religion is your personal and private relationship with god. keep the beauty of it and don't make it public . take life easy it’s not going to last forever
वही करो,जो आता है! छात्रों को मत बाँटो 🙌
यही बच्चे Janatar Mantar पर थे तो ‘आतंकी’, Ranchi में हैं तो छात्र? एजेंडा मत चलाइए,दोनों जगह छात्र हैं। ये अपने हक़ की बात करते हैं,आप पार्टी की।
In any other country, this would be treated as a grave criminal act.
A young life lost due to poor quality of infrastructure and callousness of civic agencies in the heart of our capital city.
किसी यूनिवर्सिटी में शिक्षामंत्री गए।
प्राइवेट यूनिवर्सिटी थी। वहां तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर, कोर्सेज, टीचर्स से इंटरेक्शन हुआ। इस क्रम में लाइब्रेरी भी दिखाई गयी। बेहतरीन कलेक्शन, शानदार किताबे, सिस्टम, माहौल, डिजिटल इंतजाम। बच्चे, लाइब्रेरी में भरे पड़े हुए थे।
मंत्रीजी व्यवस्था देख बहुत प्रसन्न हुए। लेकिन एक चीज की कमी खटकी। उन्होंने साथ चल रहे अकादमिक प्रभारी को सलाह दी - इतनी बढ़िया लाइब्रेरी है। आप इसमे एक रेस्टोरेंट क्यो नही खोल देते।
बहुत चलेगा।
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उस अकादमिक बन्दे ने, एक दिन हंसते हंसते यह बात बताई। कहा- हमारी उम्मीद थी कि वे यूनिवर्सिटी, या लाइब्रेरी से खुश होकर कुछ ग्रांट देंगे। कोई वादा करेंगे, कोई नया इंफ्रास्ट्रक्चर, कोर्स या सिस्टम मिल जाएगा।
लेकिन मंत्रीजी की सोच, रेस्टोरेन्ट तक सीमित थी। पर जरा सोचिये। प्रशासन के किस पहलू में यह व्यापारिक मानसिकता नही घुसी हुई??
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कभी दौर था कि मिलावटखोरी अपराध होता था। मेरे शहर का एक पंप, ओकेजनली सील कर दिया जाता, क्योकि उसका मालिक अक्सर पेट्रोल में सॉल्वेंट मिलाकर बेचता।
लोग उस पम्प से बचते थे। अब तो सरकार खुद मिलावटी माल बेच रही है। हर पम्प पर बेच रही है। बच लो!! तब दिए गए माल की मात्रा की जांच होती। एक लीटर की जगह, आपने 950ML दिया तो कार्यवाही।
अब एक महीने के रिचार्ज का मतलब 28 दिन की वैलिडिटी, सीना ठोक कर मिल रही है। बिगाड़ लो।
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यह कहना गलत होगा कि मिलावट खोरी को सरकारी संरक्षण है। असल मे मिलावटखोरों की, मिलावट खोरो के द्वारा, मिलावट खोरो के लिए बनवाई सरकार है।
व्यापारिक मानसिकता की सरकार है। बेजा लाभ के अवसर तलाशने वालो की सरकार है। इसमे इसे कुछ गलत नही लगता।
मगर भुगत पब्लिक रही है। अपनी मूर्खता,
और शोर पर अंधे भरोसे की वजह से..
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एक और उदाहरण देता हूँ।
कभी सरकार, कोयला खदान, बेहद सस्ते में देती थी। मान लीजिए, प्रति टन, 250 रुपये प्रीमियम। पॉवर प्लांट, सस्ता कोयला खरीदते। और आपको बिजली 3 रुपये यूनिट मिलती।
इसे कोयला घोटाला कहा गया।
अब सारी खदानें, वापस ली गई।
फिर से ऑक्शन हुए। कोयला 3000 रु टन के प्रीमियम पर बेचा गया। पॉवर प्लांट ने महंगा कोयला खरीदा। अब वही आपको बिजली 12 रुपये यूनिट मिल रही है।
यह स्वच्छ, और ईमानदार बिजली है।
3 रुपये वाली भ्रस्ट बिजली थी।
मेरा सवाल 12 रुपये रेट पर नही, वह तो मुल्ले टाइट करने के लिए आप 20 रुपये यूनिट भी लेंगे। मेरा सवाल यह है कि प्रीमियम में 250 की जगह सरकार 3000 कमाने लगी। उसे 2750 रुपये हर टन पर अतिरिक्त मिले।
यह पैसे कहाँ गए??
