@shayari_in_ जब महज़ इस ख़याल से पूरी रात नींद नहीं आती कि वो किसी और का तो नहीं…
तो जिस दिन ये ख़याल हक़ीक़त बनकर सामने खड़ा हो जाए कि वो सच में किसी और का है, उस रात नींद कैसे आएगी…?
तब इंसान पूरी रात जागेगा?… या फिर हमेशा के लिए सो जाएगा…?
Department of Sociology, @DDUGU_Official cordially invites you to grace the occasion by your esteemed presence in the Inaugural Session of
ICSSR sponsored Two-days National Seminar
on
'Basic Indian Social Institutions: Continuity and Change'
🗓️19 March 2024
🕙10:00 AM onwards
👇
@shayari_in_ जाते दिसंबर के साथ अब हम भी उन्हें भुला देंगे....... बीते चार वर्षों से यही सोचते हैं।।
~अब तो डर सा लगने लगा है इस दिसंबर से ....ये दिसंबर यूंही दिसंबर नहीं है!
@Imabhay9891 बचपन का तो नहीं.. लेकिन इस गाने को सुनकर याद आ गया बीतते वर्ष का एक किस्सा...वो जून का महीना..एक लड़का,उसका शहर.. उसके घर को जाती वो सड़क.. उस सड़क पर पड़ने वाला वो पुलिया..और भीड़ भाड़ से दूर उस पुलिया पर बैठी मैं..और तुम्हारी यादें..मेरे हाथों में सिगरेट की डंडी के बजाय ..con..