दिल्ली पुलिस का सख्त एक्शन। 🔥
PTI के अनुसार, CJP प्रदर्शन के दौरान हिंसा में सीधे तौर पर शामिल लोगों के पासपोर्ट रद्द किए जा सकते हैं।
CCTV फुटेज, वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। अपने ही देश में अराजकता फैलाकर विदेश में छिपने का रास्ता आसान नहीं होगा।
हर कार्रवाई के परिणाम होते हैं। और कृपया यह ज्ञान मत दीजिए कि इन लोगों का भविष्य खराब हो जाएगा क्योंकि ये किसी राजनीतिक नेतृत्व के बहकावे में आ गए। ये 2-3 साल के बच्चे नहीं हैं जिन्हें चॉकलेट देकर बहकाया गया हो। इन्हें अपने कृत्यों के संभावित परिणामों का अंदाज़ा था, फिर भी इन्होंने वही रास्ता चुना।
अब उन्हें अपने निर्णय के परिणामों का सामना करना होगा।
अब दादा “सिग्नल” दे रहे हैं -🔥
पूरे बंगाल के मदरसों का पैसा रोक दिया, और अब सारे मदरसों की जाँच होगी, और अवैध मिले तो कार्यवाही होगी।
मैं मुख्यमंत्री हूं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता, पर मौसम बदल रहा है और आने वाले दिनों में यह और भी बदलेगा।
@brajeshpathakup पाठक जी सदाचारी, और निष्कपट भी विकल्प हैं पंडित को भी एक विकल्प की तरह लिया जाए।
तीनों का अर्थ अवसरवादी नहीं होता। जो गलत विकल्प चुनेगा उसको नंबर नहीं मिलेगा, इसमें विरोध दर्ज कराने में उर्जा मत खर्च करिए। विरोध करना है तो UGC का विरोध करिए। UGC से ध्यान न भटकाएं।
किसने सोचा होगा कि तीसरा विश्व युद्ध इन देशों के बीच लड़ा जाएगा:
एक तरफ़ होंगे
अमेरिका + इज़राइल + यूएई + बहरीन + सऊदी अरब + कतर + कुवैत
दुसरी तरफ होंगे
ईरान + पवन खेड़ा + इल्हान उमर + स्वरा भास्कर + राणा अय्यूब😆😆
अविमुक्तेश्वरानंद ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को विकलांग होने के कारण संन्यासी मानने से मना कर दिया है।
जगद्गुरु जी तो केवल नेत्रहीन हैं, पर क्या स्वघोषित शंकराचार्य यह बताएँगे की अष्टावक्र जी संन्यासी थे या नहीं?
ये आदमी सबको अहंकारी बता रहा है, पर स्वयं का अहंकार अथाह है!
देश के आदरणीय प्रधानमंत्री जी #ParikshaPeCharcha करेंगे तो उस चर्चा में सामान्य वर्ग के छात्र, अध्यापक और पेरेंट्स मोदीजी जी अवश्य पूछे कि सामान्य वर्ग का बच्चा अधिक नंबर पाने के बाद भी अयोग्य कैसे होते हैं, पिछड़ा और दलित से पहले बुड्ढा कैसे होते हैं?
पकड़े जाने तक Repost हिन्दुओं ✊
ये वही जिहादी सलमान है जिसने कल दिल्ली पुलिस पर हमला करने के लिए लोगों को बुलाया
और दिल्ली में आतंकी हमला करने वाले आतंकियों को पनाह देने वाली अवैध मस्जिद को लेकर अफवाह फैलाई...
