मैडम अब ये सब ना किया करें... because it is not looking COOL & bankers are not FOOL.... para wise reply of your LIE 👇
वित्त मंत्रालय की अपील दिनांक 21.09.2026 का जवाब
3-दिवसीय हड़ताल 28-30 सितंबर 2026 क्यों ज़रूरी है - आम जनता के नाम
1. सरकार का दावा: PLI योजना स्थगित
हकीकत: मांग वापस लेने की थी, स्थगित करने की नहीं। स्थगित का मतलब है - कभी भी वापस लाया जा सकता है। PLI बीमा बेचने के टारगेट से जुड़ा है।
2. सरकार का दावा: 10 साल में 4,82,800 भर्ती, 95.84% अधिकारी पद पर
हकीकत: बिजनेस 56% बढ़ा - 181.5 लाख करोड़ (2022) से 283.3 लाख करोड़ (2026) हो गया। 1.2 लाख लोग इसी दौरान रिटायर हुए। 4.8 लाख सिर्फ बदली भर्ती है। आज भी ∼1.5 लाख क्लर्कों की कमी है।
3. सरकार का दावा: स्टाफ कल्याण निधि 56% बढ़ी
हकीकत: कल्याण निधि सरकारी पैसा नहीं है। यह हमारे अपने मुनाफे का 3% से 4.5% हिस्सा है। सरकारी बैंकों ने FY26 में 1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया, NPA *1.9% - ऐतिहासिक सबसे कम* [DFS PIB 28 जुलाई 2026]। अपना ही पैसा वापस देना एहसान नहीं।
4. सरकार का दावा: वेतन बढ़ा, नवंबर 2027 के लिए जल्दी वार्ता
हकीकत: 12वां द्विपक्षीय समझौता 01.11.2022 को देय था, 28 महीने की देरी से मार्च 2024 में हुआ। जल्दी वार्ता एक इरादा है, समझौता नहीं।
5. सरकार का दावा: दूसरा-चौथा शनिवार छुट्टी दिया, बाकी शनिवार जनता के लिए जरूरी
हकीकत: RBI, LIC, NABARD, DFS खुद 5 दिन काम करते हैं। सिर्फ PSB/RRB 6 दिन। IBA-UFBU समझौता *07.12.2023* में 5-दिवसीय बैंकिंग की सिफारिश हुई - 21 महीने से DFS के पास लंबित है।
6. सरकार का दावा: 30 सितंबर क्लोजिंग पर हड़ताल से जनता को परेशानी
हकीकत: नोटिस 22 अगस्त को दिया गया - 38 दिन पहले। सिर्फ 1 सुलह बैठक हुई। 3 दिन की परेशानी, गांव की शाखा के हमेशा बंद होने से बेहतर है।
सरकारी स्रोत:
- PIB Fact Check 16.09.2026: GSR 612(E) दिनांक 15.09.2026 विलय का नोटिफिकेशन *फर्जी* है
- लोकसभा में सरकार का जवाब: PSB विलय का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं
- DFS अपील दिनांक 21.09.2026 Release ID 2313186
अपील: 28-30 सितंबर की 3-दिवसीय हड़ताल का समर्थन करें। हड़ताल के दौरान UPI/ATM का उपयोग करें। जनता का पैसा, जनता के बैंक में ही सुरक्षित है।
6 Crore Legal Cases are pending in Indian Courts, still Supreme Court & High Courts work in 5 Days Work week. But Govt never asked them to Work 6 Days week due to Critical & Essential Services!
Hypocrisy!!!
𝗧𝗛𝗘 𝟱-𝗗𝗔𝗬 𝗕𝗨𝗥𝗘𝗔𝗨𝗖𝗥𝗔𝗧 𝗩𝗦. 𝗧𝗛𝗘 𝟲-𝗗𝗔𝗬 𝗕𝗔𝗡𝗞𝗘𝗥
𝗪𝗵𝗲𝗻 𝘄𝗼𝗿𝗸𝗲𝗿𝘀 𝗮𝘀𝗸 𝗳𝗼𝗿 𝟱 𝗱𝗮𝘆𝘀, 𝘁𝗵𝗲 𝗪𝗮𝗿 𝗥𝗼𝗼𝗺 𝗴𝗲𝘁𝘀 𝗮𝗰𝘁𝗶𝘃𝗮𝘁𝗲𝗱
The irony is difficult to ignore.
