बीमार पिता को पहिये लगी चारपाई पर लादकर इलाज के लिए निकली मासूम बेटी।
एक बच्ची के हौसले और परिवार के प्रति समर्पण को दर्शाता है,
जिसे देखकर भावुक होना लाजमी है।
समय पर एम्बुलेंस या अन्य सहायता न मिलने के कारण बच्ची को खुद यह कदम उठाना पड़ा।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और एम्बुलेंस सुविधाओं के न मिलने पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मैं दिल्ली DTC का कर्मचारी हूँ जब दिल्ली में केजरीवाल था हर 6 महीने पर सैलरी बढ़ती थी, डेढ़ साल से ये बैठी (रेखा गुप्ता) है एक रुपए नहीं बढ़ाये !
~ दिल्ली के DTC कर्मचारी 🔥
🚨 एक हिंदू भाई ये तस्वीर ट्वीट करके लिखता है।🚨
हॉस्पिटल में दर्द और उम्मीद के दरमियान एक मां-बाप अपनी नन्ही बेटी का इलाज करवाने आए थे।
अचानक उन्होंने वहां मौजूद लोगों से पूछा
"नमाज़ का वक़्त हो गया है, क्या हम यहां नमाज़ पढ़ सकते हैं?
चारों तरफ़ मौजूद लोग, जिनमें ज़्यादातर हिन्दू भाई-बहन थे, मुस्कुराकर बोले ज़रूर, यहीं पढ़ लीजिए।
वो दोनों मियां-बीवी नमाज़ में खड़े हुए आंखों में आंसू और दिल में दुआएं।
नमाज़ के बाद दोनों हाथ उठाकर, न सिर्फ अपनी बेटी बल्कि वहां मौजूद तमाम बीमारों की शिफ़ा के लिए भी रो-रो कर दुआएं करने लगे।
ये नज़ारा देख कर, वहां मौजूद हर आंख भी नम हो गई।
यही है हमारा प्यारा भारत मोहब्बत, इज्ज़त और इंसानियत का असली चेहरा।
सूफिया सूफी ने रचा इतिहास 4,167 किलोमीटर की दौड़ पूरी करने के बाद सूफिया सूफी का भावुक जीत का वीडियो वायरल!
मुसलमान तो बस इतिहास रचने में लगें है और संघियों को इनकी तरक्की हजम नहीं होती!
इबादत
सादिक
अब्दुल्ला
साहेब
फैजल
आजम
शब्बीर
इमरान
मुश्ताक और राजिक .
इनका नाम ही इनकी पहचान है और इनकी पहचान ही आज के दौर में इनकी सबसे बड़ी मुसीबत है . इस सबको एमपी पुलिस ने दंगा , आगजनी , मारपीट , घर में जबरन घुसने और विस्फोटक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था , मध्यप्रदेश पुलिस के मुताबिक ये सारे दंगाई थे लेकिन मध्यप्रदेश की ही अदालत ने इन्हें हिंसा और दंगा के आरोपों से बरी कर दिया है . अदालत ने अपने फैसले में ये भी पूछा है कि पुलिस ने आखिर इन 11 लोगों को किस आधार पर दंगे का आरोपी बनाया ? आज इंडियन एक्सप्रेस ने विस्तार से पूरी रिपोर्ट छापी है .
कोर्ट का ये फैसला एमपी सरकार के मुंह पर तो तमाचा है ही इस बात का भी सबूत है कि कैसे इस देश में मुसलमानों को दंगाई घोषित करके सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है .
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
देशभर में आज रविवार, 21 जून को नीट-यूजी 2026 की परीक्षा (NEET-UG 2026) दोबारा कराई जा रही है। परीक्षा से पहले अजमेर में एक छात्रा को बुर्का पहनकर परीक्षा केंद्र में जाने से रोका गया।
छात्रा ने एएनआइ से बातचीत में कहा कि जब NTA ने बुर्का पहनकर जाने के लिए इजाजत दी है तो मुझे जाने क्यों नहीं दिया जा रहा। छात्रा ने आगे कहा, 'परीक्षा मायने नहीं रखती, मेरा बुर्का और पहचान मायने रखती है।'
NEET छात्रा, जिसने अपनी पहचान कुलसुम बानो के तौर पर बताई, उस छात्रा ने कहा कि वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा देने के लिए ब्यावर से आई थी और दावा किया कि उसने वही कपड़े पहने थे जो उसने पिछली बार परीक्षा देते समय पहने थे।
कुलसुम बानो ने कहा, 'मैं NEET परीक्षा देने के लिए ब्यावर से आई हूं। जब मैंने 3 मई को परीक्षा दी थी, तब भी मैंने वही कपड़े पहने थे जो अभी पहने हैं, बुर्का और दुपट्टा।'
बानो ने आरोप लगाया कि शुरू में उसे केंद्र में घुसने से पहले दुपट्टा हटाने के लिए कहा गया, लेकिन बाद में अधिकारियों ने जोर दिया कि उसे बुर्का भी हटाना होगा।
बानो ने आगे कहा, 'अगर NTA ने हमें इजाजत दी है तो ये लोग हमें रोक नहीं सकते। अगर मुझे परीक्षा देनी है और वे मुझे इन कपड़ों में अंदर नहीं आने देते, तो मैं परीक्षा ही नहीं दूंगी। यह शर्मनाक है कि वे 18 साल के युवाओं के साथ ऐसा कर रहे हैं।'
बानो ने कहा, 'मेरे लिए परीक्षा मायने नहीं रखती; मेरे लिए मेरा 'बुर्का' और मेरी पहचान मायने रखती है।'
#Ajmer #NeetExamStudent #NEETREExam #DainikJagran
अजमेर में 18 साल की कुलसुम हिजाब में NEET का एग्जाम देने पहुंची तो सर पर दुपट्टा और बुर्के के कारण उसकी एंट्री नहीं दिया गया
एग्जाम सेंटर पर कुलसुम ने अधिकारियों को कंफ्रंट किया कि जब NTA ने इजाजत दी है तो यहां के अधिकारी क्यों रोक रहे हैं
हालांकि 1 घंटे के हंगामें के बाद कुलसुम को एग्जाम सेंटर में एंट्री दे दी गई
NEET छात्राओं के ये आंसू देखना बहुत मुस्किल हो रहा है !
देरी की वजह से छूटी परीक्षा, सेंटर के बाहर छात्राएं फूट फूटकर रोने लगीं, वीडियो बेंगलुरु का है, पहले परीक्षा दी तो रद्द हो गई. अब परीक्षा ही छूट गई पूरे साल की मेहनत खराब
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