आपका एक रिपोस्ट इस जिहादी को गिरफ्तार
करवाने में मदद करेगा ✊
ऐश्वर्या सिंह सेंगर @SengarAishwarya
उन्नाव की इस बिटिया को आने वाले समय मे उस बेटी के रूप मे याद किया जायेगा
जिसने तब अपने पिता के लिए लड़ाई लड़ी जब पूरा तंत्र,मीडिया का शोर और बनावटी जन भावनाएँ उसके विरुद्ध खड़ी थी
जिस धैर्य, शालीनता और संयम के साथ इस बेटी ने बात रखी,
बिना चीख-चिल्लाहट, बिना आरोपों की भीड़ में बहे,
केवल तथ्यों, तर्क और सच्चाई के सहारे
अपने पिता के सम्मान की रक्षा के लिये संघर्ष कर रही है,
वह अपने-आप में असाधारण है।
जब भावनाएँ हथियार बन चुकी हों,
तब विवेक के साथ खड़ा रहना आसान नहीं होता।
लेकिन इस बेटी ने दिखा दिया कि
सच आज भी शालीन आवाज़ में बोला जा सकता है।
यह केवल एक पिता की लड़ाई नहीं,
यह एक बेटी के संस्कार, साहस और संकल्प की गाथा है।
नमन है ऐसी बिटिया को...
जो कठिन समय में भी अपने पिता की ढाल बनकर खड़ी रही..!!
हम सब आपके साथ हैं बहन
न्याय अवश्य मिलेगा ईश्वर के घर देर हो सकती है लेकिन अंधेर नहीं हो सकती है 🙏
सच कुछ पल के दब सकता है छुप नहीं सकता.
IAS बनना चाहती थी लेकिन पिता के सम्मान पर कालिख लगी तो एक बेटी ने काला कोट पहन लिया.
सेंगर दोषी करार हुए जब उम्रक़ैद हुई तो मुझे भी लगा था इंसाफ हो गया, सत्ता के रसूख ने घुटने टेक दिए। वो मामला था ही इतनी वीभत्स! इतना डरावना, इतना क्रूर! लेकिन 8 साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला और फिर ‘सुप्रीम’ रोक…जब ऐश्वर्या सेंगर ANI को दिए अपने बयान में ये कहती हैं कि उन्हें “रेपिस्ट की बेटी” कहा गया, उनकी पहचान खो गई. जब वो डंके की चोट पर कहती हैं कि पीड़िता एक सबूत पेश नहीं कर सकती तो लगा कि मामले में कुछ तो अनकहा है! वरना एक बेटी कभी अपने रेपिस्ट बाप की पैरवी नहीं करती.
निठारी जैसा नृशंस कांड का आरोपी बरी हुआ तो दर्द नहीं हुआ लेकिन 8 साल बाद सेंगर को ज़मानत मिली तो इतना हल्ला क्यों हुआ?
जब इन सवालों का जवाब खोजने माखी पहुँचे तो मालूम पड़ा कि कुलदीप सिंह सेंगर बस नाम नहीं है, बल्कि वो इंसान है जिसे जनता देवता मानती है। वहाँ की महिलाएँ आज भी उन्हें “विधायक जी” कहती हैं. 8 साल से जेल में बंद सेंगर के आवास पर ताला और सन्नाटा है और उनकी जनता की आँखों में आँसू! मुझे लगता था कि सेंगर बाहुबली है, सेंगर का लोगों में डर होगा लेकिन आज जब सेंगर का साम्राज्य ख़त्म हो चुका है, पैसा रसूख़ इज़्ज़त सब बर्बाद हो चुका है, तब भी उन्नाव की जनता ये मानने को तैयार नहीं है कि सेंगर रेपिस्ट है. कोर्ट कुछ भी फ़ैसला सुनाए, सेंगर को फाँसी ही क्यों न हो जाए, लेकिन जो हकीकत माखी जाकर महसूस की वो ताउम्र ये एहसास कराती रहेगी कि क्यों पत्रकारिता में एथिक्स जरुरी हैं, क्यों पत्रकारों को टीआरपी के लिए किसी निर्णय पर नहीं पहुँच जाना चाहिए, क्यों पत्रकारों को राजनीतिक दलों का हथियार बनकर किसी मामले में इतना तूल नहीं देना चाहिए कि किसी के साथ अन्याय हो जाए!