Central Government offices follow a 5-day working system.
But public-sector bank employees continue with alternate Saturdays, endless campaigns, targets, audits, recovery drives and compliance work.
And when bankers demand 5-day banking, suddenly the language becomes:
“Continuity of essential services.”
“Public interest.”
“Critical infrastructure.”
“War Room.”
“Monitoring Committee.”
Three days of strike — and the entire machinery is mobilised.
But years of unresolved employee issues?
Silence.
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𝗔𝗡𝗗 𝗧𝗛𝗘𝗥𝗘 𝗜𝗦 𝗠𝗢𝗥𝗘.
Where is the same urgency on the question of PLI?
If employees are expected to deliver every target, improve every number and carry every campaign, why shouldn't employees receive a fair and equitable performance-linked incentive structure?
𝗣𝗥𝗢𝗙𝗜𝗧𝗦 𝗔𝗥𝗘 𝗦𝗛𝗔𝗥𝗘𝗗.
𝗪𝗛𝗬 𝗦𝗛𝗢𝗨𝗟𝗗 𝗧𝗛𝗘 𝗪𝗢𝗥𝗞𝗘𝗥 𝗕𝗘 𝗟𝗘𝗙𝗧 𝗕𝗘𝗛𝗜𝗡𝗗?
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𝗔𝗡𝗗 𝗪𝗛𝗔𝗧 𝗔𝗕𝗢𝗨𝗧 𝗧𝗛𝗘 𝗣𝗨𝗕𝗟𝗜𝗖 𝗦𝗘𝗖𝗧𝗢𝗥 𝗕𝗔𝗡𝗞𝗦?
Employees are repeatedly told:
“Public interest.”
“Financial inclusion.”
“Nation building.”
But at the same time, debates continue over privatisation, strategic disinvestment and greater foreign participation in Indian banking.
So the banker is expected to sacrifice weekends for the public sector, while the future ownership and role of those very institutions remains a matter of policy debate.
𝗣𝗨𝗕𝗟𝗜𝗖 𝗦𝗘𝗖𝗧𝗢𝗥 𝗕𝗔𝗡𝗞𝗦 𝗔𝗥𝗘 𝗡𝗢𝗧 𝗝𝗨𝗦𝗧 𝗕𝗔𝗟𝗔𝗡𝗖𝗘 𝗦𝗛𝗘𝗘𝗧𝗦.
They are institutions carrying financial inclusion, government schemes, agricultural credit, MSME finance and millions of ordinary customers.
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And then comes the funniest part:
ATM gets a contingency plan.
Currency Chest gets a contingency plan.
Data Centre gets a contingency plan.
UPI gets a contingency plan.
But the banker gets another Saturday.
Maybe the real War Room should ask a different question:
Why has 5-day banking taken so long?
Why is equitable PLI still an issue?
What is the long-term future of PSBs?
And why should public-sector banks be treated merely as assets to be restructured, diluted or potentially sold, rather than institutions built around public service?
𝗖𝗢𝗡𝗧𝗜𝗡𝗨𝗜𝗧𝗬 𝗢𝗙 𝗕𝗔𝗡𝗞𝗜𝗡𝗚 𝗠𝗔𝗧𝗧𝗘𝗥𝗦.
So does continuity of dialogue, fair PLI, employee dignity and a clear commitment to strong public-sector banking.
𝟱-𝗗𝗔𝗬 𝗕𝗔𝗡𝗞𝗜𝗡𝗚.
𝗘𝗤𝗨𝗔𝗟 𝗣𝗟𝗜.
𝗦𝗧𝗥𝗢𝗡𝗚 𝗣𝗦𝗕𝗦.
These are employee and public-interest questions — not merely strike questions.
