लेखक वर्ग या पाठक वर्ग दोनों को इस बात से परहेज़ नहीं रखना चाहिए कि साहित्य का उद्गम कहाँ से और कब हुआ। सबसे पहले ये स्वीकार करना आना चाहिए कि इसे हम कितना स्वयं में आत्मसात कर पाए। लेखन सुन्दर, सहज और आसान भाषा में किया जाए, जिससे किसी की भावनाएंँ आहत न हो और शब्द का अर्थ न बदले
प्रेमचंद के लेखन को आधुनिक युग और साहित्य का उद्गम माना जाता है। चूंँकि यह एक सामूहिक चर्चा का विषय है। इसे बुद्धिजीवी अपने अनुसार परिभाषित कर स्वयं को एक ज्ञानी के रूप में प्रदर्शित करते हैं।
मेरा मानना है कि जब हमें सही जगह/इंसान मिल जाता है तो हमारा ख़ाली वक़्त भरने लगता है। जैसे जब कुछ नहीं कर रहे होते तो हम सिर्फ़ प्रेम कर रहे होते हैं। प्रेम करने के बाद अंततः कुछ बचाया नहीं जा सकता।