अखलाक का जलता हुआ घर देख रहा हूं।
देखा नही जाता मगर देख रहा हूं। मज़लिस का सिपाही
Big fan of @asasowaisi Sahab
@aimim_national कार्यकर्त्ता
बिहारी बाबू ❤️
AIMIM प्रेसिडेंट बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी साहब ने कारवां MLA कौसर मोहिउद्दीन साहब और AIMIM के एक्स-कॉर्पोरेटर्स के साथ अरुणा कॉलोनी, सेवन टॉम्ब्स रोड, टोलीचौकी, हैदराबाद में नीलगिरी कैफे का उद्घाटन किया।
उसी शहर से आप भी निकले हैं,
आप ने सीढ़ियों का इस्तेमाल किया और फिर सीढिय़ों को तोड़ दिया ताकि कोई और ना चढ़ सके।
नीचे वाला शेर भले अज्ञात है लेकिन ये वाला शेर ज़रूर इमरान प्रतापगढ़ी का है।
एक शायर का दावा है कभी भी रद नहीं होगा।
तेरे कद के बराबर अब किसी का कद नहीं होगा।
इलाहाबाद वालों मेरी बात याद रखना तुम।
कई सदियों तक कोई "अतीक अहमद" नहीं होगा।
जो इंसान बाप की तरह था उसके लिए भी एक शब्द नहीं निकले और अब उनके बेटे जो तुम्हारे भाई की तरह थे उनके लिए एक पोस्ट तक नहीं कर पाए।
छात्रों की गूंज के साथ साथ ये भी तो जरूरी था। कमसे कम एक पोस्ट तो कर देते पुरानी ही सही।
इनकी तरह इनकी शायरी भी झूठी निकली। इमरान भाई आप की बहुत इज्जत करता था। आप सेल्फिश निकले।
बीते दिनों दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में देश भर के मुस्लिम नेता सर जोड़कर बैठे थे। इनमें दो पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व नौकरशाह, धर्म गुरु शामिल थे। मीटिंग हो गई! मीटिंग के बाद प्रेस कांफ्रेंस भी हो गई। अब सवाल है कि इसके बाद क्या?
शहर का नाम बदला है,
लेकिन दोगलों का नाम वही है।
इलाहाबाद अतीक अहमद के टाईम पर था।
प्रयागराज प्रोफ़ेसर के टाईम पर हुआ।
आप ने भी टाइम के साथ अपने बाप बदल लिए।
आखिर क्या मजबूरी है? एक फोटो लगाकर शोक तो जता सकते थे।
आप की रीढ़ में इतना भी राघव चड्ढा नहीं है जो ऐसा कर सके।
मौजूदा समय के मुल्क मे अव्वल दर्जे का मुस्लिम नेता असदुद्दीन ओवैसी साहब ने संविधान के आर्टिकल की रोशनी मे बताते हुऐ, वन्दे वातरम मुस्लिमों पर थोपा जा रहा है, ऐसे बयान रख अपनी बात रखी।
इस सदी में जाने कितने झूठ फैलाए गए,
जिन्हें एक ग़ज़ल भी लिखना न आया,वो शायर कहलाए गए।
मफ़ादपरस्ती का नशा भी क्या नशा है दोस्तों,
जिनके कंधों पर खड़े होकर ऊँचाइयाँ हासिल कीं,उन्हीं लोगों को बाद में भुलाए गए।
इमरान प्रतापगढ़ी ✍️
Dear @DM_Katihar kindly ask your @BiharDMD to provide adequate support to the family, we can help in limited ways but @officecmbihar issued the notification related to this. Please ask your official to provide better assistance to victims families. In this case in Balrampur Assembly.
इलाहाबाद चकिया में अली अहमद और उमर अहमद की एक झलक पाने के लिए पूरा इलाहाबाद उमड़ पड़ा है।
मरहूम अबान की मिट्टी में लाखों की भीड़। अल्लाह मरहूम को जन्नत नसीब फरमाए।
यूपी : बरेली में कांवड़ यात्रा मार्ग पर बिरयानी बिक रही थी। बजरंगदल कार्यकर्ताओं ने पहले 1 KG बिरयानी मंगवाई, फिर जिला प्रशासन को सूचना दी। प्रशासन बुलडोजर लेकर पहुंच गया और बिरयानी शॉप के बाहर रखे काउंटर और टीन शेड को गिरा दिया। सलमान को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
@Asifansari9410
स्वघोषित मौलाना साजिद रशीदी ने कुछ दिन पहले कांवड़ियों पर एक आपत्तिजनक बयान दिया था, जो उनका निजी बयान है, उससे मुसलमानों का कोई लेना देना नहीं है, इसके बावजूद कुछ मीडिया के लोगों ने सभी मुसलमानों को कटघरे में खड़े करने की कोशिश की है।
रशीदी के बयान पर उत्तर प्रदेश मुजफ्फरनगर में FIR हुई है, लेकिन हम इनकी गिरफ्तारी की मांग करते हैं, इन्हें आने वाले यूपी विधानसभा चुनाव तक जेल में ही रखा जाए।
साजिद रशीदी कुछ दिन पहले नाजिया इलाही खान के साथ मंच शेयर कर रहे थे, उसी नाजिया इलाही खान के साथ जिसने हमारे नबी को शान में गुस्ताखी की थी, दरअसल रशीदी जैसे लोगों का इस्लाम व मुसलमानों से कोई लेने देना नहीं है, वो अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं..!
