माननीय @JoshiPralhad जी जनगणना व SIR जैसे अति-महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कर्तव्य की व्यस्तता को ध्यान में रखते हुए, ब्रिज कोर्स को सेवा समाप्ति जैसी शर्तों के बजाय, केवल एक क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण के रूप में विभागीय स्तर पर ही पूर्ण करवाया जाए।
@nios@NCTE_Official@EduMinOfIndia
बी.एड. प्राथमिक शिक्षकों के हित में @UPGovt और @EduMinOfIndia से विनम्र अपील है कि NIOS और NCTE के मानकों को ध्यान में रखते हुए इस समस्या का समाधान किया जाए। ब्रिज कोर्स को तुरंत इन-सर्विस विभागीय प्रशिक्षण के रूप में लागू किया जाए। 📢#BridgeCourseToDepartmentalTraining
प्रदेश के युवाओं का हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इसी क्रम में @Uppolice में कुल 32,679 आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 के अंतर्गत निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में सभी वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए 03 वर्ष का शिथिलीकरण प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है।
यह निर्णय उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं की आकांक्षाओं और परिश्रम के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
@UPGovt अपने परिश्रमी युवाओं के सपनों के साथ पूरी प्रतिबद्धता और विश्वास के साथ खड़ी है।
सही डॉक्टर का चुनाव कैसे करें:
1.अगर किसी भी क्लिनिक या अस्पताल का प्रचार कोई social media influencer कर रहा हो तो वहाँ कभी न जाएँ।
याद रखें, मार्केटिंग के एक-एक पैसे का बोझ मरीजों पर ही पड़ता है।
अगर किसी भी क्लिनिक को प्रचार के लिए influencer की ज़रूरत पड़ रही है तो वहाँ डॉक्टरों का स्तर न्यूनतम होगा।
2.ज़्यादातर Google रिव्यू फेक रहते हैं। उस पर आँख बंद कर भरोसा न करें।
3.मरीज को क्या बीमारी है, वो बीमारी क्यों हुई, इलाज के क्या-क्या उपाय हैं, इलाज न कराने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं —
ये सारी जानकारी अगर डॉक्टर न दें या न दे पाएँ तो second opinion लीजिए।
4.किसी भी डॉक्टर का अगर अपना फार्मेसी है तो वो चाहेंगे कि आप वहाँ से दवाई लें।
ये चाहने में कोई दिक्कत नहीं।
लेकिन “दवाई यहीं मिलेगी” या “दवा यहीं से लेनी पड़ेगी” — अगर वो ये कहते हैं तो इसमें दिक्कत है।
फिर डॉक्टर बदल लीजिए।
इसी तरह अगर कोई डॉक्टर कहे कि बस उनके यहाँ की लैब की रिपोर्ट ही मान्य होगी तो ऐसे डॉक्टर से बचें।
5.इलाज की गारंटी देने वालों से दूर रहिए।
ज़्यादातर वे गड़बड़ निकलते हैं।
6.Second opinion लेने की बात पर अगर कोई डॉक्टर भड़क उठे तो वो डॉक्टर ठीक नहीं।
7.ज़्यादातर समय, ख़ासकर ICU में गंभीर मरीज के बारे में लोग अक्सर डॉक्टर से सवाल करते हैं कि मरीज़ कब तक ठीक हो जाएँगे।
इस सवाल का जवाब किसी डॉक्टर के पास नहीं होता। वो भविष्यवक्ता नहीं हैं कि भविष्यवाणी करें।
मरीज़ की स्थिति कैसी है और जो इलाज चल रहा है उससे स्थिति में क्या बदलाव आ रहा है —
अगर डॉक्टर ये अच्छे से बता रहे हैं तो ठीक है।
8.डॉक्टर की डिग्री ज़रूर देखें।
डिग्री अच्छे से उनके पर्चे पर लिखी होनी चाहिए।
9.इलाज के खर्च को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए।
10.अगर डॉक्टर कोई जाँच या दवा लिखते हैं तो ज़रूर पूछें कि वो जाँच किस लिए लिखी जा रही है।
अच्छे डॉक्टर ज़रूर बताएँगे कि किस जाँच या किस दवा का क्या उद्देश्य है।
ये सारी चीज़ें प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों पर लागू होती हैं।
सरकारी अस्पतालों में समय के अभाव के कारण डॉक्टर ज़्यादा समय नहीं दे पाते,
लेकिन जो बुनियादी चीज़ें हैं वो उन्हें भी देनी चाहिए।
भारत का संविधान सिर्फ एक किताब नहीं, यह देश के हर नागरिक से किया गया एक पवित्र वादा है।
वादा कि चाहे कोई किसी भी धर्म या जाति का हो, किसी भी क्षेत्र से आता हो, कोई भी भाषा बोलता हो, गरीब हो या अमीर, उसे समानता, सम्मान और न्याय मिलेगा।
संविधान गरीबों और वंचितों का सुरक्षा कवच है, उनकी शक्ति है और हर एक नागरिक की आवाज़ है।
जब तक संविधान सुरक्षित है, हर भारतीय के अधिकार सुरक्षित हैं।
आइए, हम प्रण लें कि हम संविधान पर किसी भी तरह का आक्रमण नहीं होने देंगे।
इसकी रक्षा करना मेरा कर्तव्य है और इसपर होने वाले हर प्रहार के सामने सबसे पहले खड़ा रहूंगा।
आप सभी को संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय हिंद, जय संविधान।