उन्नाव के माखी में साल 2017 में बहुत कुछ हुआ था, बस नहीं हुआ था कुछ तो वो रेप था! ये बात पूरी ज़िम्मेदारी के साथ मैं कह सकती हूँ कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद उन सभी पत्रकारों और राजनेताओं को माफ़ी माँगनी पड़ेगी जिन्होंने इस मामले को एकतरफ़ा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
#KuldeepSinghSengar #UnnaoCase #unnaocasefacts #justice
@iprachi_singh@SengarAishwarya@Sanjay_Dixit@JaipurDialogues@IshitaSengar@MrigendraSpeaks@Lawyer_Kalpana@DeepikaBhardwaj@Sahasrabahu_@barkhatrehan16
देवरिया विधायक शलभ मणि त्रिपाठी के बाद अब जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह भी मैदान में कूद गए है 🔥
आप लोगों को पता ही होगा की
यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए मात्र 22 वर्ष जबकि अन्य वर्ग के लिए 27 वर्ष निर्धारित की गई है !
शलभ मणि त्रिपाठी के बाद धनंजय सिंह ने भी सामान्य वर्ग के लिए आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट की मांग की है !
धनंजय सिंह ने सीएम योगी से आग्रह करते हुए कहा -
सामान्य वर्ग के अभ्यार्थियों के संग न्यायोचित फैसला लेते हुए तय आयु सीमा 18-25 वर्ष करने पर विचार करें।
जय परशुराम ,जय मां भवानी 🙏🚩
सेवा में,
श्रीमान अमित शाह जी,
गृहमंत्री भारत सरकार,
नई दिल्ली( 110001)
विषय:
मनुस्मृति जैसे प्राचीन हिन्दू धर्मग्रंथ को सार्वजनिक रूप से जलाकर सामाजिक विद्वेष फैलाने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई न होने तथा जवाबी प्रतिक्रिया देने वालों पर एकतरफा कार्रवाई के संबंध में।
मान्यवर @AmitShah जी,
यह पत्र केवल एक नागरिक की शिकायत नहीं बल्कि भारत के संविधान, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर उठता एक गंभीर प्रश्न है।
दिनांक 25 दिसंबर को कुछ संगठित तत्वों द्वारा हिन्दू धर्मग्रंथ ‘मनुस्मृति’ को जानबूझकर सार्वजनिक रूप से जलाया गया, उसका वीडियो बनाया गया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर समाज को उकसाने का कुत्सित प्रयास किया गया।
यह कृत्य न तो आकस्मिक था और न ही भावनात्मक
यह पूर्वनियोजित सामाजिक विद्वेष फैलाने की साजिश थी।
यह कृत्य स्पष्ट रूप से निम्न धाराओं के अंतर्गत अपराध है:-
1.IPC धारा 295A – धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करना।
2.IPC धारा 153A – विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता फैलाना।
3.IPC धारा 505(2) – सार्वजनिक शांति भंग करने वाला उकसावा।
https://t.co/8qUk2b10RG Act धारा 66F / 67 – डिजिटल माध्यम से उग्र और भड़काऊ सामग्री का प्रसार।
इसके बावजूद, आज तक मनुस्मृति जलाने वालों पर कोई ठोस, सार्वजनिक और कठोर कार्रवाई नहीं की गई।
इसके विपरीत जब उकसावे से आहत होकर कुछ लोगों ने प्रतिक्रिया दी तो पूरा प्रशासनिक तंत्र तुरंत सक्रिय हो गया।
मेरा सीधा प्रश्न है:-
- क्या भारत में कानून उकसाने वाले अपराध पर नहीं, बल्कि प्रतिक्रिया देने वाले पर लागू होता है?
- क्या सामाजिक आग लगाने वाला “कार्यकर्ता” कहलाता है और आहत नागरिक “अपराधी”?
- क्या यह कानून का शासन (Rule of Law) है या चयनात्मक न्याय (Selective Justice)?
