कहा था तुमने
........थक गई हूं मैं,
तुम्हारे इश्क से
........अब रिहा कर दो मुझको,
:
तो ये रहा मैं
........और ये मेरे खून के कतरे में बसी तुम,
छान लो और ले जाओ
.........समेट कर खुद को ।।
💔❤️
#बज़्म#मयकश
@A_lfaaz लफ्जो मे तेरे बस उसका अक्स छुपा है
अधूरे ख्वाबो भरी आँखो मे इक अश्क रुका है
नज्मो के धागो और लफ्जों की सिलाई से
क्या खूब इक नर्म लिहाफ बुना है
देखते हो तसव्वुर मे रातदिन तुम जिसे
जमाने से अलहदा इक गुल चुना है
जाम ए इश्क़ पी तुम मयकश हो गए
साकी भी तुमने बेमिसाल चुना है
#बज़्म
@Preet98725 साकी तुम मयकश मैं
आज मयखाने में धूम मची है,
झूम रही है बोतल शराब की,
घूँट दर घूँट गले से उतरी है
झूम रही है रात आज
मदहोश आज तू हो चली है।
#बज़्म
आँख शराबी,
गाल गुलाबी,
चाल नवाबी,
लब ऐसे जैसे शराब की हो प्याली ..
जिसे चख..
हम नशे से झूमे नहीं,
बिगड़े नहीं,
बहके नहीं,
तो तौहीन होगी
तुम्हारे हुस्न की ।
~मनीष
#बज़्म
जब लिखता हूं
मैं तुम्हें हीं लिखता हूं
तुम आंखों का अश्क हो
तो तुझे मैं दर्द भी लिखता हूँ
तुम हुस्न की परिभाषा हो
हर लफ़्ज़ में तुझे मदमस्त लिखता हूं
आईने सा तू तसव्वुर है
उस आईने पर तुझे गुलाब लिखता हूं
तुम नशे से सराबोर हो
मैं खुद'को तेरा मयकश लिखता हूं।
~मनीष
#बज़्म
हुस्न कातिलाना
बोल शायराना
कमर लचकती
यौवन मचलती
रुखसार लाल
मुस्कान बेमिसाल
हुस्न शराबी
चाल नवाबी
आँखें बोलती
लब मौन रहती
इश्क जो गूंजती
धडकन बढ़ती
लब थरथराते
उंगलियाँ कांपते
करवटों में रात
बेतरतीब बात
ये इश्क है या भ्रम
पर है ये रात बेशरम।
~मनीष
#बज़्म
मुद्दतों की इंतजारी
रूबरू होने की ख्वाहिश
हाथों में मेरे तेरा हाथ
टकराते लबों से रुखसार
गुजरते हसीं पल के साथ
खिलखिलाती है रात
रातों को नींद गुल
दिन में नहीं करार
हसीं है ये लम्हा
जब हुई मुलाकात
साँसें हैं बेतरतीब
घबराहट है बढ़ी
आ गई है अब
जुदाई के लम्हात।
~मनीष
#बज़्म
जाने कितनी कहानियां लिखी गई होंगी
इस निगोड़े प्रेम पर वक्त वक्त पर,
पर हर वक्त कहानियां लिखने को नहीं होती,
कभी कभी जी भी जाती है
पन्नों से इतर
अहसास के मोती को
अंतरंग पलों के धागे में
सुनहरी यादों के साथ पिरोकर,
हथेली पर हथेली रख
आंखों में कहानी जी है हमने प्रेम की!
~मनीष
#बज़्म
मैं हवा हूँ
मैं हवा हूं,तुम्हें छू कर निकल जाऊंगा
~
मैं हवा हूँ
मैं हवा हूं,तेरे रोम रोम में उतर जाऊंगा
~
मैं हवा हूँ
मैं हवा हूं,तुम्हारे झूमको से दिल की बात कह कर आऊंगा
~
मैं हवा हूँ
मैं हवा हूं तेरे लबों पर थिरक आऊंगा।
~मनीष
#बज़्म
कितनी खूबसूरत हो!
दिल करता तेरे झुमकों में तब्दील हो जाऊँ मैं
कानो पर बैठूँ और लटो में शामिल हो जाऊँ मैं
ये जो आँखे है दो शराब की बोतल है
एक नज़र देखो मुझे और गाफ़िल हो जाऊँ मैं
तेरा कतरा-कतरा बहे मेरे जिस्म में लहू बन
तेरे सीने में बस तेरा धड़कता दिल हो जाऊँ मैं।
~मनीष
#बज़्म
तुमने मुझे वो बना दिया
जो मैं बनना नहीं चाहता था..
खैर ..
नियति तय करती है
होना क्या है..
नीयत कितनी भी अच्छी हो ..
बुरा वक्त बुरा बना देता है।
~मनीष
#बज़्म
जमाना लाख बुरा कहता रहा मुझे ..
परवाह नहीं कि ..
क्यूंकि मैं जानता हूं खुदको..
पर जब तुमने बुरा कहा तो मान लिया ..
क्यूंकि तुम मुझे मुझसे ज्यादा जानती हो..
ऐसा तुमने कहा था।
~मनीष
#बज़्म
.
उसने कहा इंतजार और
मेरी अंखियां ठहर गई दर पे ..
की वो अब आई की अब आई ..
इन मुंतज़िर पलों में ना जाने कितने
ख्वाब सलोने सजे ..
लेटके तेरी पहलू में
हमने चांद को निहारे ..
दो भौं के बीच माथे पे
हमने लबों से चांद भी टांक दिया ।
~मनीष
#बज़्म
❣️