वोच्च नेता को मार देना, अपहरण कर लेना, संसाधन कब्जा कर लेना, देश बर्बाद कर देना, ऐसा करने वाला देश किसी दूसरे देश का दोस्त कैसे हो सकता है?
कैसे माना जाए कि कल उसको स्वार्थ दिखा तो वह हमारे साथ ऐसा नहीं करेगा? खासकर तब, जब वह हमें लगातार आदेश द��ने और अपमानित करने का प्रयास कर रहा है?
प्राइवेट बैंक के कर्मचारियों को कैसे बैंक भिखारी से भी बुरा बनाता है,
आज इसका उदाहरण आँखो से देख भी लिया.
आज मेरे एक पहचान वाले को एक नामचीन प्राइवेट बैंक में काम था कुछ,
उसने साथ चलने का आग्रह किया, तो चला गया
उसकी एक FD रिन्यूअ�� करवाने वाली थी��.
काउंटर पर जैसे ही पहुँचे ,
एक मैडम बैठी हुई थीं.
परिचित ने FD महिला कर्मचारी को देकर कहा कि इसको RENEW कर दीजिये.
तो मैडम ने कहा, सर मेरी मानो तो आपके लिए इससे भी अच्छी स्कीम आईं हुई है,
बस आप FD तुड़वा कर उसमें इन्वेस्टमेंट कर दो
उसने आगे कहा कि मुनाफा दुगना होगा.
परिचित और मैंने साफ़ मना कर दिया कि हमें उसकी जरुरत नहीं, बस आप रिन्यू कर दो.
हमारे चेहरों पर पत्थर की लकीर टाइप भावो को देखकर उसका चेहर�� बुझ गया.
फिर उसने हमें कहा कि सर मार्च की क्लोज़िंग चल रही है, प्लीज एक छोटी सी इन्वेस्टमेंट कर दो, मेरी नौकरी बची रहेगी.
तो हमने पूछा, कितने की इन्वेस्टमेंट?
तो उसने कहा सिर्फ 25 हज़ार, आप इस स्कीम में लगा दो, अन्यथा अगले महीने मुझे टारगेट पूरा ना करने के कारण बाहर का रास्ता भी देखना पड सकता है.
ये सुनकर मुझे एहसास हुआ कि हमारे बैंकिंग सिस्टम ने प्राइवेट नौकरी वालों को मुनाफे की मशीन में तब्दील कर दिया है.
हर दिन कुछ ज्यादा एक्स्ट्रा लाने के टारगेट.
हर दिन काम ना करने पर बेइज्जती.
हर दिन फील्ड में जा जा कर नए नए अकॉउंट खोलने की ज़िम्मेदारी.
इतना प्रेशर?? क्या मिडल क्लास वाले लोहे के बने होते हैँ जो इतना झेलेंगे??
खैर हमने उसकी बात मानकर उसकी तो नौकरी बचा ली.. पर सब हमारे जैस��� तो नहीं होंगे ना??
Today is Saturday for the Nation but Working Day for Bankers❗️
After the 27 January strike, silence.
Is #UFBU in deep sleep?
#5daysbanking still feels like a distant promise. Bankers are ready for fight. The question is, is leadership ready?
Will UFBU announce another strike on 30 and 31 March? Or should bankers quietly accept that 5 day banking is just a slogan?
Time for clarity. Not comfort.
@rupamsmail@ChVenkatachalam any comment or as usual silence?
#5daysbanking #bankersvoice