फरमाने मुस्तफाﷺ
अल्लाह तआला फ़रमाता है।
क़सम है मेरी इज़्ज़त की मेरा जो बंदा शराब की एक घूंट भी पियेगा मैं उस को उतनी ही पीप पिलाऊंगा और जो बंदा मेरे ख़ौफ़ से छोड़ देगा मैं उस को हौज़े क़ुदस से पिलाऊंगा।
यह अत्याचार और अन्याय की सबसे घटिया शक्ल है जो उत्तर प्रदेश में हो रही है। मौलाना तौकीर रज़ा खान की गिरफ्तारी और उन पर लगाए गए सभी आरोपों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, और इस बीच उनके करीबियों, रिश्तेदारों और सम्बंधितों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई अस्वीकार्य है। उनकी दुकानें या संपत्तियाँ जमींदोज की जा रही हैं — यह न्याय के सारे पैमाने पार कर चुका है। अगर मौलाना से हिसाब लेना है तो वह मामला केवल उन्हीं तक सीमित होना चाहिए; उनके समर्थकों या परिवार को निशाना बनाना इतिहास में एक शर्मनाक रवैया है|
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में पुलिस प्रशासन के सामने बैरिकेडिंग तोड़ कर उपद्रव करते हिंदूवादी संगठन।
यही नहीं उपद्रवियों ने मजार भी तोड़ी। क्या प्रशासन सच में लाचार हो चुका है? अभी तक FIR और गिरफ़्तारी क्यूं नहीं हुई?
सरकारें आती हैं, वादे किए जाते हैं, मगर ज़मीनी हालात नहीं बदलते। करोड़ों रुपए तटबंधों की मरम्मत और निर्माण के नाम पर खर्च होते हैं — फिर भी बाढ़ आती है, और तबाही साथ लाती है। आखिर क्यों?
आलमनगर की बाढ़ अब कोई नई बात नहीं है ये एक स्थायी संकट बन चुका है।
हर साल वही मंजर दोहराया जाता है: गांव डूबते हैं, घर उजड़ते हैं, लोग जान बचाने के लिए छतों पर शरण लेते हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, खेत बर्बाद हो जाते हैं, और हर तरफ बस बेबसी और दर्द का सन्नाटा पसरा होता है।
एक ही देश में दो तरह का कानून चल रहा है, सड़क पर 5 मिनट की नमाज़ पढ़ने पर पीटा जाता है और कावड़ियों के लिए पूरा नेशनल हाईवे बंद कर दिया जाता है: सायमा खान (सोशल एक्टिविस्ट)
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बिहार के सीतामढ़ी से दरिंदगी की सारी हदें पार कर देने वाली घटना पेश आई है।नानपुर थाना क्षेत्र में 11 साल की मासूम नाबालिग मुस्लिम बच्ची ने पेड़ से आम तोड़ लिया।जिस पर गाँव के पांच हैवानों ने पहले गैंगरेप किया,फिर मुंह को कुचला,सिगरेट से चलाया फिर टांग दिया।
@AshrafFem इन लोगों की गिरफ्तारी कब होगी जो मस्जिद की सर्वे करने जा रहे है और JSR के नारे लगा रहे है
इन लोगों पर भी करवाई होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ करवाई सिर्फ मुसलमानों पर हुई है
रयूफ अंसारी SSB के जवान हैं, UP में जिला मिर्जापुर के निवासी हैं। 4 साल पहले पाई–पाई जोड़कर मकान बनवाया। छुट्टियां खत्म हुईं तो अधूरा मकान छोड़कर पोस्टिंग पर छत्तीसगढ़ चले गए। पीछे से किसी संतोष ने मकान पर कब्जा कर लिया। रयूफ अब 4 साल से अपने ही मकान में घुसने को भटक रहे हैं।
ऐसा तो भारत में अब तक कभी नहीं हुआ फिर अब क्यों?
मस्जिद को तिरपाल से ढकने की आखिर ऐसी क्या वजह है कि हमें ये सब करने की जरूरत पर रही है? - अभिसार शर्मा 👇
पाकिस्तान में रहे वाले हिंदू बोले👇
‘हिंदू हूं और पाकिस्तान में रहती हूं,
यहां कोई डर नहीं है। सरकार सिक्योरिटी देती है, मंदिरों में कभी धमाके नहीं होते'