#RakhiWithGuruSiyag
"यह अद्वितीय दिव्य ज्ञान तो मात्र सनातन धर्म, वेदान्त दर्शन की ही देन है। विश्व के बाकी धर्म बौद्धिक तर्क एवं शब्द जाल के जंजाल में फंसाकर ईश्वर की सत्ता का आभास दिलाने का प्रयास मात्र करते हैं। वे कोई
प्रमाण नहीं दे सकते।💯
दीक्षा प्राप्त किए बिना मनुष्य को उस परमसत्ता की प्रत्यक्षानुभूति हो ही नहीं सकती। इस सिद्धान्त को ईसाई दर्शन भी पूर्णरूप से स्वीकार करता है। गुरु से दीक्षा लेकर यीशु द्विज बना था। इसीलिए उसने इस्राएलियों के धर्म गुरु निकुदेमुस को कहा- "मैं तुझसे सच्च-सच्च कहता हूँ, यदि कोई नये सिरे से न जन्में तो परमेश्वर का राज्य
देख नहीं सकता।"🌹🌹
#SpiritualRakhiThroughGSSY What was true before is no longer true in this age. The difficult, time consuming & elaborate rituals/ fire sacrifices or austerities of an earlier age cannot be carried out by the practitioners of today. So Gurudev Siyag's Siddhayoga fulfills this need
Om Shri Gangai Nathay Namah
Baba Gangai Nath [Mahāyogī Baba Shri Gangai Nath Ji Maharaj (Brahmaleen)] is the sponsor of this. Do you understand it or not? I never believed in the idea of a sponsor. I never did. But now, you see - the Nine Nathas are immortal. This is according to the Kashmir Shaivism tradition, Do you understand it or not?
Nowadays, the moment people hear the name Kashmir, they start talking about the conflict between Hindus and Muslims. But according to Kashmir Shaivism, God performs five functions: Śrishti (creation), Sthiti (preservation), Laya (dissolution), Tirodhāna (concealment), and Anugraha (grace). And Anugraha—the fifth function—is the work of the Guru.
Kalki Avatar Sadguru Shri Ramlal Ji Siyag
Adhyatma Vigyan Satsang Kendra, Jodhpur
Near Hotel Leria
Rajasthan,(342001), India
Phone +91- 291- 2753699
+91- 9784742595
https://t.co/lTDK7YqjJB
#kundalini #gurusiyagmantra #sleepmusic #thirdeye #radhakrishna
#OnamSpecial26#SpiritualRakhiThroughGSSY
🍀No struggle to control the mind,
no pressure of difficult practices,
no burden of rigid discipline.
Just begin the Naam Jap…
and then the practice of GSSY itself starts guiding you..🧘♀️
🍀Your breath becomes calm on its own,
your mind begins to settle naturally, and a deep, unknown peace starts flowing within.
This is the grace of the Guru Siyag’s
where effort fades, and experience deepens.🪷
#JoinGuruPurnimaWithGSSY
🧘♀️पातंजलि योगदर्शन में साधनापाद के २१ वें श्लोक में योग के आठ अंगों यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि का वर्णन है।
बौद्धिक प्रयास से इस युग में उनका पालन करना असम्भव है।
🧘♀️परन्तु गुरू-शिष्य परम्परा में शक्तिपात-दीक्षा से कुण्डलिनी जागृत करने का सिद्धान्त है।
सद्गुरुदेव साधक की शक्ति (कुण्डलिनी) को चेतन करते हैं। वह जागृत कुण्डलिनी साधक को उपर्युक्त अष्टांगयोग की सभी साधनाएं स्वयं अपने अधीन करवाती है।
🧘♀️इस प्रकार जो योग होता है उसे सिद्धयोग कहते हैं। यह शक्तिपात केवल समर्थ सदगुरु की कृपा द्वारा ही प्राप्त होता है इसलिये इसे सिद्धयोग कहा जाता है जबकि अन्य सभी प्रकार के योग मानवीय प्रयास से होते हैं।
#BrainTumorFreeCure_GSSY
"ये एक ऐसा विधि है, विधान है, हमारे भारतीय दर्शन का, जिसे बहुत आश्चर्य से देख रहा है विज्ञान, समझे। ध्यान की स्थिति में। भौतिक साइंस कहता है कि जो शब्द बोला गया है वो ब्रह्मांड में रहता है, नष्ट नहीं होता और कुरुक्षेत्र में अभी भी वो प्रयास कर रहे हैं, मगर वो सुन नहीं पा रहे हैं। हमारा योग कहता है, जब आवाज है, तो बोलने वाला देखा सुना जा सकता है, उसको बोलते हुए देखा सुना जाना संभव है, वो तो घटना घट चुकी, वो तो replay दिखाना है, हमारा योग कहता है अभी जो शब्द नहीं बोला गया, अभी जो घटना नहीं घटी, उसको पहले देखा सुना
जा सकता है, समझे।"
***मगर मैं जो दीक्षा देता हूँ, उसके बाद में आप आराधना करोगे तो पंतजलि योगदर्शन में वर्णित सभी सिद्धियाँ मेरे साधकों को हो रही हैं,
उसमें जितनी भी सिद्धियोंका वर्णन है।
वह सभी प्रकार का परिवर्तन मेरे
शिष्यों में आ रहा है। ***🌹🌹
#GuruPurnima
हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक अनकही कहानी होती है।
कोई तनाव से लड़ रहा है, कोई भय से, कोई अकेलेपन से।
ऐसे समय में गुरु सियाग सिद्ध योग का नियमित ध्यान मन को स्थिर करने और जीवन में आशा का संचार करने का माध्यम बन सकता है।
भीतर शांति हो, तो बाहर की आँधियाँ भी कमजोर पड़ने लगती हैं।
ॐ श्री गंगाई नाथाय नमः
अब मैं आपको, एक खेचरी मुद्रा और लगती है इसमें मैं भूल गया बताना, गोरखनाथ जी ने कहा है, "गगन मंडल में ऊंधा कुआं, तहां अमृत का वासा, सुगुरा होई सो भरी भरी पीबे निगुरा जाई पियासा।।" तो इस प्रकार आपकी इच्छा के बिना कोई योग नहीं होगा। ध्यान करने बैठोगे तो योग होगा, चलते फिरते योग नहीं होगा, पहले तो आंख बंद करके, फिर खुली आंख में ध्यान लग सकता है। फिर आपको नाद भी सुनाई, आखिर में नाद भी सुनाई देने लगेगा, कान में, झींगुर की आवाज, चिड़ियाओ की चहचहाट, बंसी, वो अपने प्रारब्ध कर्म के अनुसार, समझे नहीं समझे।
कल्कि अवतार सद्गुरु श्री रामलाल जी सियाग द कॉमफॉर्टर
अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, होटल लेरिया के पास, चौपासनी
जोधपुर, राजस्थान (342001), भारत
फोन +91- 291- 2753699
+91- 9784742595
https://t.co/lTDK7YqjJB
#kundalini #gurusiyagmantra #sleepmusic #spiritual #radhakrishna