इस मंच पर तक़रीर करने वाले ‘मुक़र्रिर’ को देखिए, सुनिए! फिर यह भी देखिए कि जब यह तक़रीर की जा रही थी तब ‘मुक़र्रिर’ क्या था! और आज क्या है। जिस शख्स को मुक़र्रिर ने ‘बाप की हैसियत’ दी थी, उस शख्स के परिवार पर ग़म का पहाड़ टूटा है, और यह एक बार नहीं कई बार हुआ है। सवा तीन साल पहले उस परिवार में 24 घंटे के भीतर तीन जनाज़े उठे, जिसमें एक जनाजा उस शख्स का भी था, जिसे इस मुक़र्रिर ने ‘बाप की हैसियत’ दी थी। बाकी दो जनाज़े उस शख्स के भाई और बेटे के थे। लेकिन वह मुक़र्रिर उस वक्त भी उन जनाजों पर सार्वजनिक तौर पर शोक प्रकट भी नहीं कर पाया था।
बीते रोज़ उसी परिवार का एक और सदस्य सुपुर्द-ए-खाक हुआ है। लेकिन मजाल भला कि यह मुक़र्रिर जो अब ‘सांसद’ भी है वह उस दुर्घटना पर सार्वजनिक तौर पर ग़म का इज़हार भी कर पाता। जब कांधों पर चढ़कर ‘बड़ा’ बनना था, तब भरे मंच से उस शख्स को ‘बाप’ बता दिया था। और जब बारी कांधा देने की आई तो ‘बेख़बरी’ की चादर तान ली। क्यों? क्या यह ‘डर’ था कि इससे राजनीतिक ‘तरक्की’ रुक सकती? माना हालात ‘अच्छे’ नहीं हैं, लेकिन इतने भी बुरे नहीं हैं कि किसी ‘अपने’ की मौत पर ग़म का इज़हार भी ना कर सकें।
@ECISVEEP@CommissionrGHMC
Wanted to bring this to your Urgent Notice that since yesterday we have received too many complaints from people at our SIR Guidance Desk that BLO's have clearly told them that they won't be taking Enumeration forms on 9th (Bonalu) and 10th (Rangam - public holiday).
Many ppl we're seen panicking at the Desk.
Kindly look into this Sir coz as per EC ppl do have time till 10th Aug, on which these BLO's are not willing to work citing holidays.
लम्बाई -------- कुल 63 km.
गड्ढे ------------ सिर्फ ( 84 )
लागत --------- 4700 करोड़ रु. ( 74 cr. / km. )
विभाग---------- NHAI...
मंत्री जी ------- नितिन गडकरी फ्रॉम ( नागपुर )
नोट :- ना तो company पर अभी तक FIR हुई
और ना ही मंत्री जी ने ज़िम्मेदारी ली
ना ही मालिक गिरफ्तार हुआ
ना ही विभाग के किसी अधिकारी या इंजीनियर के खिलाफ कोई कार्यवाही हुई ...
अब क्या कहेंगे आप?
उसी इलाहाबाद में उस शख्स की कब्र है जो शख्स इस ‘शाइर’ के लिए ‘बाप की हैसियत’ रखता था। उसी ‘बाप’ की हत्या पर यह शाइर सार्वजनिक तौर पर “इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन” तक नहीं कह पाया था। आज उसी शहर में आबान का दफनाया गया है, आबान उसी शख्स का बेटा था जो शख्स इस शाइर के लिए ‘बाप की हैसियत’ रखता था। जब ‘अज्ञात’ शायरी पोस्ट करके पुरानी याद को ज़िंदा कर ही रहे हैं, तो इस याद में उन कब्रों पर भी फातिहा पढ आना, जिनमें दफन लोगों के कांधों का इस्तेमाल ‘ऊंचाइयों’ पर पहुंचने के लिए किया था।
उसी इलाहाबाद में उस शख्स की कब्र है जो शख्स इस ‘शाइर’ के लिए ‘बाप की हैसियत’ रखता था। उसी ‘बाप’ की हत्या पर यह शाइर सार्वजनिक तौर पर “इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन” तक नहीं कह पाया था। आज उसी शहर में आबान का दफनाया गया है, आबान उसी शख्स का बेटा था जो शख्स इस शाइर के लिए ‘बाप की हैसियत’ रखता था। जब ‘अज्ञात’ शायरी पोस्ट करके पुरानी याद को ज़िंदा कर ही रहे हैं, तो इस याद में उन कब्रों पर भी फातिहा पढ आना, जिनमें दफन लोगों के कांधों का इस्तेमाल ‘ऊंचाइयों’ पर पहुंचने के लिए किया था।