@Dineshs1592@PMOIndia@narendramodi आयुर्वेद एवं आयुष उपचार के माध्यम से लाखों लोग बिना ऑपरेशन, बिना चीड़-फाड़ के कई गंभीर रोगों को रिवर्स कर रहे हैं! आयुष्मान योजना में आयुर्वेद व आयुष पद्धतियों को शामिल किया जाए ताकि प्रत्येक भारतीय को इसका लाभ मिल सके
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आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी आपसे अपील है कि 26 जनवरी 2024 के दिन देश के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए यह गिफ्ट दें कि आयुष्मान योजना में आयुर्वेद एवं अन्य आयुष पद्धतियों को शामिल किया गया है!
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आयुष पद्धतियों के लाखों डॉक्टर्स एवं रिसर्च से जुड़े लोगों के विभिन्न प्रयासों से कई तरह की वैज्ञानिक एवं क्लीनिकल रिसर्च की जा रही है, जिससे यह प्रमाणित हो रहा है कि गंभीर बीमारियों जैसे किड़नी, कैंसर, आदि में यह पद्धतियां प्रभावशाली हैं।
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आयुष पद्धतियों के लाखों डॉक्टर्स एवं रिसर्च से जुड़े लोगों के विभिन्न वैज्ञानिक एवं क्लीनिकल रिसर्च की जा रही है, जिससे यह प्रमाणित हो रहा है कि गंभीर बीमारियों जैसे किड़नी, कैंसर, आदि में यह पद्धतियां प्रभावशाली हैं।
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आयुर्वेद एवं आयुष उपचार के माध्यम से लाखों लोग बिना ऑपरेशन, बिना चीड़-फाड़ या टांके के हानिरहित तरीके से व सस्ती उपचार दरों के माध्यम से कई गंभीर रोगों में लाभ ले रहे हैं! आयुष्मान योजना में आयुर्वेद व आयुष पद्धतियों को शामिल किया जाए।
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किड़नी फेल की समस्या में डायलिसिस या किड़नी ट्रांसप्लांट करना फैशन बनता जा रहा है वहीं आयुर्वेद, नेचुरोपैथी आदि आयुष पद्धतियों के माध्यम से आहार, पंचकर्म पद्धतियों से सरलता से इस दिक्कत में लाभ मिलता है।
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आयुष पद्धतियों के लाखों डॉक्टर्स एवं रिसर्च से जुड़े लोगों के विभिन्न प्रयासों से कई तरह की वैज्ञानिक एवं क्लीनिकल रिसर्च की जा रही है, जिससे यह प्रमाणित हो रहा है कि गंभीर बीमारियों जैसे किड़नी, कैंसर, आदि में यह पद्धतियां प्रभावशाली हैं।
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आयुर्वेद एवं आयुष उपचार के माध्यम से लाखों लोग बिना ऑपरेशन, बिना चीड़-फाड़ या टांके के हानिरहित तरीके से व सस्ती उपचार दरों के माध्यम से कई गंभीर रोगों में लाभ ले रहे हैं! आयुष्मान योजना में आयुर्वेद व आयुष पद्धतियों को शामिल किया जाए।
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आयुर्वेद एवं आयुष उपचार के माध्यम से लाखों लोग बिना ऑपरेशन, बिना चीड़-फाड़ या टांके के हानिरहित तरीके से व सस्ती उपचार दरों के माध्यम से कई गंभीर रोगों में लाभ ले रहे हैं! आयुष्मान योजना में आयुर्वेद व आयुष पद्धतियों को शामिल किया जाए।
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कोरोना के समय में अंग्रेजी पद्धतियों से नहीं आयुर्वेद एवं आयुष पद्धतियों के प्राकृतिक उपचार के तरीकों से लाखों लोगों को फायदा हुआ था। इसलिए देश की स्वदेशी पद्धतियों को आयुष्मान योजना में शामिल किया जाना चाहिए।
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@makalesh_meena@narendramodi@PMOIndia घुटने की तकलीफ बढ़ने पर घुटने के ट्रांसप्लांट/ रिप्लेसमेंट करवाने की ओर अस्पतालों का जोर होता है, लेकिन इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति यदि आयुर्वेद की पंचकर्म प्रक्रिया "जानू बस्ति" करवाता है तो उसके घुटने बिना ऑपरेशन के ही सही होने लगते हैं।@narendramodi@PMOIndia#AyushinAyushman
@makalesh_meena@narendramodi@PMOIndia घुटने की तकलीफ बढ़ने पर घुटने के ट्रांसप्लांट/ रिप्लेसमेंट करवाने की ओर अस्पतालों का जोर होता है, लेकिन इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति यदि आयुर्वेद की पंचकर्म प्रक्रिया "जानू बस्ति" करवाता है तो उसके घुटने बिना ऑपरेशन के ही सही होने लगते हैं।@narendramodi@PMOIndia#AyushinAyushman
आयुष्मान योजना में आयुर्वेद, योग, यूनानी, होम्योपैथी, सिद्ध आदि सभी आयुष पद्धतियों के माध्यम से अपनी बीमारी का इलाज करवाने का अधिकार भी देश के नागरिकों को दिया जाए!
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रीढ़ की हड्डी में L5, S1 आदि में कोई दिक्कत बढ़ती है तो अस्पतालों में तुरंत ऑपरेशन करवाने की सलाह दे देते हैं, जबकि आयुर्वेद में पंचकर्म की "कटि बस्ति या पृष्ठ बस्ति" प्रक्रिया करवाने से बिना ऑपरेशन के ही रीढ़ की हड्डी सही होने लगती है।
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