... नहीं कर सकते तुम मुझसे प्रेम
क्योंकि तुम मुझसे प्रेम के बदले प्रेम की अपेक्षा करोगे
और मैं यह नहीं कर सकती
मैं तुम्हारी अपेक्षा पर नहीं कायम रह पाऊँगी
मैं तुमसे प्रेम करूँगी ...
पर तब नहीं जब तुम मुझसे अपेक्षा करोगे!
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~ टिशा
जैसे फूल करते हैं इंतज़ार वसंत का
जी उठने के लिए
ऐसे ही मैं करता हूँ इंतज़ार तुम्हारा
खो जाने
सो जाने
बरस जाने
बिखर जाने
जी उठने के लिए।
// अंजुम शर्मा
मेरे चश्मे का फ़्रेम अब कुछ बड़ा हो गया है
लेकिन तुम्हारी उँगलियाँ इतनी दूर
कि मेरी दूर की नज़र को भी वे नज़र नहीं आतीं
कोल्हापुरी अब टूटती नहीं है
और धुँध के साथ चलना सीख लिया है मैंने
बस्स! हाथ ठंडे रहते हैं
और बायाँ कांधा…
बायाँ कांधा बहुत दुखता है सर्दियों में।
अंजुम शर्मा
जब हम प्यार करते हैं, तो स्त्री को धीरे-धीरे उस दीवार के सहारे खड़ा कर देते हैं, जिसके पीछे मृत्यु है; हम दीवार के सहारे उसका सिर टिका कर उसे सहलाते हैं, चूमते हैं, बातों में उसे बहलाते हैं, बराबर यह आशा लगाए रहते हैं—कि वह कहीं मुड़कर दीवार के पीछे न झाँक ले।