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क्या पृथ्वी पे होने जा रही है कोई बड़ी घटना?
लगातार मिल रहे अशुभ संकेतो के बाद कल 13 मार्च 2026 को मिले दो अशुभ संकेत. मंदिर में मिले खून के धब्बे जिससे कराया गया महास्नान और एक घंटे बंध रही मंदिर की निति-रीति. और मंदिर के उपर सूर्यास्त के समय मंडराया चिल का बड़ा झुण्ड!
आधुनिक विज्ञान की त��क्की! चन्द्र और मंगल पे ज़मीन बेचे जाना आदि का भविष्य मालिका में उल्लेख
अब एक नया युग आ गया है, जहाँ रॉकेट उड़कर चंद्रलोक (चांद) तक पहुंच गए हैं। इन रॉकेटों के भीतर बैठाकर मनुष्यों को भेजा जाएगा, और इंसान चांद पर जाकर अपना निवास स्थान बनाएंगे। पृथ्वी पर रजिस्ट्री ऑफिस बनाए जाएंगे और यहीं से चंद्रमा की जमीन खरीदी और बेची जाएगी। पांच-दस मुद्रा प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन खरीदकर लोग चंद्रलोक में सुख से रहने की योजना बनाएंगे। जब बाकी लोग वहां जमीन और घर खरीदेंगे, तो मैं यह सुनहरा अवसर क्यों छोड़ूं? हे भक्त-प्रेमी भगवान! मैं भी आपके लिए वहां खुशी-खुशी साढ़े तीन हाथ जमीन खरीदूंगा।मैं चंद्रलोक जाकर एक घर बनाऊंगा, जहाँ मेरे प्राणधन (भगवान) निवास करेंगे। द्वापर युग में तो बालकृष्ण केवल चांद को खिलौना समझकर मांगते थे, लेकिन इस युग में मेरे कन्हैया साक्षात चांद पर ही जाकर खेलेंगे। वहां चांद पर कई अद्भुत चीजें देखने को मिलेंगी, और वहीं से मंगल ग्रह पर जाने के लिए अड्डा (बेस) भी बनाया जाएगा। जहां-जहां जमीन खरीदी ��ा रही होगी, मैं आपको लेकर वहीं मौजूद रहूंगा।
यह मेरी या किसी और की बकवास (वाचाल बुद्धि) हो सकती है, हे क्षमा के सागर प्रभु! अपने क्षमा गुण से मुझे क्षमा करें। (अब कवि चेतावनी देते हैं) आज बहुत से आधुनिक और विनाशकारी हथियार बन गए हैं, जिनसे आपकी बनाई यह प्रजा और सृष्टि भस्म हो जाएगी। हे चिन्मय (चेतनस्वरूप भगवान)! यदि आपके अवतार लेने में देर हुई, तो यह जड़ संसार परमाणु हथियारों से एक-दूसरे को मार डालेगा। इस प्रजा और सृष्टि में व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए, हे परमेश्वर! उचित समय जानकर अब अवतार लें। यदि इन जड़ मारक अस्त्रों (परमाणु बम आदि) की बारिश हुई, तो घोर विपत्ति आएगी और सृष्टि नष्ट हो जाएगी। इसलिए हे प्रभु! अपनी दिव्य चेतन शक्ति के साथ शीघ्र आएं और देखें कि इन उपग्रहों (सैटेलाइट्स/हथियारों) का बल कैसा है। जब यह पूरा वायुमंडल जहरीला (विषाक्त) हो जाएगा, हे प्राणनाथ! यदि आप तब आएंगे, तो आपको धरती पर केवल श्मशान ही श्मशान देखने को मिलेंगे, और तब तक अमृत भी निश्चित रूप से विष बन चुका होगा। इसलिए मैं पुकारता हूँ, हे मेरे ईश्वर! शीघ्र आएं और अज्ञान व विनाश के अंधकार को चीरकर सूर्य की भांति उदय हों। हे प्रियतम! यदि आप सर्वज्ञ न होते (सब कुछ जानने वाले न होते), तो मैं लिखकर आपको अपने हृदय के और भी कई रहस्य बता���ा। यह चिन्मय (चेतन) और जड़ सृष्टि आपकी ही रचना है, आप न जाने कब किस यंत्र को बनाते और सजाते हैं। फिर बच्चों के धूल के खेल (घरौंदे) की तरह उसे तोड़ भी देते हैं। अंततः वही यंत्र बजता है (वही होता है), जिसे आप बजाते हैं।
अब आपका इस तरह छिपकर रहना नहीं चलेगा, हे इच्छामय! आपकी ही इच्छा पूर्ण हो। संत अभिराम कहते हैं- हे मेरे प्राणों के रक्षक, हे बंधु! मुझे केवल आपके ही चर��ों की शरण है।
एबे अन्य़ युग आसिलाणि माड़ि
रकेट गलाणि चन्दलोके उड़ि। ३२।