#5DayBanking #EqualPLI #PublicSectorBanks #PSBs #BankEmployees
@dharmendrpatel_ Salary disbursing authority ko intimate karna hota h taki in case of default wo appropriate kar k bhejega EMI. Ye letter aap khud sign karte hain documentation k time me
🧵 How Bihar's Soft Power is Fueling Japan's Billion-Dollar Infrastructure Push in India
To those who call Bihar a “burden”—
Japan has invested ₹3.2+ lakh crore ($40B+) in India’s metros, bullet trains & highways
What connects Japan to India spiritually & diplomatically? Bihar.
Good Step - Bihar Police has appealed for cooperation in completely stopping the broadcast of double meaning/obscene songs in Bhojpuri, Magahi, Maithili, Hindi and other languages at public places/sites.
जितने लोगों को ये लग रहा है की मोदी जी ने पक्षपात किया है | वो योजना वहाँ दे दी ये योजना वहाँ दे दी | हमें ये नहीं दिया हमें वो नहीं दिया | यही बात 1955 के आसा पास होती थी जब एक पॉलिसी के अंतर्गत नेहरू ने बिहार का खनिज पूरे देश में एक दाम में कर दिया था और औद्योगिक घरानो को फायदा पहुंचाया, उस पॉलिसी का नाम था Freight Equalisation System. जिस बिहार के इंडस्ट्रियल इलाकों को कभी रूर (जर्मनी का सबसे औद्योगिक इलाका था) ऑफ़ इंडिया कहा जाता था वो सब बर्बाद हो गए | डालमियनगर से लेकर आज के झारखण्ड और बहुत से इंडस्ट्रीज |
मोदी नेहरू दिक्कत नहीं है | हम दिक्कत है आओ दिक्कत है बिहार के | नितीश लालू जगन्नाथ मिश्र कर्पूरी ठाकुर महामाया प्रसाद और दरोगा राय दिक्कत नहीं है बिहार के | बिहार का वो वर्ग दिक्कत है जो अपनी जाति के श्रेष्ठता में रहता है और दूसरों को दबाता है | बिहार में एक चीज़ देखियेगा बड़ी जाती वाले अपनी जाती में भी अपने आपको सर्वश्रेष्ठ बता देता है और दूसरी बड़ी जाती को टेढ़ी दृष्टि से देखेगा | दूसरी बात हर जाती अपने से नीचे वाली जाती ढूंढ लेती है |
आपने हमेशा सुना होगा अरे राजेंद्र प्रसाद बिहार से थे, जय प्रकाश नारायण बिहार से थे, दिनकर रेनू, बॉलीवुड में देखो हमारा बिहारी चमक रहा है | हज़ारों आईएएस देने वाला राज्य | IIT में इंजीनियरों की झड़ी लगाने वाला बिहार |
जय बिहार , एक बिहार सब पर भारी और बता नहीं कितनी बातें |
बिहार गरीब ही रहा | गरीब भ्रष्ट ही रहा | पिछड़ा ही रहा | 1835 से पहले मुगलकाल में मजदूरों से काम करवाने के लिए पूर्वांचली और बिहार के पश्चिम इलाकों से लेबर ले जाकर सुदूर जगहों पर बसाते थे | अमरीका में जब स्लेवरी का कानून बना तो अंग्रेजों ने 1835 में नया तरीका खोजा और indentureship/गिरमिट (एग्रीमेंट का अपभ्रंश) नाम से नए तरीके की आधुनिक गुलामी करवाई | इसपर कई लोक गीत हैं जैसे
"मिर्जापुर कईलअ गुलजार हो..."
"रेलिया बैरन पीया को लिए जाए रे.."
