स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि क्या आरोपी ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया था झड़प के दौरान..
पुलिस का जवाब था- पहले जब कंप्लेंट की गई थी तब शिकायतकर्ता ने जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने का आरोप नहीं लगाया था। बाद में दूसरी बार जब बयान हुआ तो जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल का आरोप लगाया इसलिए स्वतंत्र पर SC/ST एक्ट लगा दिया गया।
क्या ये संभव है कि शिकायतकर्ता को पूरी घटना याद रही लेकिन जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल भी हुआ था ये याद आने में 70 दिन लग गए?
अभी तक जितने वीडियो आए हैं उनमें से किसी में जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का ऑडियो सुनाई दिया है क्या?
लेकिन कोई कुछ नहीं कहेगा.. SC/ST एक्ट के गलत इस्तेमाल पर कोई चर्चा नहीं होगी इस देश में। और SC/ST एक्ट लगवाने वाला भले खुद वीडियो में पीटता दिख रहा हो लेकिन उसपर कोई कार्रवाई नहीं होगी। भले वो वीडियो में खुद मान रहा हो कि उसने हालत बुरी कर दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होगी।
गजबे है। और ये गजबे है चलता रहेगा, खत्म ना होनेवाला।
आख़िर इसे वायरल क्यों नहीं किया जा रहा है ? आप करिए
ये कानपुर के शुभम द्विवेदी की पत्नी एशन्या हैं, जो पहलगाम में मारे गए थे. ये कह रही हैं कि
- हिंदू-मुस्लिम होता है
- मुस्लिम आतंकियों ने धर्म देखकर मारा है
- अगर मेरे पति मुस्लिम होते तो जिंदा होते
- हिंदू-मुस्लिम एक हैं, ये खत्म कर दिया गया है
"Kya saboot hai ki Babri se pehle yahan mandir tha?"
"Milord, ASI report, foreign travelers' accounts, history books, dharmik granth, oral testimonies, gazetteers aur..."
"Bas bas, itna bhaari thaila? Rakh do. Aaram se dekhenge... Tum jao. Next! Haan Maulvi ji aapka kya hai?"
"Janab, main Waqf se hoon. Ballabgarh gaon Waqf ki zameen hai, kyunki Humayun ke chachere bhai ki foofi ke damaad ne kabhi sapne mein socha tha ki yeh madarse ke kaabil jagah hai."
"Granted. Gaon khali karwaya jaaye. Zameen Waqf ke hawale ki jaaye."
"Shukriya Janab. Waise, koi saboot-vaboot?"
"Arre Maulvi ji, aap bhi kya baat karte hain. 600 saal purane kagaz kaun sambhal ke rakhta hai? Bharosa hona chahiye, evidence nahi. Aap le jaiye zameen."
तामिलनाडु भाजपा अध्यक्ष की ये फ़ोटो देखकर आप चौंक जाएंगे!
के अन्नामलाई ने खुद को कोड़े मारकर DMK सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है।
नंगे बदन घर के बाहर निकले, खुद को मारे कोड़े।
अन्ना यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट के कथित यौन उत्पीड़न के विरोध में भाजपा और AIADMK ने किया विरोध प्रदर्शन।
सेवा में,
महामहिम @rashtrapatibhvn
विषय- सुश्री रीता कौशिक, प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, जौनपुर (उत्तर प्रदेश) के विरुद्ध कार्रवाई आरंभ करने का अनुरोध
अत्यंत सम्मानपूर्वक प्रस्तुत है:
1. आपका ध्यान एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना की ओर आकर्षित किया जाता है, जिसमें 34 वर्षीय अतुल सुभाष नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी के साथ वैवाहिक कलह और आगामी मुकदमे के कारण बेंगलुरु (कर्नाटक) में आत्महत्या कर ली है।
2. अपने हस्ताक्षरित सुसाइड नोट में, उक्त अतुल सुभाष ने अन्य बातों के साथ-साथ, सुश्री रीता कौशिक, प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, जौनपुर (आईडी: यूपी 5728) पर रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।
3. अपने सुसाइड नोट में, मृतक ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि उक्त न्यायाधीश श्रीमती रीता कौशिक ने मृतक से उसकी पत्नी के साथ उसके मामले का अंतिम निपटारा सुनिश्चित करने के लिए 21.03.2024 को 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी और जब मृतक ने उक्त रिश्वत देने से इनकार कर दिया, तो उसके खिलाफ उसके केस नंबर 108/2022 में एक प्रतिकूल आदेश पारित किया गया। मृतक ने आगे आरोप लगाया है कि उक्त न्यायाधीश ने उसे आत्महत्या करने के लिए भी उकसाया।
4. एक कार्यरत न्यायाधीश पर भ्रष्टाचार के उपरोक्त आरोप ने न्यायपालिका में भारत के आम लोगों के विश्वास को हिला दिया है और हमारी न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता को काफी हद तक कम करने की संभावना है। साथ ही, यदि पूरी तरह से जांच नहीं की जाती है और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ अनुकरणीय कार्रवाई नहीं की जाती है, तो इससे अन्य लोगों को भी इस तरह के कदाचार में शामिल होने का साहस मिलेगा।
5. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस संबंध में मृतक की पत्नी, सास, साले और चाचा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने आदि के लिए पीएस - मराठाहल्ली पुलिस स्टेशन, बेंगलुरु में बीएनएस की धारा 108 और 3 (5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। भले ही मृतक के सुसाइड नोट में उक्त न्यायाधीश को मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया गया हो।
6. यह सम्मानपूर्वक प्रस्तुत किया जाता है कि बहुत सारे निर्णयों में, इस माननीय न्यायालय ने सुसाइड नोट को मृत्यु पूर्व कथन के रूप में माना है और सुसाइड नोट के आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार रखा है।
7. उपरोक्त के मद्देनजर, यह सादर प्रार्थना की जाती है कि न्यायपालिका में आम जनता का विश्वास बहाल करने तथा न्याय के हित में, कृपया उपरोक्त सुश्री रीता कौशिक, प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, जौनपुर (उत्तर प्रदेश) के विरुद्ध अनुकरणीय कार्रवाई की जाए, जिसमें अनुशासनात्मक जांच, निलंबन, निष्कासन तथा अभियोजन की कार्रवाई शामिल है, परंतु यह इन्हीं तक सीमित नहीं है।
सभी लोग इस तरह इसको ट्वीट करें ई मेल करें।
BIG NEWS 🚨 Atul Subhash had reportedly prepared a checklist of the tasks he needed to get done in the days leading up to his demise.
