एक दलित बच्चे को लड़को द्वारा पीटा जाना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा को चुनौती देने जैसा है।
जाति के नाम पर हिंसा किसी भी सभ्य समाज के ��ाथे पर कलंक है। अगर आज भी ऐसे दृश्य सामने आते हैं, तो यह हम सबके लिए आत्मचिंतन का विषय है।
न्याय तभी सार्थक होगा जब दोषियों पर बिना किसी भेदभाव के तत्काल और कठोर कार्रवाई होगी।
जात नहीं, न्याय सबसे ऊपर होना चाहिए।
#Justice #StopCasteViolence
यह तस्वीर मोहम्मद ज़ैद की है। ज़ैद अब दुनिया में नहीं है। ज़ैद दिल्ली के मुस्तफाबाद के रहने वाले थे। यह इलाक़ा लोनी बॉर्डर पर है। लोनी यूपी के गाजियाबाद में आता है। ज़ैद अपने दो दोस्तों, नदीम और इब्राहिम के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर बेहटा स्थित एक स्विमिंग पूल में नहाने के लिए जा रहे थे। वो जैसे ही लोनी मेन रोड से बेहटा रोड की तरफ मुड़े, तभी एक एक कार से उनकी बाइक की हल्की ��ी टक्कर हो गई। इसके बाद कार में बैठा राहुल अपने दोस्त के साथ उतरा और जैद को को पीटना शुरू कर दिया। बात सिर्फ यही तक नहीं रही बल्कि राहुल अपने दोस्त के साथ ज़ैद को जबरन जैद कार में भरकर मनीष प्रॉपर्टीज नामी ऑफिस ले गया, वहां उन्होंने ज़ैद को बेरहमी से पीटा।
जब जैद के दोस्त नदीम और इब्राहिम बाइक लेकर वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि जैद बेहोशी के हाल में ज़मीन ��र पड़ा हुआ है, और राहुल नामी युवक लगातार गाली-गलौज करते हुए उसे लातों से बेरहमी से पीट रहा है। राहुल ने ज़ैद के दोस्त नदीम और इब्राहिम को धमकी देते हुए कहा कि इसे ले जाओ, नहीं तो तुम्हारा भी यही हाल होगा। वो दोनों दोस्त जैद को उठाकर अस्पताल लेकर पहुंचे, वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद जैद को मृत घोषित कर दिया।
पिछले कुछ वर्षों में एक बुलडोज़र और एनकाउंटर का चलन देखा गया है। दिल्ली में तरुण क�� हत्या हुई तो उसे इंसाफ दिलाने के नाम पर आरोपितों के घर को तोड़ दिया गया। उसके बाद दिल्ली से सटे खोड़ा में सूर्य की हत्या हुई तो हत्यारोपी का चौबीस घंटे के भीतर एनकाउंटर कर दिया गया। अब सवाल ज़ैद को इंसाफ दिलाने का है। जब हत्या के बदले एनकाउंटर और बुलडोज़र का ही चलन शुरू हो चुका है, तब ज़ैद के हत्यारोपी का एनकाउंटर क्यों नहीं किया जा रहा? उनके घरों पर बुलडोज़र क्यों नहीं चलाया जा रहा? सूर्या और ���रुण की हत्या के बाद सत्ताधारी द��� के अनुषांगिक संगठनों और नेताओं ने किस तरह बयानबाज़ी करके आपसी रंजिश में हुई इन हत्याओं को ‘दूसरा’ रंग दिया था, यह पूरे देश ने देखा है। खोड़ा और उत्तम नगर की गलियों में घूमते नफ़रती यू-ट्यूबिए किस तरह इन हत्याओं का दोष पूरे समुदाय पर मढ़ रहे थे, यह भी पूरे देश ने देखा है। सवाल फिर वही है कि जब किसी हिंदू के ग़ैर हिंदू हत्यारे के खिलाफ पुलिस और सरकार बुलडोज़र और एनकाउंटर एक्शन को अमल में लाती है, तब ज़ैद के हत्यारों पर यह कार्रावाई क्यों नहीं होनी चाहिए? हत्यारों से निपटने का यह फॉर्मूला सरकार और पुलिस ने खुद शुरू किया है, तो इसमें भेदभाव क्यों?