मान्यवर,
यदि इस प्रकार से एक धर्मग्रंथ को जलाने जैसे कृत्य पर चुप्पी साधी जाती रही,तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि
“धार्मिक उकसावे को संरक्षण प्राप्त है।”
जो कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए अत्यंत घातक है।
अतः आपसे मांग है कि-
1.मनुस्मृति जलाने व उसका प्रचार करने वालों पर IPC 295A, 153A, 505(2) के तहत तत्काल FIR व गिरफ्तारी हो।
2.सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ऐसे वीडियो/पोस्ट हटवाकर डिजिटल ट्रेल की जांच की जाए।
3.भविष्य में धार्मिक ग्रंथ जलाने जैसी घटनाओं को राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध अपराध मानते हुए सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाएं।
4.केवल प्रतिक्रिया देने वालों पर नहीं, बल्कि उकसावे की जड़ पर कार्रवाई हो।
5. मनुस्मृति जलाकर समाज में आपसी मतभेद बढ़ाने वालो पर NSA के तहत कार्यवाही की जाए।
यह पत्र चेतावनी नहीं बल्कि संविधान और कानून की निष्पक्षता की अंतिम मांग है।
यदि अब भी उकसावे करने वालों को संरक्षण मिला,
तो यह देश में सामाजिक टकराव को वैध करने जैसा होगा,जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर होगी।
भवदीय,
एक जागरूक भारतीय नागरिक,
आशीष व्यास 🖊️
@HMOIndia@AmitShahOffice
देश में कानून की समानता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मनुस्मृति और रामचरितमानस जलाने पर कई जगह कार्रवाई नहीं होती, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया में किसी तस्वीर के जलने पर तुरंत गिरफ्तारी—क्या यही समान न्याय है?
अनिल मिश्रा जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता की गिरफ्तारी और धर्मग्रंथों के अपमान पर चुप्पी, यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या केवल मंदिर निर्माण से धर्म सुरक्षित हो जाता है?
हिंदुत्व का प्रचार और हिंदू धर्म की रक्षा—इन दोनों में फर्क समझना जरूरी है।
यह विषय दलगत राजनीति से ऊपर, धर्म, संविधान और कानून की निष्पक्षता से जुड़ा है।
प्रश्न केवल एक है—क्या आज भी देश में एक ही कानून लागू होता है?
#Manusmriti
#Ramcharitmanas
#RuleOfLaw
#EqualJustice
#LawAndOrder
#HinduSamaj
#DharmaRaksha
#ConstitutionalRights
#JusticeForAll
#indiadebates
अनिल मिश्रा जी अब एक आवाज़ नहीं, बल्कि क्रांति बन गये है।
अब तक एक लाख से अधिक लोगो ने अनिल जी के लिये आवाज़ उठाई है।
पूरा सोशल मीडिया हिल चुका है।
#Release_Anil_Mishra ✅
आज के सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा जी और उनके साथियों को ज़मानत नहीं मिली।
पुलिस के अनुसार SC/ST Act का शिकायतकर्ता न्यायालय में उपस्थित नहीं है। SC/ST Act का मुकदमा दर्ज कराने वाले मकरान बौद्ध के खिलाफ़ पूर्व में गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी है वो ख़ुद फरार है।
अनिल मिश्रा को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए था।
मै मानता हूं कि X पर किसी चीज का ट्रेंड कर जाना सरकार के लिए उतनी घातक चीज नहीं है।
लेकिन बिना किसी IT सेल और PR प्रमोशन के 73K ट्वीट हो जाना इस मुद्दे के गंभीरता को दर्शाती है।
आगे बढ़ा दीजिए।
#Release_Anil_Mishra
“अनिल मिश्रा के ख़िलाफ़ मुक़दमा लिखाने वाला एक अपराधिक मामले में ख़ुद फ़रार चल रहा है”
यानी मोहन यादव की सरकार में दाऊद इब्राहीम कराची में बैठ कर डॉ प्रवीण तोगड़िया के खिलाफ़ मुक़दमा लिखा सकता है 😎