He created a checklist that was divided into 3 parts- 'before last day,' 'last day' & 'execute last moment.
As the tasks were completed, it had 'Done' printed in front.
Only a responsible person would think this much.
@JaikyYadav16 इस देश के कानून के आगे एक पढ़ा लिखा आदमी हार गया आख़िर कब तक ऐसे ही क़ानून के पछड़ो में अतुल सुभाष अपनी जान गवाते रहेंगे इनकी पत्नी और उसके परिवार वालों में इन्हें बुरी तरह से परेशान किया, इनके ऊपर कई केस किए, और सब करने के बाद भी इन्हें अपनी जान देनी पड़ी कानून को जगाने के लिए
बरेली में मौलाना तौकीर रजा ने हिंदुओं का सामूहिक धर्मांतरण कराने का ऐलान किया। मुस्लिम मौलाना अपने मजहब को आगे बढ़ाने के लिए उचित अनुचित हर तरीके से लगे हुए हैं और हमारे धर्माचार्य शंकराचार्य को शादियां अटेंड करने से फुर्सत नहीं है।
भाजपा विधायक खुद कह रही है की 14 घंटे से ज्यादा बिजली नही मिल रही, सुनिए
@myogiadityanath जी आपके अधिकारी झूठ बोलते है की 24 घंटे बिजली दे रहे है,
#हमीरपुर - बिजली से परेशान राठ विधायक मनीषा अनुरागी अपने समर्थकों के साथ कार्यालय पहुंची
@vinodkapri@rohini_sgh@yadavakhilesh
ये क्लिप क्यों वायरल हुई ?
ये क्लिप वायरल हो गई है.. इतनी वायरल कि लाखों की संख्या में लोग इसे ट्वीट कर रहे हैं, हजारों व्हाट्सप्प ग्रुप्स से मेरे जानने वाले बता रहे हैं कि उनके ग्रुप में ये भी विडिओ पोस्ट किया गया है। देश के कई हिस्सों के साथ-साथ अमेरिका, आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से मेरे पास फोन आए । मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के दो बड़े लोगों ने कॉल किया । पहली बार ऐसा हो रहा है .. तो मैं सोच रहा था कि ऐसा क्यों हुआ ?
ऐसा इसलिए हुआ क्यूंकि उस दिन #DoTook में मैंने जो कुछ कहा वो मेरी ही नहीं करोड़ों-करोड़ हिंदुओं की पीड़ा, उनका दर्द और उनकी आवाज थी।
कुछ लोग ज्ञान देते हैं,कहते हैं कि पत्रकार का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन पत्रकार का यह धर्म तो होता है कि वो सच के साथ खड़ा रहे, झूठ के खिलाफ बोले। तो कोई अगर झूठ बोले, संसद में झूठ बोले कि "जो खुद को हिन्दू कहते हैं वो हिंसक होते हैं", तो क्या पत्रकारों को इस झूठ को एक्सपोज नहीं करना चाहिए ? या बाद में डैमेज कंट्रोल के लिए इसके जो "मतलब समझाए जाएँ" उन्हें "समझ" कर चुप हो जाना चाहिए !
और वैसे भी मैं पत्रकार के साथ-साथ एक भारतीय हूँ, हिन्दू हूँ। और यह सच है कि जब तक हिन्दू सुरक्षित है तब तक भारत सुरक्षित है । जो पत्रकार अपने देश और अपने धर्म की रक्षा के लिए आवाज उठाने का साहस नहीं कर सकता, वो किसी के लिए भी क्या आवाज उठाएगा?
क्या यह सच नहीं कि आज कल आए दिन हिंदुओं को गाली देना, उनका अपमान करना, हिंदुओं को बांटने का षड्यन्त्र करना कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं का प्रिय खेल बन गया है । कहीं Dismantling Hindutva जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, कहीं मेरे धर्म को एड्स, डेंगू, मलेरिया कह कर उसका समूल नाश करने के भाषण दिए जा रहे हैं । इस सबसे मैं दुखी हूँ, गुस्से में हूँ और फिर उस दिन राहुल गांधी ने संसद में विश्व के सबसे शांतिप्रिय, सबसे सहिष्णु हिन्दू धर्म को हिंसक और नफरत फैलाने वाला बोल दिया। इस सबका गुस्सा और दर्द कुछ शब्दों के रूप में मेरे मुंह से निकल गए।
और जब यह क्लिप वायरल हुआ तो मुझे एहसास हुआ कि उस दिन मैंने जो कुछ कहा वो अकेले मेरी नहीं करोड़ों हिंदुओं के हृदय की आवाज है। उम्मीद है कि राहुल गांधी सहित जो लोग भी हिंदुओं को हिंसक, एड्स, डेंगू और मलेरिया कहते हैं, सनातन का समूल नाश करने की बातें करते हैं वो करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को समझेंगे और ऐसी घटिया हरकतों की पुनरावृति से बचेंगे। जय श्री राम ! भारत माता की जय !