हमारे इलाके में क्यूंकि गन्ने की खेती कमाल की थी उसी वजह से छपरा के धरहरा में पहिला चीनी मिल खुला | कलकत्ता राजधानी थी 1911 तक और बिहार बंगाल का हिस्सा था तो लाखों बिहारी वहाँ बसे और तरक्की देखि उन्होंने |
जब दिल्ली राजधानी हुई तो बिहारियों का जाना दिल्ली की तरफ हुआ | हम बस भागे और सब भागे | हमारा पलायन शारीरिक से ज्यादा मानसिक है |
लेकिन भाई दोस्त भइया बहन मित्र एक बार इंट्रोस्पेक्ट करो ना | मतलब अंतर्मन में देखो | अंदर झांको, बिहार में झांको | मुश्किल है लेकिन देखो | खोलो आँख |
किस राज्य युवा बिहार में नहीं रहना चाहते - बिहार के।
किस राज्य के युवा बिहार की भाषा नहीं बोलना चाहते - बिहार के।
किस राज्य का खाना बिहार के रेस्टोरेंट में नहीं मिलता - बिहार का
किस राज्य में उसकी भाषा का रेडियो नहीं है - बिहार में
किस राज्य में उसकी भाषा का अखबार नहीं है - बिहार में
किस राज्य में उसकी भाषा का टीवी चैनल ऑफिस नहीं है - बिहार में
किस राज्य के स्कूलों में बिहार की भाषाएँ नहीं पढ़ाई जातीं - बिहार में
किस राज्य के बड़े क्रिकेटर बिहार से नहीं खेलेंगे - बिहार के
किस राज्य के अच्छे फिल्म निर्माता, बिहार की भाषाओं में सिनेमा नहीं बनते - बिहार के
किस राज्य में उनकी भाषाओँ पर रोजगार नहीं मिलता - बिहार में
किस राज्य में बिहार के लोगों के साथ अच्छा नहीं होता - बिहार में।
किस राज्य में बिहारियों के लिए सबसे कम काम के अवसर हैं - बिहार में
किस राज्य के बुद्धिजीवियों और अमीर लोगों को बिहार की कोई चिंता नहीं है - बिहार की
बिहार के माता पिता किस राज्य में अपने बच्चों को 12वीं क्लास के बाद नहीं रखना चाहते - बिहार के
किस राज्य के मल्टीप्लेक्स में बिहार की भाषाएं, फिल्में रिलीज नहीं होतीं - बिहार की
किस राज्य में बिना किसी बात का छाती चौड़ा किया जाता है - बिहार में
किस राज्य में लाखों लोग अपने ही मातृभाषा के अश्लील गांव पर नाचते हैं - बिहार के
किस राज्य के लाखों लोग वहाँ के अश्लील गायकों को अपना भगवान् मानते हैं - बिहार के
किस राज्य के पढ़े लिखे संभ्रांत वर्ग के परिवार अपने बच्चों को बचपन से ही बिहार की भाषाओं से दूर रखा जाता है - बिहार के किस राज्य के नेता मंत्री बिहार के बारे में नहीं सोचते - बिहार के किस राज्य के बड़े साहित्यकार बिहार की भाषाओं में कुछ नहीं लिखते - बिहार के
किस राज्य में लोग अपनी जाति के दम्भ में ज्यादा रहते हैं - बिहार के
जाति का दम्भ होने के बावजूद किस राज्य में लोग अपनी जाति वाले के लिए कुछ नहीं करते - बिहार के
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बाकी आप सोचिये दिक्कत कहाँ क्या है ?
हमें बिहार से इश्क़ क्यों नहीं होता | इश्क़ करो और शुरू करो अपनी मातृभाषाओं से, भोजपुरी मैथिली मगही से शुरू करो |
@Bihar_se_hai Maharashtra me v South Wale ko lungiwala bol k bhagaya jata tha 1 jamane me. Ab dekho lungiwala v Bihari ko bol rhe h. Kisko badalne ki jarurat h?
@IndexBihar Govt is planning to turn Barauni refinery complex into petrochemical complex. This will help in setting up of plastic n related manufacturing industries. Many factory also use petrochemicals as their raw materials
Imagine how confused bird Turkey is. There are no native Turkey in Turkey. But named after Turkey only. In Turkey they don’t call them Turkey. They call them Hindi. Turks thought it was an Indian bird, so mistakenly started calling them Hindi. Pic Wiki.
In English it's called turkey
Turkey calls it hindi
In Hindi it's called Peru pakshi
Arabs call it Roman bird
Greeks call it French bird
French call it poulet d inde (Indian chicken)
Japanese call it Chinese bird
Dutch call it Calicut hen