सरकार ने तरुण और सूर्या के परिजनों को मुआवज़ा दिया है। तरुण के हत्यारोपितों का घर गिराया है, तो सूर्या मर्डर के नाबालिग आरोपी को एनकाउंटर में मारा है। अब सवाल है कि यह त्वरित ‘इंसाफ’ ज़ैद को क्यों नहीं? क्या वो इंसान नहीं? क्या वो भारतीय नागरिक नहीं? उसके परिवारजनों को मुआवज़ा क्यों नहीं? उसके हत्यारोपितों का एनकाउंटर क्यों नहीं? बुलडोज़र एक्शन क्यों नहीं? क्या इस देश में दो कानून हैं? जब बुलडोज़र और एनकाउंटर चलन शुरू हो ही चुका है, तब इसमें भेदभाव क्यों? क्या मदर ऑफ डेमोक्रेसी में सब कुछ नाम के आधार पर होता है?
गोरखपुर के पिपराइच थाने में पुलिस की कथित बर्बरता का एक गंभीर मामला सामने आया है,
जहाँ अब्दुल रहीम नामक युवक को बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि प��लिस ने मामूली बात और दीवान जी की नींद में खलल पड़ने के कारण युवक की निर्मम पिटाई की, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा। इस घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है।
जब प्रशासन ही छोटी सी बात ऐसे ज़ुल्म करेगी तो फिर आम जनता का हाल क्या होगा
एक महिला बीमार बच्चा लेकर, दवा कराने के लिए बैंक में से पैसे निकालने के लिए बैठी है, और मैडम कूलर की ठंडी ठंडी हवा लेते हुए, मंद मंद मुस्कुराहट के साथ कह रही हैं मैं ��ौकर नहीं हूं। सरकारी कर्मचारी क्या होता है??🤔
पश्चिम बंगाल के एक 50 वर्षीय बुज़ुर्ग मुस्लिम फेरीवाले को सिर्फ़ उसके मुस्लिम होने की वजह से एक कट्टरपंथी व्यक्ति द्वार�� पीटा जा रहा है। इतना ही नहीं, उसे सांप्रदायिक गालियाँ देकर अपमानित भी किया जा रहा है।
नपुंसकता अब इस से ज़्यादा नहीं देखी जा सकती।
📍 राजीव चौक, दिल्ली
सिर्फ़ शक की बुनियाद पर एक गरीब मुस्लिम युवक को घेरकर बेरहमी से पीट दिया गया। खुद को गौरक्षक और हिंदू संगठन से जुड़ा बताने वाले विक्की और उसके साथियों ने उस पर लड़कियों का पीछा करने और तस्वीरें लेने का आरोप लगाया।
विडंबना देखिए, जिन लड़कियों के नाम पर उसे पीटा जा रहा था, वही बार-बार कहती रहीं, "भैया छोड�� दो, जाने दो।" लेकिन भीड़ पर कोई असर नहीं हुआ।
अगर सच में शक था, तो पुलिस किसलिए है? कानून हाथ में लेकर किसी की इज़्ज़त और जान दोनों को रौंद देने का अधिकार किसने दिया?
आज कुछ हिंदूवादी संगठनों के लोगों के लिए सबसे आसान शिकार एक गरीब मुसलमान नज़र आता है। सिर्फ़ शक की बुनियाद पर उसे मारो, पीटो, वीडियो बनाओ और फिर खुद को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा रक्षक बताने लगो। इसके बाद मुसलमानों से नफ़रत करने वाले ���ोग ऐसे लोगों को अपने कंधों पर बैठाकर हीरो बना देते हैं।
A Muslim Urdu teacher was slapped by a BJP leader.