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आह, विकास में। शायद उस रोड में, जिसकी असल कीमत 60 करोड़ प्रति किमी है, पर टेंडर 300 रु करोड़ प्रति किमी का है।
अरे भाई, अच्छी सुविधा,
फोर लेन के लिए पैसे देंगे पड़ेंगे न।
लेकिन अगर ये पैसा, कोयले की अतिरिक्त कमाई से आया,
तो हम टोल क्यो दे रहे है?? तो ध्यान से देखिए। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य-
हर चीज बिकवाली पर है।
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अंतिम उदारहण और झेल लीजिये।
देश मे कोई 106000 मेडिकल सीट हैं। नीट के एग्जाम में क्वालीफाईंग मार्क्स मुश्किल से 20% है। याने आप 20% सवाल हल करके "क्वालीफाई" कर जाते है। तो एक लाख सीट के लिए, 13 लाख लोग क्वालीफाई होते हैं।
इसका क्या अर्थ है??
अर्थ यह है,की कोई 50 हजार सीट सरकारी है। यहां 25 हजार जनरल, बाकी आरक्षण मान लीजिए। लेकिन बाकी की 60 हजार सीट, प्राइवेट कॉलेजों में हैं।
13 लाख लोग इन 60 हजार सीटों की बोली लगाएं, तो एवरेज प्राइज ऊंचा रहेगा। पर आप क्वालिफाइंग मार्क्स 60% कर दें, तो शायद 3 लाख लोग ही बोली लगा पाएंगे। एवरेज सीट प्राइज नीचे आएगा।
दैट्स ए लॉस..
याद रखिये, देश भर के सारे कॉलेज के लिए NTA के माध्यम से "वन नेशन-वन एग्जाम" कराना, आपके लिए सुविधा नही। बराबरी नही। न्याय नही।
व्यापार का हिस्सा है।
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और तब नोट कीजिये कि नजदीकी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज किसका है? उसका मालिक, व्यापारियो की इसी रिंग का मेम्बर निकलेगा। नेताजी स्वयं, अथवा उनका विश्वस्त..
व्यापार बुरा नही।
पर सरकार में रहकर व्यापार बुरा है।
धर्मेंद्र प्रधान, कोई अनोखा काम नही कर रहे थे। सारे मंत्री, केंद्र राज्य की सरकार यही कर रहे हैं। वहां पर अगला जिसे भी लाएंगे, यही करेगा। तब चाणक्य के नाम से आया हुआ व्हाट्सप आपको याद करना चाहिए।
जहां का राजा व्यापारी होता है
वहां की जनता भिखारी होती है।
SHOCKING!!!
This goon is threatening and beating children just for supporting the protests. Seriously?
Where is the Delhi Police now? Will they take action, or is all their action reserved only for peaceful protesters?
Share this video widely so that this man is IDENTIFIED and ARRESTED
देश के बच्चे Jantar Mantar के फुटपाथ पर सो रहे हैं, और TV Media PM Modi की Reel पर जश्न मना रहा है
अगर आपके सीने में इंसान का दिल है तो पिघल जाएगा,पत्थर हो चुके हैं तो मत देखिए
वित्त मंत्री निर्मला जी पेपर लीक के फायदे गिना रही हैं
“पेपर लीक होने से बच्चों को पढ़ने का और ज़्यादा वक़्त मिल गया जिससे वह बेहतर कर सके”
चलिए मैडम, अब लगे हाथ जिन 22 बच्चों ने अपनी जान दे दी उसके फ़ायदे भी गिना दीजिए
हद होती है - How brazenly insensitive are you?
I have had many embarassing moments as a young adult, but nearly nothing as an adult, except this person as the leader of my country. Any true empathetic educated leader would listen to the students, overhaul the medical education exams, improve the curriculum, stop spreading pseudoscience into schools, colleges and institutes, remove the incompetent minister, compensate families of students who died by suicide. Seriously, no one really cares about these silly social media metrics, dumdums.
