शिवसेना उद्धव गुट के 9 में से 6 सांसदों के पाला बदलने के बाद अब महाराष्ट्र में एक अन्य प्रमुख राजनीतिक दल को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनसीपी (शरद पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले शरद पवार और उसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी मौजूद थे। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पार्टी के 8 में से 6 सांसद और 10 में से 5 विधायक सत्तारूढ़ महायुति के साथ जाने के पक्ष में हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राज्यसभा में शरद पवार पार्टी के एकमात्र सांसद हैं, जबकि विधान परिषद में पार्टी के दो सदस्य हैं। एनसीपी शरद पवार गुट को लेकर राज्य की राजनीति में लंबे समय से कयासों का दौर जारी है। इससे पहले अजित पवार गुट व कांग्रेस के साथ विलय की चर्चा भी सामने आई थी। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति किस करवट बैठती है।
शिवसेना उद्धव गुट के 9 में से 6 सांसदों के पाला बदलने के बाद अब महाराष्ट्र में एक अन्य प्रमुख राजनीतिक दल को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनसीपी (शरद पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले शरद पवार और उसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी मौजूद थे। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पार्टी के 8 में से 6 सांसद और 10 में से 5 विधायक सत्तारूढ़ महायुति के साथ जाने के पक्ष में हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राज्यसभा में शरद पवार पार्टी के एकमात्र सांसद हैं, जबकि विधान परिषद में पार्टी के दो सदस्य हैं। एनसीपी शरद पवार गुट को लेकर राज्य की राजनीति में लंबे समय से कयासों का दौर जारी है। इससे पहले अजित पवार गुट व कांग्रेस के साथ विलय की चर्चा भी सामने आई थी। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति किस करवट बैठती है।
@_SandeepDikshit@thenehru_centre जिन लोगों को रुचि है वह @_SandeepDikshit की प्रेजेंटेशन की इन स्लाइड्स पर नजर डाल सकते हैं। जो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान देश की आर्थिक प्रगति, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में आये बदलाव और देश के आर्थिक ढांचे की मजबूती के लिए हुए काम को दिखलाती हैं।
पंडित नेहरू के जाने के 62 बरस बाद भी अगर वे भारतीय राजनीति की हर बहस के केंद्र में हैं, तो यह कोई सामान्य बात नहीं है।
चाहे कश्मीर नीति हो, चीन युद्ध या उनकी आर्थिक नीतियां नेहरू पर आज भी हर रोज तीखे सवाल दागे जाते हैं। सार्वजनिक जीवन में रहने वाले किसी भी नेता को सवालों के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता, और नेहरू भी इसके अपवाद नहीं हैं।
लेकिन आज की राजनीति में जहां तर्कों के बजाय चीख-पुकार हावी है, पूर्व सांसद व रचनात्मक कांग्रेस के अध्यक्ष संदीप दीक्षित एक अलग लकीर खींचते हैं। सोमवार को राजेंद्र भवन में नेहरू की आर्थिक नीतियों पर बात करते हुए वे न तो आक्रामक होकर उन्हें डिफेंड करते दिखे, और न ही रक्षात्मक बैकफुट पर जाते हैं।
उनका कहना है: 'अगर किसी ने वाकई अच्छा काम किया है, तो वह देश के सामने खुद-ब-खुद आ जाएगा उसे किसी सरकारी इश्तेहार की जरूरत नहीं है।'
@Interceptors सबको महान बनना है भले ही सेंसेलेस क्यों न हो? गांधीजी के प्रतिरोध की भाषा एक अशिक्षित और लोकतंत्र विहीन समाज के लिए थी। अगर आप समय के साथ प्रतिरोध की नई भाषा नहीं तैयार करेंगे तो सत्ता तो क्या जनता भी ध्यान नहीं देगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी छह दिवसीय इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा समाप्त कर स्वदेश लौट चुके हैं। संसद का मानसून सत्र अगले सप्ताह 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। ऐसे में स्वाभाविक है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर चर्चा एक बार फिर जोरों पर है। अगर पिछले दो कार्यकाल को आधार बनाया जाए तो जो होना है, 19 जुलाई से पहले हो जाना चाहिए वरना सितंबर तक इंतजार करना पड़ सकता है।
अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अंतिम निष्कर्ष चाहे जो भी निकले। इसने मंदिरों में चढ़ावे की व्यवस्था के बारे में नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंदिरों में डिजिटल दान, CCTV निगरानी, वीडियोग्राफी और सख्त ऑडिट को लेकर व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। उद्देश्य सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत करना है।
🧵 क्या-क्या बदलेगा? 👇
📹 निगरानी और ऑडिट भी होंगे मजबूत
सरकार ने निर्देश दिए हैं:
• प्रमुख स्थानों पर CCTV (Night Vision और Audio Recording सहित)
• CCTV फुटेज कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखना
• नकदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का फिजिकल और डिजिटल रिकॉर्ड
• मासिक आंतरिक सत्यापन और निरीक्षण
बाहर से शांत नजर आ रहे मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और दतिया के पूर्व विधायक नरोत्तम मिश्रा अंदर से कितने शांत है इसका अनुमान लगा पाना मुश्किल है। यह भी देखने वाला होगा कि उनके समर्थकों का मन उनके इस बयान से शांत होता है या अशांत बना रहेगा? परिस्थितियां बदलने के साथ वह समर्थक बने भी रहते हैं या नहीं इसमें भी संशय है। कुछ हो न हो दतिया में पार्टी हारी तो ठीकरा नरोत्तम मिश्रा के सर फूटेगा और जीती तो सेहरा संगठन और सरकार के सर बंधेगा। आगे पार्टी उनका उधार रखेगी या उद्धार करेगी यह तो समय ही बताएगा।
VIDEO | Delhi: On Datia bye-election, senior Madhya Pradesh BJP leader Narottam Mishra says, "It is now settled that no individual's stature is greater than the party. The fact that the ticket wasn't given answers that no one is above the party. The party stands at a much higher position and can see far into the distance from above. Accepting the decision made by the party with utmost respect and working for the organisation is our sole objective. I will work as a dedicated party worker. I will attend Ashutosh Tiwari's nomination filing."
On being dropped from candidature, he says, "No, I don't blame the organisation, nor do I blame the Chief Minister. I do not point fingers at anyone. I believe that there must have been some shortcoming on my part. I will introspect and improve myself. Yesterday, we had a meeting with the honorable State President and Regional Joint General Secretary (Organization) Ajay Jamwal Ji at the Chief Minister's residence, where we discussed winning Datia, the filing of nominations, and matters concerning other party workers."
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
📌 अगले एक सप्ताह की बड़ी तस्वीर
• देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। • कई राज्यों में भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज़ हवाओं की संभावना।
• पूर्वोत्तर, पूर्वी भारत और मध्य भारत में विशेष सतर्कता की आवश्यकता।
#WeatherUpdate#Monsoon2026#RainAlert#IMD #IndiaWeather
क्या अगले कुछ दिन देश के कई राज्यों के लिए भारी बारिश और तेज़ आंधी के लिहाज़ से चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार 11–17 जुलाई के दौरान देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, 40–60 किमी/घंटा की तेज़ हवाएं, आकाशीय बिजली और कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है।
🧵 किन राज्यों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ सकता है? 👇
⚡ दक्षिण भारत में दोहरी चुनौती
✔ केरल एवं माहे तथा तटीय कर्नाटक में व्यापक वर्षा। ✔ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, रायलसीमा में कई स्थानों पर बारिश।
✔ तमिलनाडु एवं पुडुचेरी में गरज-चमक और 40–60 किमी/घंटा की तेज़ हवाओं का अनुमान।
दिलचस्प बात यह है कि तटीय आंध्र प्रदेश एवं यनम में 11–12 जुलाई के दौरान हीट वेव की संभावना भी जताई गई है।