रकेट भितरे छाड़िबे मनुष्य़,
चन्द्रलोके करियिबे बस बास। ३३।
रेजिष्ट्रि अफिस पृथिबीरे हेब,
चन्द्र ग्रह जमि एथे किणा हेब। ३४।
पाञ्च दश मुद्रा होइब एकर,
किणि चन्द्रलोके रहिबे सुखर। ३५।
थोकाए किणिबे यदि भूमि बाड़ि,
ए सुयोग किपाँ मुहिँ देबि छाड़ि। ३६।
सार्द्ध तिनि हस्त तुम्भ पाइँ जमि,
किणिबि आनन्दे हे भकत प्रेमी !��� ३७।
चन्द्रलोके याइ निर्माणिबि पुर,
से पुरे बसिब जीबधन मोर। ३८।
से युगरे चन्द्र मागुथिल सिना,
ए युगे साक्षाते खेळिब मो सुना। ३९।
केते कथामान देखिब सेठारे,
घाटि हेब मङ्गळकु सेहिठारे। ४०।
जमि किणा हेउथिब येते ठारे,
तोते धरि मुहिँ थिबि सेते ठारे। ४१।
ए बाचाळ बुद्धि मोर कि काहार,
क्षमानिधि क्षमा गुणे क्षमा कर। ४२।
आधुनिक अस्त्र हेलाणि बहुत,
प्रजा सृष्टि तो’र हेब भस्मसात्। ४३।
चिन्मय़ यदि होइयिब डेरि,
जड़ मारुथिब परमाणु धरि। ४४।
शृङ्खळा रखिबा पाइँ प्रजा सृष्टि
बेळ जाणि जन्म हुअ परमेष्ठी। ४५।
जड़ मारणास्त्र यदि हेब बृष्टि,
पड़िब अरष्टि भाङ्गियिब सृष्टि। ४६।
सहसा आसन्तु चिन्मय़कु धरि
उपग्रह बळ देखिब किपरि। ४७।
ए बाय़ु मण्डळ होइले बिषाक्त,
सेतेबेळे यदि आस प्राणनाथ। ४८।
देखिब गुड़ाए मात्रक श्मशान,
अमृत होइब निश्चे त बिषान्। ४९।
एणु डाके शीघ्र आस मो’र ईश,
तिमिर बिदारि उअँन्तु दिनेश। ५०।
न जाणि पारन्त यदि प्रिय़तम,
लेखि जणान्ति मुँ बहुत मरम। ५१।
तुम्भरि रचना चिन्मय़, जड़
केतेबेळे केउँ यन्त्रकु सजाड़। ५२।
धूळि खेळ परि भाङ्गि दिअ ता’कु
बाजुथाए यन्त्र बजाअ याहाकु। ५३।
लुचि रहिले त न चळिब आउ,
इच्छामय़ङ्कर इच्छा पूर्ण्ण हेउ। ५४।
- कलि भागवत, अभिराम परमहंस
बहुत शीघ्र भगवान कल्कि भी यज्ञ में भाग लेते दिखेंगे, मगर उनको उनके भक्तों के अलावा और कोई नहीं पहचान पाएगा।😉
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जय श्री माधव 🙏🏻
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Prophecies of Mālikā
Baṁdhyā prasabiba mārile muṁ hāta, gāī kaṁcā deba kṣīra।
prakāśa nohiba bibhuti āmbhara, dekhibe alapa nara।
- Acyutānaṁda Dās (Tēra Janma Śaraṇa, Paṁcabiṁśa Bolī, Page- 69, Verse- 65)
While describing the glory of Lord Madhav, Saint Acyutānaṁda Dās foretold that through His blessings, even childless mothers can attain offspring and cows can produce milk without the necessity of giving birth.
The divine deeds of the Lord will remain veiled and cannot be revealed. Only a few fortunate devotees will become witnesses to these extraordinary miracles.
Brthā āḍambara na karibu rāma, kā--ṭhāre bhāba na bahi।
guru jñāna māni calibu nandana, pāmara acuti kahi।
- Acyutānaṁda Dās (Tēra Janma Śaraṇa, Paṁcabiṁśa Bolī, Page- 69, Verse- 69)
The great sage Acyutānaṁda Dās bestowed profound wisdom upon humanity, urging individuals to embrace a life of simplicity, devoid of unnecessary extravagance.
He stressed the significance of refraining from developing excessive emotional attachments to people or material possessions in the ever-evolving world.
Devotees are encouraged to find success, security, and fulfillment through the teachings of the venerable Guru Madhav Mahaprabhu, the sole guide whose wisdom illuminates the path to a purposeful and enriching life journey.