@Raghvendra_101 कहते हैं…
दुर्गा नौ रूपों में आती हैं,नौ रातों तक जगाती हैं,और फिर चली जाती हैं…
लेकिन मैं सोचती हूँ—
कया सचमुच चली जाती हैं?नहीं…वो तो हर उस स्त्री में रह जाती हैं,जो टूटकर भी मुस्कुराती है,जो रोकर भी किसी के आँसू पोंछती है,जो थककर भी सबको संभालती है
@Raghvendra_101 हमेशा की तरह तुम्हारे हर अल्फ़ाज़ में एक अपनापन, एक सुकून और एक अनकही-सी मिठास महसूस होती है। दुआ है कि ईश्वर तुम्हारे दिल में पलने वाले हर ख़्वाब को हक़ीक़त का आसमान दे, तुम्हारी आँखों में सजे हर सपने को खूबसूरत मुक़ाम दे और तुम्हारी ज़िंदगी को ख़ुशियों से भर दे !❣️❣️
@Raghvendra_101 ऐसे रिश्तों में ख़ामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है,
और दूरी भी अपनापन कम नहीं कर पाती।
उनकी मौजूदगी महसूस करने के लिए
न आवाज़ चाहिए, न कोई वादा—
बस दिल का सच्चा होना काफ़ी है।❣️❣️
@RadhaSwara@ek_kash86 जब यह भी समझ न आए कि
आख़िर उस व्यक्ति से ही प्रेम क्यों है,
उसकी कौन-सी बात दिल को छू गई,
किस पल उसने भीतर कोई जगह बना ली—
और फिर भी मन उसे अपना मानता रहे…
वही प्रेम है।
क्योंकि जहाँ कारण होता है, वहाँ पसंद होती है,
और जहाँ कोई कारण ही नहीं बचता—
वहीं से प्रेम शुरू होता है।
@Raghvendra_101 मैं तो तुम्हें ख़ुश देखना चाहती हूँ और तुम्हें पढ़ते रहना , पता नहीं क्यों अजीब सा इत्तेफ़ाक़ है तुम्हारे शब्दों में मुझे मेरी कहानी साफ़ साफ़ दिखती है , कभी बात हुई तो बता पाऊँगी ईश्वर ने चाहा तो ! 🙏😍
@Raghvendra_101 बस थोड़ी देर हमारे साथ बैठा रहे।
क्योंकि कुछ दर्द इलाज नहीं माँगते,
सिर्फ़ एक अपना-सा कंधा माँगते हैं…
और कभी-कभी किसी के सामने दिल खोल देना ही
खुद को फिर से थोड़ा-सा समेट लेने जैसा होता है।❤️❤️
@Raghvendra_101 मैं समझती हूँ—
ज़िंदगी में हर कोई अपने हिस्से का बोझ उठाए हुए है,
हर चेहरे के पीछे कोई अनकही कहानी है,
कोई ऐसा दर्द है जिसे वह दुनिया से छुपाकर चलता है।
इसलिए हर बार समाधान नहीं चाहिए होता,
कभी-कभी बस कोई ऐसा चाहिए होता है
जो हमारी बात सुने…
बिना जज किए, बिना सलाह दिए,….
@Raghvendra_101 शायद इसलिए कि दर्द, प्रेम, तन्हाई और एहसास की कोई अलग ज़ुबान नहीं होती…
जो दिल से निकलता है, वह किसी न किसी दिल तक पहुँच ही जाता है। तुम्हारी लेखनी भी ऐसी ही है अच्छा लगा तुम फिर आ गए , वरना ऐसा लग रहा था की कुछ तो मिस है ❤️❤️❤️❤️❤️