रिपोर्टर: नड्डा जी मिलने तो गए है है
अभिनव सर: नड्डा जी की शिक्षा का कौन सा ज्ञान है और वो क्या हल निकालेंगे वो अपने मंत्रालय का ध्यान दे नहीं पा रहें हैं.
उन्होंने आगे कहा वो हेल्थ मिनिस्टर है लेकिन पनीर दूध सब तो नकली मिल रहा है.
Harsh Dubey has pointed out things No one of the Politicians or Political analysts ever did :-
1. 90% of students who commits suicide due to NEET belong to General Category.
2. There are multiple levels of Reservation.
3. There should be equal cutoffs across the country and categories.
4. Competitive exams should be focussed on 11-12th level focussing on core subjects of fields.
5. There should be sub-categorisation among SC-ST on the basis of Creamy layer .
6. 50% of seats in Private colleges should be government seats .
7. System should focus on removal of Reserved Seats ultimately .
8. We should focus on making system which ease the life of aspirants not put burden on them .
9. India deserves change in system , A Resignation won't contribute much.
#EndReservation
और कुछ लोग कहते हैं
"आजादी चरखे से नही आई थी"
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यह देश आज भी गांधी का है।
साहस का है
न्याय, सत्य और अहिंसा का है।
इस बेटी की तनी हुई मुट्ठी
गांधी की विरासत है।
ये बच्चे गांधी की विरासत हैं।
ये देश गांधी का रंगमंच है।
ये जिगरा, ये ये मुस्कान, ये आत्मविश्वास -
इनके फेफड़ों में भरी हुई..
गांधी की सांसों ने पैदा किया है।
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ये बेफिक्री, ये निर्भयता-
मौत और जेल के डर को कुचल कर,
एक आजाद पीढ़ी ने हासिल किया था।
इसे थाती बनाकर हमने अपने बच्चो को सौंपा है।
इसकी रचना मुट्ठी भर नमक, पाव भर कपास से हुई थी।जो चरखे की तीलियों के घूर्णन से बुनी गयी थी। आज प्रमाण सामने है। देखे, जिन्हें भी संशय हो.
कि आजादी चरखे से नही आई थी?
❤️
गोदी चैनलों को कवरेज सुधारने का फ़रमान !!
सूत्र ने एक बहुत ही दिलचस्प बात बतायी है। वो ये कि अंदर इस बात का आंकलन है कि टीवी चैनलों ने जिस तरह की कवरेज की है उससे असंतोष और बढ़ा है।
सूत्र ने दावा यहाँ तक किया है कि उनको ज़रूरी निर्देश दिए जा चुके हैं और कवरेज ‘सुधारने’ को कहा गया है।
‘अधिक से अधिक धर्मेंद्र प्रधान तक बात रुक जाए’ इस हिसाब से चलने को कहा गया है
सूत्र का दावा है कि ‘जिन चैनलों को आप लोग गोदी चैनल कहते हैं, उनकी कवरेज में आ रहे बदलाव को नोट कीजिएगा’
Another landmark step in integrative health research by Ministry of Ayush and ICMR...
...to fool public.
As claimed, the study did not show that Ayurvedic mumbo jumbo "Punarnavadi Mandura" with or without Drakshavaleha was as effective as standard of care (iron and folic acid) in pregnant women...because such a study is still unavailable.
Please note:
Punarnavadi Mandura is basically processed iron oxide (Mandur Bhasma), herb Punarnava (Boerhavia diffusa), in a base liquid of cow urine (Gomutra) and
...Drakshavaleha is an Ayurvedic jam primarily made from raisins (Draksha), honey, and herbs like long pepper, ginger, and gooseberry.
Unhealthy herbal junk.
Why go through all that crap, when iron deficiency can be easily tackled with iron and folic acid? Why are these people so dumb?
Don't fall for this BS.
This study is not published.
The study protocol is also not published.
The study protocol is only available as a non-peer reviewed pre-print in some dubious database - https://t.co/4GZN2X3i6y
Note the point that public funds are wasted for nonsense like this. And publication will happen at some point, either in an ICMR journal or Ayush journal or a proper journal which will go through post-publication peer review for real assessment.
VIDEO | Delhi: Advocates at the Supreme Court read the Constitution's Preamble in support of the Jantar Mantar protest and against the police action on protestors.
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7)