उमर खालिद के खिलाफ आखिर एक्जेक्टली सबूत क्या है? उसने गलत क्या किया है?
अगर 3000 पेज की FIR और 30,000 पेज का इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस है, तो छह साल बाद भी ट्रायल क्यों शुरू नहीं हुआ?
टीवी के कोर्ट रूम में उसे आतंकवादी, मास्टरमाइंड और एंटी-नेशनल घोषित कर दिया गया, लेकिन असली कोर्ट रूम में मामला अब तक लंबित है।
आरोप साबित करने हैं तो ट्रायल शुरू कीजिए, सजा सुनाइए आखिर इतनी देरी क्यों?
#UmarSixYearsWithoutTrial
📍 हरदोई, उत्तर प्रदेश
एक महीने से ज्यादा समय से लोग पानी, कीचड़, गंदगी और बदबू के बीच जीने को मजबूर हैं।
हालात इतने बदतर हैं कि बीमार इंसान को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक घर नहीं पहुंच पा रही। बताया जा रहा है कि कल रात एक बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ी, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिल सका और उनकी मौत हो गई।
सबसे दर्दनाक तस्वीर तब सामने आई, जब जनाज़ा उठाने वाले परिवार को भी पानी और कीचड़ से होकर अपने ही अपनों की तदफ़ीन के लिए जाना पड़ा।
क्या प्रशासन किसी और मौत का इंतज़ार कर रहा है?
जब जनता महीनों से चीख रही हो और व्यवस्था फिर भी खामोश रहे, तो जवाबदेही आखिर किसकी होगी?
पुलिस से लेकर सरकार तक सब जानते है उमर खालिद को बेवजह जेल मे रखा गया है, क्युकी उनका उर्दू नाम है
6 साल बिना ट्रायल के, 6 साल एक राजनीतिक कैदी के रूप में, 6 साल राज्य के दमन के
#UmarSixYearsWithoutTrial
बुशरा बानो ने “अस्सलामुअलैकुम”, “इंशाअल्लाह” और “जज़ाकल्लाह” क्या कह दिया, कुछ लोगों को उनकी वर्दी और संविधान अचानक याद आ गया।
लेकिन यूपी में ऑन ड्यूटी धार्मिक जुलूस में गदा लेकर शामिल हुए CO अनुज चौधरी पर सवाल करने की बारी आती है तो वही लोग चुप्पी साध लेते हैं।
धर्म के शब्दों से इतनी परेशानी है तो वर्दी में धार्मिक प्रदर्शन पर भी सवाल उठाइए।
निष्पक्षता सिर्फ़ एक तरफ़ के लिए नहीं होती।
इस देश में हमारा होना हमारी वतन परस्ती का सबूत है, हमारा नेता मुहम्मद अली जिन्ना नहीं था नहीं है।हमारे नेता महात्मा गांधी, डाक्टर भीमराव अम्बेडकर, एपीजे अब्दुल कलाम हैं…
#UmarSixYearsWithoutTrial
उमर खालिद के जेल जाने से पहले उनका इंटरव्यू लिया था.. उस बातचीत में उनकी शख्सियत को करीब से समझने का मौका मिला था
उमर का ट्रायल तो शुरू कीजिए.. छह साल हो चुके हैं। फैसला कीजिए.. सज़ा देने के लिए पहले गुनाह तो साबित कीजिए
#UmarSixYearsWithoutTrial
उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यो में नमाज़ पढ़ने को लेकर विवाद होता आ रहा है. कई लोगों के खिलाफ अपने घर में नमाज पढ़ने पर मुकदमा दर्ज हो चुका है.
इस बीच #BRICS सम्मेलन में विदेशी मेहमानों के लिए नमाज़ की सुविधा उपलब्ध कराने के मुद्दे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
#Namaz#MobLynching
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रेस कांफ्रेंस में सवाल करने वाली महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव परेशान हो गई है ये बताते कि मुझे
कोई विपक्ष के नेता नहीं भेजा था..
लेकिन फिर भी ट्रेलिंग गैंग उसके पोस्ट में गंदे गंदे कमेंट किए जा रही है..
मै इस बहन से इतना ही कहूंगा यही करने के लिए हर दिन करोड़ों रूपये खर्चा किए जाते है...
