PanchayatSahayak का धैर्य और संघर्ष उनकी समस्याओं की गंभीरता को दर्शाता है। माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, मामले को और बिगड़ने से पहले हस्तक्षेप करें तथा नियमितीकरण और वेतनमान पर स्पष्ट नीति बनाएं।🙏🙏🙏🙏
@myogiadityanath@oprajbhar#Regularize_UPPanchayatSahayak
मंत्री ओम प्रकाश राजभर जी और मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से आग्रह है कि PanchayatSahayak की आवाज को गंभीरता से सुनें। कर्मचारियों को बार-बार सड़कों पर उतरने की नौबत न आए, इसके लिए नियमितीकरण और वेतनमान पर ठोस कदम
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पंचायत सहायकों ने उठाई बेहतर मोबाइल और वाई-फाई रिचार्ज की मांग
#हरदोई। विकासखंड टड़ियावां के पंचायत सहायकों ने शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं ऑनलाइन कार्यों के सुचारू संचालन के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मोबाइल फोन उपलब्ध कराने तथा प्रत्येक माह वाई-फाई रिचार्ज की सुविधा दिए जाने की मांग की है।
पंचायत सहायकों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में ऑनलाइन कार्यों के संपादन के लिए विभिन्न सरकारी ऐप और पोर्टल का नियमित रूप से उपयोग करना पड़ता है। वर्तमान में उपलब्ध मोबाइल फोन की गुणवत्ता पर्याप्त न होने के कारण फोन बार-बार हैंग हो जाता है। वहीं, एक साथ कई सरकारी ऐप संचालित करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पंचायत सहायकों ने खंड विकास अधिकारी, टड़ियावां को प्रार्थना पत्र देकर मांग की है कि उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले मोबाइल फोन उपलब्ध कराने के साथ ही प्रत्येक माह वाई-फाई रिचार्ज की सुविधा प्रदान की जाए, ताकि ऑनलाइन सरकारी कार्यों का समयबद्ध और सुचारू रूप से संचालन हो सके।
#रिपोर्ट:विनय गुप्ता/द टेलीकास्ट न्यूज
@UPGovt@CMOfficeUP@dmhardoi@ChiefSecyUP
सचिवालय और शौचालय दोनों को बराबर मान लिया है यूपी पंचायती राज विभाग ने, तभी तो PanchayatSahayak और केयरटेकर दोनों की सैलरी 9000 है! #सचिवालय_शौचालय_एक_सामान
पंचायत सहायक लगातार अपनी जिम्मेदारी समय से ग्राम वासियों तक पहुंचा रहे हैं।
Online, offline कार्य समय से कर रहे हैं।
लेकिन पंचायत सहायक अपनी घर की स्थिति सही नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि अल्प मानदेय में क्या कर सकते हैं?
#सचिवालय_शौचालय_एक_समान
उत्तर प्रदेश में लगातार धरनारद पंचायत सहायकों की मांग जायज है,
आप ऐसे बधुआ मजदूर की तरह उन्हें नहीं रख सकते हैं,
पंचायत सहायकों के सम्मान में उनकी सैलरी में तत्काल वृद्धि की जानी चाहिए,
सरकार को जल्द यह सुनिश्चित करना चाहिए।
वाह रे डिजिटल इंडिया! गांव की हर ऑनलाइन एंट्री, पोर्टल का चक्कर और बाबूगीरी का पूरा ठेका पंचायत सहायक के हवाले, और बदले में ऐसा मानदेय मिलता है कि चाय-पकोड़े का बिल भी मुश्किल से निकले।
सरकार की नजर में शायद हम 'फ्रीलांस समाजसेवी' हैं!
#पंचायत_सहायक_संघर्ष