At Bharat Chandra School in Armoor, Nizamabad, an Urdu teacher named Amer, a resident of Ziyarat Nagar, was attacked and slapped by a BJP leader who entered the school during class. The incident occurred in the presence of police.
According to the school, Amer was teaching Urdu to students as per management instructions when the incident took place.
घर उजड़ने की तकलीफ़ - बेचैनी - असहाय होना. किससे न्याय माँगे, कहाँ जाये?
राजस्थान के बाड़मेर में भील आदिवासी परिवारों के घर तहस नहस कर दिए गए
आदिवासियों के जंगल ज़मीन धन्ना सेठों को देकर शहर ��ें उनके सिर के ऊपर की छत उजाड़ देंगे - यह कैसा देश बना रहे हैं मोदी जी?
DGCA और उड्डयन मंत्री आखिर कब ध्यान देंगे?
एयर टिकट इतना महंगा होने के बावजूद यात्रियों क��� सामानों की येसी दुर्गति?
जापान और चीन से उड्डयन मंत्रालय कुछ सीखे कि लगेज को कैसे हैंडिल करना है।
गाजियाबाद के लोनी के अंकुर विहार थाना इंचार्ज योगेन्द्र पंवार की यह कैसी भाषा है? दरअस्ल आफताब नामी एक 20 वर्षीय नौजवान की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि परिजनों द्वारा नामजद रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ढुलमुल रवैया अख्तियार किए हुए है। आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पीड़ित परिवार सड़क पर उतर आया। जब यह बात अंकुर विहार थाना इंचार्ज योगेन्द्र पंवार को पता चली तो वहां पहुंचे और वहां पहुंचकर उन्होंने भद्दी गालियां देते हुए कहा ‘बुला अपनी माँ को @ तुम्हारी माँ को चो#%€? वीडियो में आप देखेंगे कि महिलाओं के सामने ही भद्दी गालियां दी जा रही हैं, महिलाओं को धकेला जा रहा है। सवाल यह है कि @dgpup@ghaziabadpolice ऐसे पुलिसकर्मियों के कार्रावाई क्यों नहीं करती, जो पीड़ित की धमका रहे हैं? गालियों की ये ट्रेनिंग उन्हें कहाँ से मिली है?
"तुम्हारी मां का चो#@"
गाजियाबाद, यूपी में आफताब की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हत्यारोपियों क��� गिरफ्तारी को लेकर पीड़ित परिजनों ने सड़क जाम कर दी। जाम खुलवाने पहुंचे इंस्पेक्टर ने खूब गालियां दी।
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Not much more 2 month ago this incident now come in public domain but now,,,,
In India a Muslim boy in police custody has died by police torture..
इधर हम लोग कॉक्रोज प्रोटेस्ट की तरफ देख रहे थे।
उधर कुछ जागरूक लोगों ने मुहम्मद साहब पर अभद्र टिप्पणियां करने वाली नाजिया इलाही पर #FIR करवा दी।
फ्रीडम ऑफ स्पीच की आड़ में आप दुसरो के धर्म को गालियाँ देकर फेम पाना चाहते हो। देश की छवि को डेंट करते हो तो आपसे बड़ा गद्दार कोई दूसरा नहीं है।
पुलिस और कानून का डंडा अब घूमना ही चाहिए।
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Indian BJP supported terrorist beating brutally a Muslim man,,, and demanding to chant Their god name, its shameful for the world, not taken any action on terrorist supporting government...
सोनू पासवान ने फैज की हत्या कर दी लेकिन मीडिया खामोश प्रशासन खामोश ओर न्यायालय भी खामोश ना सोनू के घर पर बुलडोजर चला ना मीडिया का विधवा विलाप हुआ क्यों हत्या मुस्लिम की हुई है अगर हत्या हिंदू की होती ओर हत्यारा मुसलमान होता तो मीडिया प्रशासन सब जाग जाते और कठोर कार्यवाही होती।