खसरा नंबर 539 याक़ूब ख़ान वहीद ख़ान के नाम दर्ज है, जिसमें मंदिर, मस्जिद कलेक्ट्रेट सब है।
मस्जिद 1947 के पहले बनी है,वक्फ बोर्ड में दर्ज है।
बिना वक़्फ़ बोर्ड को पार्टी बनाये एक तरफ़ा फैसला देकर मस्जिद गिरा दी गई, देखिए चुनाव के पहले यू पी में नफ़रत फैलाने का कैसा खेल खेला जा रहा?
वैधानिक चेतावनी “भाजपाई दंगाइयों से सावधान”
लखनऊ: हार के डर से बीजेपी यू पी का माहौल खराब करना चाहती है।
सहारनपुर की मस्जिद तोड़ना BJP की बौखलाहट है।
ये देश किसी मोदी योगी के फ़रमान से नहीं बाबा साहेब के संविधान से चलेगा।
सहारनपुर की मस्जिद तोड़ना संसद के क़ानून का खुला उल्लंघन है,दोषियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही होनी चाहिये।
मदर ऑफ डेमोक्रेसी की न्याय व्यवस्था और न्याय पालिका पर पूर्व @judgemanoj_ ने तीखे प्रहार किये हैं। उन्होंने दावा किया है कि संविधान के विरोध में जो कानून संसद से नहीं बन पा रहे थे, वही कानून अब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से बन जा रहे हैं।
जब सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद Registered Waqf Property है, तो फिर @BJP4India की @myogiadityanath सरकार ने इसे शहीद क्यों किया? : Barrister @asadowaisi
वालिद खान और याकूब खान की गाटा संख्या 539 की जमीन पर सहारनपुर कलेक्ट्रैट की मस्जिद बनी हुयी थी। खास बात उन्होंने ही जमीन को कलैक्ट्रेट, कोषागार और तहसील बनाने के लिए डोनेट किया था!
अब वही प्रशासन कह रहा है कि मस्जिद ही अवैध है! है न गजब
सहारनपुर में तीन मुस्लिम विधायक हैं। दो MLA और एक MLC सहारनपुर में सांसद भी मुसलमान है। सहारनपुर मुसलमानों के सपोर्ट से सांसद में पहुंचने वाले चंद्रशेखर आज़ाद का गृह जनपद भी है। सहारनपुर से सटी हुई एक लोकसभा सीट से मुसलमान सांसद है, जबकि दूसरी सीट से सपा के हरेंद्र मलिक सांसद हैं। इसके बावजूद सहारनपुर में दशकों पुरानी मस्जिद को अवैध बताकर शहीद कर दिया गया।
अब सारे नेता कह रहे हैं कि संविधान की धज्जियाँ उड़ा दी गईं। सवाल यह है कि ये धज्जियाँ बचेंगी कैसे? तब एक ही रास्ता बचता है, और वो रास्ता संघर्ष का है, जिस जेल से ‘डराया’ जा रहा है, उसी जेल भरो आंदोलन का है। कितने ऐसे नेता हैं, जो संविधान की उड़ती धज्जियों के खिलाफ जेल भरो आंदोलन शुरू कर सकें? कुछ माननीय कह रहे हैं कि उन्हें ‘हाउस अरेस्ट’ कर लिया गया। यह अजीब कुतर्क है! ये ऐसे नेता हैं जिनकी पार्टी के सुप्रीमो जहां जाना चाहते हैं, वहां वो पहुंच ही जाते हैं, भले ही कितना बंदिशें लगी हों!
पुलिस स्टेशनों और पुरानी बनीं पुलिस चौकियों में मंदिर बने हुए हैं। लगभग हर शहर में शिव चौक, श्री राम चौक, हनुमान चौक हैं, वो मंदिर हैं। लेकिन उससे किसी को आपत्ति नहीं है। सदियों पुरानी इबादतगाहों बुजुर्गों के आस्ताने को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि अपने पारंपरिक वोट बैंक को तुष्टिकरण किया जा सके! क्या किसी मुस्लिम संगठन ने सरकारी परिसर में बने मंदिरों का विरोध किया है? क्या किसी मुस्लिम संगठन ने उनके वैध अथवा अवैध होने का सवाल उठाया है? नहीं। लेकिन इबादतगाहों से तकलीफ है!