न्यूयॉर्क में सुबह उठकर अर्नब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के बारे में सुना और देखा।हैरत भी हुई,दुख भी हुआ और ग़ुस्सा भी आया।हो सकता है उनके अंदाज़ से कुछ लोग सहमत न हों पर उनके साथ ऐसा व्यवहार लोकतंत्र के लिए हानिकारक भी है और निंदनीय भी। उम्मीद करता हूँ उन्हें जल्द रिहा किया जाएगा।